दिल्ली की एक सत्र अदालत ने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिसे फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा की साजिश रचने के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसके वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत किसी भी आचरण या अपराध में दंडित होने वाले कृत्य में शामिल नहीं था जबकि अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि यूएपीए प्रावधान लागू था और उसके खिलाफ एक प्रथम ²ष्टया मामला बनाया गया था।
याचिका को खारिज करते हुए, अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि यह विश्वास करने के लिए उचित आधार है कि तन्हा के खिलाफ आरोप ‘प्रथम दृष्ट्या सत्य’ हैं। तन्हा के वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने अदालत को बताया कि दंगों में तन्हा की भूमिका के बारे में तीन गवाहों के बयान झूठे हैं, लेकिन अदालत ने कहा कि बयानों को उनके फेस वैल्यू पर लिया जाना था, हालांकि उनकी सत्यता की जांच मुकदमे में बाद के चरण में किया जाएगा।
16 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने दंगों के मामले में यूएपीए, भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम की क्षति की रोकथाम के तहत 15 आरोपियों के खिलाफ एक चार्जशीट दायर की थी। चार्जशीट के अनुसार, नागरिकता कानून समर्थकों और विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया था, जिससे 53 लोग मारे गए और 748 अन्य घायल हो गए।


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