लाल किला में नौ करोड़ का घोटाला एएसआई के दो कर्मचारी अरेस्ट

Summary :

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी प्रेम प्रकाश लाल किला में वर्ष 2010 से एकाउंट विभाग में तैनात था। उसका बिल बनाने का काम था। पहले बिल कागज पर बनते थे।

नई दिल्ली : दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला में नौ करोड़ रुपए के घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लाल किले में एलडीसी के पद पर तैनात एक कर्मी अपने सहयोगी के साथ मिलकर सामान का फर्जी बिल बनाता। फिर उन पर अधिकारियों के फर्जी साइन कर पास करा लेता। जिसके बाद पैड एंड अकाउंट विभाग से बिलों का भुगतान करा सरकारी खजाने को चूना लगाता।

लाल किला के अंदर आरोपी एलडीसी प्रेम प्रकाश अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर यह गौरखधंधा पिछे आठ साल से कर रहा था। मगर इसका खुलासा बीते वर्ष उस वक्त हुआ, जब लाल किला में हुए काम और उनके बिल में बड़ी असमानताएं मिलीं। विभागीय जांच में आरोपी एलडीसी प्रेम प्रकाश और एमटीस बसंत लाल की भूमिका मिली। उन्हें निलंबित कर पुलिस में शिकायत दी गई।

शिकायत में एएसआई (आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) के एडिशनल सुप्रीटेंडेंट ने करीब तीन करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की शिकायत दी थी। मामले की जांच कर रहे लालकिला चौकी इंचार्ज प्रेम कुमार ने ठगी की राशि करोड़ों में होने के चलते सीनियर ऑफिसर से मामले को ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) रेफर करने की बात की। जिसके बाद मामले को ईओडब्ल्यू को रेफर कर दिया गया।

आर्थिक अपराध शाखा ने दर्ज किया मुकदमा
आर्थिक अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक एएसआई की शिकायत में फर्जी बिल पास कराकर करीब तीन करोड़ से ज्यादा के घोटाले का आरोप था। मगर जब एसीपी के. रमेश के नेतृत्व में एसआई सुशील ने जांच शुरू की तो यह घोटाला तीन करोड़ नहीं, बल्कि नौ करोड़ से भी ज्यादा का निकला। जिसके बाद आर्थिक अपराध शाखा ने इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर आरोपी एलडीसी प्रेम प्रकाश और उसके सहयोगी एमटीएस बसंत लाल को गिरफ्तार कर लिया है।

अधिकारियों की भूमिका की भी जांच
पुलिस सूत्रों का कहना है कि लालकिला में फर्जी सामान का बिल बनाकर सरकारी खजाने को नौ करोड़ का चूना अकेले प्रेम और बंसत लाल नहीं लगा सकते। इस गौरखधंधे में ऊपर के लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक प्रेम प्रकाश फर्जी बिल बनाता था। उसके बाद डीडीओ का भी फर्जी साइन करा कर उसे पैड एंड एकाउंट ऑफिस से पास करा लेता था।

पुलिस को आशंका है कि आरोपी के पैड एंड एकाउंट ऑफिस में भी लिंक हो सकते हैं। जिनकी मदद से वे इन बिलों को आसानी से पास करा लेते थे। पुलिस इस मामले में अधिकारियों व अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

डिजिटलाइजेशन के बाद भी घोटाला
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी प्रेम प्रकाश लाल किला में वर्ष 2010 से एकाउंट विभाग में तैनात था। उसका बिल बनाने का काम था। पहले बिल कागज पर बनते थे। मोदी सरकार के बाद डिजिटलाइजेशन के दौर में वर्ष 2014 से बिल पीएफएमएस के माध्यम से बनने लगे।

आरोपी प्रेम प्रकाश इतना चालाक था कि उसने इस सरकारी वेबसाइट पर भी फर्जी पासवर्ड जेनरेट कर लिया। इतना ही नहीं आगे बिल को पास करने के लिए डीडीओ का भी फर्जी पासवर्ड बना लिया। जिसके बाद लगातार फर्जी बिल पास कराकर सरकारी खजाने को चूना लगाता रहा।

– वसीम सैफी

Desk Team