Delhi Fire Service Crisis: राजधानी एक ओर विकास और सपनों की उड़ान भर रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। ऊंची इमारतें, भीड़भाड़ वाली सड़कें और तंग गलियों के बीच जिस मजबूत फायर सेफ्टी सिस्टम की जरूरत है, वह आज कमजोर नजर आ रहा है। करीब 3 करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में आग से निपटने के लिए सिर्फ 331 दमकल गाड़ियां मौजूद हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से सिर्फ 247 गाड़ियां ही काम करने की स्थिति में हैं, जबकि 84 गाड़ियां पहले से ही खराब पड़ी हैं। यानी जो संसाधन मौजूद हैं, वे भी पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। स्थिति सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं है। इतना ही नहीं, हालात यहीं नहीं रुकतेजहां विभाग में करीब 4000 दमकलकर्मियों की जरूरत है, वहां सिर्फ करीब 2600 कर्मचारी ही तैनात हैं। यानी विभाग गाड़ियां से ही नहीं, बल्कि करीब 1400 कर्मचारियों की कमी से भी जूझ रहा है।
बड़े हादसों से निपटना और भी मुश्किल
राजधानी में बढ़ती आबादी, ऊंची इमारतें और संकरी गलियां पहले ही जोखिम को बढ़ा रही हैं। ऐसे में सीमित संसाधनों के साथ काम करना दमकल विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। किसी भी आगजनी की घटना में हर सेकंड बेहद कीमती होता है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण वही सेकंड मिनटों में बदल जाते हैं। सूत्रों के अनुसार, कई फायर स्टेशनों पर स्टाफ की कमी साफ देखी जा सकती है। ऐसे हालात में बड़े हादसों से निपटना और भी मुश्किल हो जाता है। दमकलकर्मी लगातार दबाव में काम कर रहे हैं और एक-एक कर्मचारी पर कई गुना ज्यादा जिम्मेदारी आ गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब लगातार आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो फायर डिपार्टमेंट में संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे?
आग से बचाव में जागरूकता जरूरी
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकतर रिहायशी इलाकों में लोग अपने घरों में बुनियादी सुरक्षा उपकरण तक नहीं रखते, जिससे आग लगने की स्थिति में घबराहट और खतरा दोनों बढ़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि घर में रेत की बाल्टी और पानी से भरी दो बाल्टियां हमेशा तैयार रखनी चाहिए, जिससे शुरुआती स्तर पर आग पर काबू पाया जा सके। अधिकारियों का यह भी कहना है कि आग लगने के दौरान घबराने की बजाय सही कदम उठाना बेहद जरूरी है। ऐसी स्थिति में लोगों को खड़े रहने के बजाय फर्श पर बैठना या जमीन पर लेट जाना चाहिए, क्योंकि धुआं ऊपर की ओर फैलता है और नीचे रहने से बचाव की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा आजकल ज्यादातर फ्लैट और घरों में केवल एक ही सीढ़ी होती है। आग लगने पर वही रास्ता बाधित हो जाता है, जिससे लोगों के बाहर निकलने में मुश्किल होती है और हादसे बढ़ जाते हैं। इसलिए हर घर और फ्लैट में दो सीढ़ियों की व्यवस्था बेहद जरूरी है, ताकि आपात स्थिति में सुरक्षित निकास संभव हो सके।
रिपोर्ट: प्रशांत चौहान
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