‘विकसित भारत’ के लिए दूरदर्शी और जिम्मेदार नेतृत्व तैयार करें युवा : एलजी संधू

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Delhi : दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में देश के भावी प्रबंधकों की जिम्मेदारी केवल सफल कारोबारी बनना नहीं, बल्कि ऐसे नेतृत्व का निर्माण करना है, जो समाज, अर्थव्यवस्था और देश के भविष्य को नई दिशा दे सके। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, नवाचार और ईमानदारी के बल पर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। ये बात ‌दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शनिवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रोहतक में…

Delhi : दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में देश के भावी प्रबंधकों की जिम्मेदारी केवल सफल कारोबारी बनना नहीं, बल्कि ऐसे नेतृत्व का निर्माण करना है, जो समाज, अर्थव्यवस्था और देश के भविष्य को नई दिशा दे सके। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, नवाचार और ईमानदारी के बल पर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

ये बात ‌दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शनिवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रोहतक में पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम (पीजीपी) बैच-17 के उद्घाटन एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान कही।। उन्होंने कहा कि किसी शीर्ष प्रबंधन संस्थान में प्रवेश केवल एक डिग्री हासिल करने की शुरुआत नहीं, बल्कि व्यापक सोच, जिम्मेदार नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की यात्रा का पहला पड़ाव है।

उन्होंने कहा कि भारत आज एक साथ बुनियादी ढांचे का विस्तार, डिजिटल क्रांति और दुनिया की सबसे युवा आबादी की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे दौर में किसी प्रबंधक का हर निर्णय केवल किसी कंपनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका सीधा असर रोजगार, सामाजिक बदलाव, शहरी विकास और जनहित पर पड़ता है। इसलिए आज के नेताओं को केवल एक क्षेत्र तक सीमित सोच रखने के बजाय तकनीक, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स और सुशासन जैसे विभिन्न क्षेत्रों को साथ लेकर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी।

“सच्चा नेतृत्व अधिकार थोपने से नहीं, बल्कि…”

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में प्रबंधन शिक्षा का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग या अधिक लाभ कमाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी बदलाव, पर्यावरणीय चुनौतियों और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के बीच संतुलित, दूरदर्शी और जिम्मेदार निर्णय लेने की कला बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व अधिकार थोपने से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, स्पष्ट सोच और लोगों का विश्वास जीतने की क्षमता से पैदा होता है।

यही गुण एक सफल प्रबंधक और प्रभावी नेता की पहचान हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे आईआईएम में बिताए जाने वाले अगले दो वर्षों का उपयोग केवल पढ़ाई तक सीमित न रखें, बल्कि बौद्धिक अनुशासन विकसित करें, अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए सहपाठियों के अनुभवों से सीखें और स्वस्थ संवाद व विचार-विमर्श के माध्यम से अपने दृष्टिकोण का विस्तार करें। उन्होंने कहा कि जटिल परिस्थितियों में भी दीर्घकालिक सोच के साथ सही निर्णय लेने की क्षमता ही भविष्य के नेतृत्व की सबसे बड़ी पहचान होगी।

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