‘प्रारंभ’ से होती है सीखने की शुरुआत, अंत नहीं: उपसभापति हरिवंश

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Rajya Sabha: राज्यसभा के नवनिर्वाचित एवं मनोनीत सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय विषय-बोध कार्यशाला ‘प्रारंभ’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का सीखना कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला केवल संसदीय प्रशिक्षण का समापन नहीं, बल्कि स्वयं को लगातार बेहतर बनाने की एक सतत यात्रा की शुरुआत है। रविवार को आयोजित समापन समारोह में उपसभापति ने कहा कि इस दो दिवसीय कार्यक्रम को अत्यंत सावधानीपूर्वक तैयार किया गया था ताकि नए सदस्य राज्यसभा के नियमों, प्रक्रियाओं, कार्यप्रणाली और संसदीय परंपराओं को गहराई से समझ सकें तथा…

Rajya Sabha: राज्यसभा के नवनिर्वाचित एवं मनोनीत सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय विषय-बोध कार्यशाला ‘प्रारंभ’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का सीखना कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला केवल संसदीय प्रशिक्षण का समापन नहीं, बल्कि स्वयं को लगातार बेहतर बनाने की एक सतत यात्रा की शुरुआत है। रविवार को आयोजित समापन समारोह में उपसभापति ने कहा कि इस दो दिवसीय कार्यक्रम को अत्यंत सावधानीपूर्वक तैयार किया गया था ताकि नए सदस्य राज्यसभा के नियमों, प्रक्रियाओं, कार्यप्रणाली और संसदीय परंपराओं को गहराई से समझ सकें तथा सदन में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।

उन्होंने प्रतिभागी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से उन्हें संसदीय कार्यों की बारीकियों को समझने में महत्वपूर्ण सहायता मिली होगी। हरिवंश ने कहा कि कार्यक्रम को विभिन्न विषयगत सत्रों में विभाजित किया गया था, जिनमें वरिष्ठ सांसदों और अनुभवी अधिकारियों ने तथ्यात्मक प्रस्तुतियों तथा व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से संसदीय कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह अनुभव नए सदस्यों के लिए निश्चित रूप से उपयोगी सिद्ध होगा। राज्यसभा सचिवालय की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सचिवालय के अधिकारियों के पास संस्था के कार्यों का व्यापक अनुभव और गहन ज्ञान है। ये अधिकारी सदस्यों की हर संभव सहायता के लिए सदैव विनम्र, पेशेवर और तत्पर रहते हैं।

उन्होंने कहा कि महासचिव ने भी सदस्यों को सचिवालय की कार्यप्रणाली तथा उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ सांसद अरुण सिंह ने सदस्यों को बजट प्रक्रिया की जटिलताओं और उसकी सूक्ष्म समीक्षा के महत्व से अवगत कराया। वहीं डा. सस्मित पात्रा ने प्रश्नकाल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रश्नकाल में व्यवधान से सदस्य सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने के अपने महत्वपूर्ण संसदीय अधिकार का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाते।

उपसभापति ने कहा कि सचिवालय के अनुभवी अधिकारियों ने विधायी प्रक्रिया की चरणबद्ध जानकारी दी, जबकि डा. जॉन ब्रिटास ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के प्रभावी उपयोग पर विस्तार से चर्चा की।उन्होंने संसदीय कूटनीति को सांसदों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि आज के दौर में जनप्रतिनिधियों को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों की गहरी समझ होनी चाहिए। उन्होंने भारत की आईपीयू, सीपीए, पी-20, सीएसपीओसी, ब्रिक्स सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंचों में सक्रिय भागीदारी तथा मित्र देशों के साथ संसदीय आदान-प्रदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि घनश्याम तिवाड़ी ने सदस्यों को संसदीय कूटनीति की अवधारणा से परिचित कराया।

हरिवंश ने बताया कि केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव तथा डा. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने विभाग संबंधी संसदीय समितियों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इन समितियों को “मिनी पार्लियामेंट” बताते हुए कहा कि यही समितियां विभागों के कामकाज, बजट, वार्षिक रिपोर्ट, विधेयकों तथा नीतियों की गहन समीक्षा करती हैं। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्टें सांसदों के लिए विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत होती हैं। संसदीय कार्यों में तकनीक की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए उपसभापति ने कहा कि व्यापक डिजिटलीकरण के कारण राज्यसभा का कामकाज काफी हद तक पेपरलेस और अधिक दक्ष बन चुका है। सभी सदस्यों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है।

Sumant Chaudhary