विंध्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मांग

Summary :

Question Raised In Lok Sabha : सतना लोकसभा क्षेत्र के सांसद गणेश सिंह द्वारा लोकसभा में स्वदेशी एवं जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन से संबंधित पूछे गए प्रश्न के जवाब में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी सदन के पटल पर रखी। इस पर सांसद गणेश सिंह ने विस्तृत एवं तथ्यपरक उत्तर के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए विंध्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मांग उठाई। कोल जनजाति की संस्कृति के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार की…

Question Raised In Lok Sabha : सतना लोकसभा क्षेत्र के सांसद गणेश सिंह द्वारा लोकसभा में स्वदेशी एवं जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन से संबंधित पूछे गए प्रश्न के जवाब में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी सदन के पटल पर रखी। इस पर सांसद गणेश सिंह ने विस्तृत एवं तथ्यपरक उत्तर के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए विंध्य क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मांग उठाई।

कोल जनजाति की संस्कृति के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी

संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय की ‘टीआरआई को सहायता’ योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश के जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) को लगभग 63.81 करोड़ रुपये के बजट से 188 परियोजनाओं और गतिविधियों की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें निमाड़-मालवा का भगोरिया उत्सव, बैतूल, खंडवा, जबलपुर और इंदौर में आयोजित आदिरंग एवं आदिमहोत्सव, कोल, कोरकू और भील जनजातियों की लोककथाओं का अध्ययन एवं प्रलेखन तथा बालाघाट एवं इंदौर में आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव नृत्य उत्सव जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। विशेष रूप से सतना और रीवा जिले की कोल जनजाति के जीवन, संस्कृति, जीवनशैली और प्राकृतिक परिवेश पर आधारित वीडियो प्रलेखन एवं लघु फिल्म परियोजना के लिए वर्ष 2024-25 में 15 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि प्रयागराज स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) ने भोपाल में आयोजित महुआ उत्सव (27 से 29 जून 2026) में मध्य प्रदेश की पारंपरिक गादली नृत्य और गुदुम बाजा मंडलियों को प्रायोजित किया। वहीं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल के सहयोग से बाल रंगमंच कार्यशाला का आयोजन किया। साथ ही भारत भवन रंग मंडल को पुनर्जीवित करने के लिए एनएसडी और मध्य प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं।

विंध्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच देने की मांग

उत्तर पर संतोष व्यक्त करते हुए सांसद गणेश सिंह ने लोकसभा में कहा कि सतना और संपूर्ण विंध्य क्षेत्र में कोल जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा आज भी पूरी जीवंतता के साथ विद्यमान है। उन्होंने बताया कि सतना के भगदेवरा तथा रीवा जिले के त्योंथर में कोल राज के ऐतिहासिक किलों एवं गढ़ियों के अवशेष आज भी मौजूद हैं, जहां समाज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करता है।
उन्होंने कहा कि चित्रकूट, जहां भगवान श्रीराम ने वनवास के 11 वर्ष बिताए थे, वहां प्रतिवर्ष दीपावली मेले में 80 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं और दीपावली नृत्य यहां की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान है।

चित्रकूट, मैहर और कोल लोक परंपराओं को राष्ट्रीय मंच देने की पैरवी

इसी प्रकार मैहर स्थित मां शारदा धाम में दोनों नवरात्र के दौरान प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, जहां पारंपरिक भगत नृत्य और लोकसंगीत विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
गणेश सिंह ने कहा कि कोल नृत्य, फाग, बिरहा, भगत, रामलीला और रामायण गायन जैसी लोक विधाएं विंध्य क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान हैं, लेकिन इन्हें अभी तक केंद्र सरकार के सांस्कृतिक आयोजनों में अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया है।

 

Sumant Chaudhary