श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म-दिवस पूरे देश में ‘सुशासन-दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। उनके विराट जीवन की अनेक विलक्षण बातें आज भी करोड़ों भारतीयों के मानस पटल पर अंकित हैं। चलिए ऐसी कुछ विलक्षण बातों को दोहरा लें, ऊर्जा मिलेगी।
वह भारत के एकमात्र ऐसे सांसद थे जो एक साथ चार अलग-अलग राज्यों ‘उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और गुजरात’ से चुने गए।
• उनका जन्म ग्वालियर में हुआ था लेकिन उनका पैतृक गांव बटेश्वर आगरा (यूपी) के पास है।
• बटेश्वर गांव कभी डाकुओं की वजह से कुख्यात था। अब शिव मंदिरों के कारण प्रख्यात है।
• यमुना किनारे बसे इस गांव में आज भी अटल जी के दोस्त और परिजन रहते हैं।
• पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी और माता कृष्णा देवी की संतान अटल जी को विरासत में कविता और साहित्य मिले। अटल जी भी कहते थे कि कविता उन्हें घुट्टी में मिली थी। उनके पिता संस्कृत भाषा और साहित्य के अच्छे विद्वान थे।
• उनके घर की बैठक पुरानी किताबों से भरी हुई थी। वे जहां भी जाते वहां से कुछ साहित्यिक किताबें लेकर आते थे। अटल जी ज्योतिष के भी अच्छे जानकार थे। दूर-दूर से लोग उन्हें अपनी जन्मपत्री दिखाने के लिए आते थे।
• अटल जी को बचपन से ही खाने का शौक था। वह जिस शहर में पहली बार जाते थे, वहां की सबसे अच्छी डिश जरूर खाते थे। वे लोकसभा की कैंटीन का खाना नहीं खाते थे। उनके लिए घर से बना खाना आता था। उनकी आदत थी कि लंच करने के बाद वहीं कुछ देर के लिए आराम करते थे।
• अटल जी बेहद शांत स्वभाव के थे। उन्हें गुस्से में शायद ही किसी ने देखा है। वह अपने साथ काम करने वाले लोगों को कभी डांट-फटकार नहीं लगाते थे। हां, उनके चेहरे से उनके करीबी जरूर समझ जाते थे कि कोई ऐसी बात हो गई है जो उन्हें अच्छी नहीं लगी।
• अटल जी देश के ऐसे पहले नेता थे जिन्होंने 1977 में सयुंक्त राष्ट्र की सभा में हिंदी भाषण दिया था। इससे पहले किसी भी नेता ने हिंदी में भाषण नहीं दिया था। अटल जी ने ही सयुंक्त राष्ट्र में हिंदी भाषा को पहचान दिलवाई थी।
पिता के साथ शिक्षा: उन्होंने अपने पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी के साथ कानपुर के डीएवी कॉलेज से कानून की पढ़ाई की। आर्थिक संकट के कारण पिता-पुत्र छात्रावास के एक ही कमरे में रहते थे।
वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देने वाले पहले भारतीय राजनेता थे जिससे देश को गौरवान्वित किया। वह एक पत्रकार भी थे और उन्होंने ‘पांचजन्य’ पत्रिका के संपादक के रूप में काम किया था।
महात्मा रामचंद्र वीर की कविता ‘अमर कीर्ति विजय पताका’ ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया और इसे अपने जीवन बदलने वाली कविता बताया जैसा इंडिया टीवी की रिपोर्ट में बताया गया है।
अटल जी ने विवाह नहीं किया और वे जीवनभर अविवाहित रहे।
उन्होंने श्रीमती राजकुमारी कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को अपनी दत्तक पुत्री के रूप में स्वीकार किया था और श्री वाजपेयी के निधन के समय नमिता ने ही उन्हें मुखाग्नि दी थी।
• अटल जी भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए। वे सबसे लंबे समय तक सांसद भी रहे और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लंबे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी।
• 11 मई, 1998 को उन्होंने जब परमाणु परीक्षण किया तो पूरी दुनिया में तहलका मच गया था। कई देशों ने कहा- भारत ये कैसे कर सकता है? सभी विकसित देशों ने भारत पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगाने की मांग भी की। उन्होंने अग्नि-दो और पोखरण परमाणु परीक्षण कर देश की सुरक्षा के लिए साहसी कदम उठाया था।
• पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी की शब्द और भाषा पर काफी अच्छी पकड़ थी। विरोधी दल भी उन्हें शांति से
सुनता था।
उनके शब्दों में कड़वाहट जरूर होती थी लेकिन फिर भी विपक्ष उनके आसपास खड़ा रहता था। उन्होंने राजनीति, साहित्य और समाज में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। वे सभी के दिलों पर राज करते थे।
• हर सत्र के दौरान दिए गए भाषण, पढ़ी गई कविताएं, उनके प्रेरक विचार हमेशा अपनी मौजूदगी का एहसास कराते रहेंगे। विपक्ष भी उनका पूरा सम्मान दिल से करता था। कोई भी शख्सियत हो उनका सम्मान करना कोई नहीं भूले।
• उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित की।
• उन्होंने आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिये मुख्यमंत्रियों का प्रथम सम्मेलन बुलाया, उड़ीसा के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र के लिए सात सूत्री गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया।
• आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए ‘अर्बन सीलिंग’ एक्ट समाप्त किया तथा ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिए बीमा योजना शुरू की।
• 1999 का कारगिल युद्ध और 2001 में संसद पर हमला उनके कार्यकाल में ही हुआ।
• अटल बिहारी वाजपेयी को राम और उनके निकट सहयोगी रहे लालकृष्ण अडवानी को लक्ष्मण की जोड़ी के रूप में जाना जाता था।
• 1957 में पहली बार बलरामपुर, उत्तर प्रदेश से लोक सभा के लिए चुने गए। इसी समय उन्होंने लखनऊ और मथुरा से भी चुनाव लड़ा था जिसे वे हार गए थे।
• वह सदा ‘इंडिया फर्स्ट’ के सिद्धांत पर चलते रहे।
एक विलक्षण शख्सियत, विलक्षण बातें
Summary :
श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म-दिवस पूरे देश में ‘सुशासन-दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। उनके विराट जीवन की अनेक विलक्षण बातें आज भी करोड़ों भारतीयों के मानस पटल पर अंकित हैं। चलिए ऐसी कुछ विलक्षण बातों को दोहरा लें, ऊर्जा मिलेगी। वह भारत के एकमात्र ऐसे सांसद थे जो एक साथ चार अलग-अलग राज्यों ‘उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और गुजरात’ से चुने गए। • उनका जन्म ग्वालियर में हुआ था लेकिन उनका पैतृक गांव बटेश्वर आगरा (यूपी) के पास है। • बटेश्वर गांव कभी डाकुओं की वजह से कुख्यात था। अब शिव मंदिरों के कारण प्रख्यात…


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