Delhi Crime News : मां बनने की चाह रखने वाले दंपतियों की भावनाओं को अपना हथियार बनाकर ऑनलाइन ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का दिल्ली पुलिस के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट साइबर थाना ने पर्दाफाश किया है। गिरोह का तरीका इतना सुनियोजित था कि पहले पीड़ितों को बच्चा गोद दिलाने का भरोसा दिलाया जाता, फिर फर्जी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, नकली एनजीओ की रसीदें, डॉक्टरों और अस्पतालों की मुहरें भेजकर पूरे मामले को असली साबित किया जाता था। यहां तक कि बच्चे की “डिलीवरी डेट” भी तय कर दी जाती थी, ताकि पीड़ितों को किसी तरह का शक न हो। इसके बाद रजिस्ट्रेशन, मेडिकल, डिलीवरी और ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर लाखों रुपये वसूल लिए जाते थे।
डीसीपी राजा बांठिया ने बताया कि मामले की जांच एसीपी विशेष धत्तरवाल की निगरानी में एसएचओ इंस्पेक्टर रोहित गहलोत के नेतृत्व में सब-इंस्पेक्टर अरविंद यादव, हेड कांस्टेबल हिमांशु, रवि और भारत की टीम ने की। तकनीकी जांच और लगातार निगरानी के बाद गिरोह के दो प्रमुख सदस्यों को उत्तर प्रदेश के बरेली से गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान सचिन अग्रवाल (46) और उसके साथी राकेश कुमार उर्फ डॉ. आर.के. (52) के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, छह डेबिट कार्ड, दो पासबुक, दो पैन कार्ड और 14 डॉक्टरों एवं अस्पतालों की मुहरें बरामद की गई हैं। मामले का खुलासा तब हुआ जब बुराड़ी निवासी एक महिला ने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई कि उससे बच्चा गोद दिलाने के नाम पर 1.37 लाख रुपये ठग लिए गए।
महिला ने बताया कि इंटरनेट पर मिले एक मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर खुद को सचिन अग्रवाल बताने वाले व्यक्ति ने एक संस्था का प्रतिनिधि बनकर नवजात बच्चा गोद दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद उसने अलग-अलग चरणों में रजिस्ट्रेशन फीस, बुकिंग चार्ज, मेडिकल खर्च, डिलीवरी और ट्रांसपोर्टेशन के नाम पर रकम मंगवाई। पीड़िता का भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने फर्जी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, नकली एनजीओ की रसीदें और अन्य दस्तावेज भेजे। उसे बच्चे के लिए कपड़े खरीदने तक की सलाह दी गई और एक निश्चित तारीख पर बच्चा सौंपने का वादा किया गया। लेकिन अंतिम भुगतान मिलते ही आरोपी ने फोन बंद कर दिया और संपर्क पूरी तरह खत्म कर दिया।
पुलिस ने की100 मोबाइल नंबरों की जांच
जांच के दौरान पुलिस ने करीब 100 मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), आईपी लॉग, आईएमईआई डेटा और डिजिटल ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया। लगातार ठिकाने बदल रहे आरोपियों की लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस ने बरेली में छापेमारी कर सचिन अग्रवाल और उसके साथी राकेश कुमार उर्फ डॉ. आर.के. को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि राकेश कुमार पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट है और वही गिरोह को फर्जी मेडिकल दस्तावेज, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट, डॉक्टरों व अस्पतालों की मुहरें तथा नकली एनजीओ रसीदें उपलब्ध कराता था।



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