पाकिस्तान का कबूलनामा

Summary :

आतंकवादियों की पनाहगाह पाकिस्तान हमेशा ही वैश्विक मंचों पर अपनी झूठ और बुजदिल हरकतों के चलते शर्मसार होता आया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी ताकत का झूठा बखान करने वाला पाकिस्तान एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने नग्न हुआ है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री ईशाक डार ने जो कुछ खुद खुलासा किया है उससे ढोल की पोल खुल गई है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने स्वीकार किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूर्ण युद्ध की आशंका से पाकिस्तानी सेना थरथर कांप रही थी। बल्कि पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व बेहद खोफजदा हो गया…

आतंकवादियों की पनाहगाह पाकिस्तान हमेशा ही वैश्विक मंचों पर अपनी झूठ और बुजदिल हरकतों के चलते शर्मसार होता आया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी ताकत का झूठा बखान करने वाला पाकिस्तान एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने नग्न हुआ है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री ईशाक डार ने जो कुछ खुद खुलासा किया है उससे ढोल की पोल खुल गई है। पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने स्वीकार किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूर्ण युद्ध की आशंका से पाकिस्तानी सेना थरथर कांप रही थी। बल्कि पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व बेहद खोफजदा हो गया था।

उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के प्रतिशोध में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रणनीतिक और सटीक हमलों के प्रभाव को स्वीकार करते हुए कहा कि सैन्य सचिव ने उन्हें बंकर में छिपने की सलाह दी थी। यद्यपि जरदारी ने बहुत शब्द जाल फैलाते हुए भारत को धमकी दी कि भविष्य में उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा ले​किन वह पा​किस्तान के सच को छिपा नहीं सके। जरदारी का यह बयान पाकिस्तान की कमजोर स्थिति को उजागर करता है। विदेश मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री ईशाक डार ने भी वर्ष के अंत में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पुष्टि की कि भारत ने रावलपिंडी के चकाला स्थित उनके नूर खान एयर बेस को निशाना बनाया था जिससे उनकी सैन्य प्रतिष्ठानों को नुक्सान पहुंचा और वहां तैनात कर्मी घायल हो गए।

उन्होंने कहा कि भारत ने 36 घंटों के भीतर पाकिस्तानी क्षेत्र में कई ड्रोन भेजे थे और एक ड्रोन ने सैन्य प्रतिष्ठान को नुक्सान पहुंचाया जो आपरेशन के पैमाने और सटीकता को उजागर करता है। विदेश मंत्री ने दावा किया कि उन्होंने (भारत ने) पाकिस्तान की ओर ड्रोन भेजे। 36 घंटों में कम से कम 80 ड्रोन भेजे गए, हम 80 में से 79 ड्रोनों को रोकने में सफल रहे और केवल एक ड्रोन ने सैन्य प्रतिष्ठान को नुक्सान पहुंचाया और हमले में कर्मी भी घायल हुए। पाकिस्तान और गुलाम कश्मीर में नौ आतंकी शिविर भी ध्वस्त हुए। इस टिप्पणी से डार ने मई में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर भारत द्वारा की गई रणनीतिक कार्रवाई को स्वीकार किया। पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की हत्या के बाद अपनी कार्रवाई में ‘भारत के सशस्त्र बलों ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर बेहद सटीक हमले किए’।

गम्भीर आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और कर्ज में डूबे पाकिस्तान के पास न तो मजबूत अर्थव्यवस्था है और न ही लम्बी सैन्य तैयारी की क्षमता। ऐसे में पाकिस्तानी सेना के बंकरों में छिपने की बात यह दिखाती है कि पाकिस्तान भीतर से कितना असुरक्षित और दबाव में है। पाकिस्तान एयरलाइंस प्राइवेट हाथों में बिक चुकी है। गुजरात (भारत) से गए आरिफ हबीब ने 135 बिलियन पाकिस्तानी रुपए में एयरलाइंस को खरीद लिया। कुल मिलाकर पाकिस्तान को 4300 करोड़ रुपए ही ​मिले हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि आरिफ हबीब का तो केवल नाम है पैसा उसमें भी पाकिस्तान के राजनीतिज्ञों का ही लगा हुआ है। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर सत्ता कब्जाने के चक्कर में अपने ही देशवासियों पर ज्यादतियां कर रहे हैं जिससे पाकिस्तान में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। सीमाओं पर तैनात उसकी फौजें अपनी जान बचाकर भाग रही हैं।

पाकिस्तानी सैनिक सिर्फ मैदान ही नहीं छोड़ रहे, बल्कि मुनीर की नीतियों से परेशान होकर जान भी गंवा रहे हैं। मुनीर ने घर के अंदर और बाहर अपने दुश्मन बढ़ा लिए हैं। सेना में भी मुनीर के खिलाफ बगावत की सुगबुगाहट सुनने को मिल रही है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाता है तो वो सबसे पहले अपनों को और अपने करीबियों को ही निगल जाता है। ऑपरेशन सिंदूर में करारी हार के बावजूद मुनीर को फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई। मुनीर का बढ़ता औहदा उसे जालिम और जेहादी बना रहा है। मुनीर भारत के खिलाफ लगातार षड्यंत्र रच रहा है और बांग्लादेश में भी भारत विरोधी भावनाओं के उभार में उसकी ही सा​जिशें चल रही हैं। पाकिस्तान सेना में इन दिनों लेफ्टिनेंट से लेकर कर्नल तक जूनियर ऑफिसर और जवान बहुत ज्यादा तनाव का सामना कर रहे हैं।

पिछले 3 वर्षों में पाकिस्तानी फौज में हजारों की संख्या में इस्तीफे दिए जा चुके हैं। इसकी वजह पाकिस्तान के बनाए वे दुश्मन हैं जो उसके ही ताबूतों में कीलें ठोक रहे हैं। तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान, बलूचिस्तान लिबरेशन आ​र्मी और पाक अधिकृत कश्मीर की आजादी के लिए लड़ने वाले लोगों ने ​पाकिस्तान के फौजियों का ऐसा हश्र कर दिया है कि वे मोर्चा छोड़कर भाग रहे हैं और फौज से ही फरार हो रहे हैं।
एक तरफ मुनीर सारे नियम कायदे ताक पर रखकर अपनी जेब गर्म कर रहा है। जंगी मंसूबों की आड़ में डॉलर्स जुटा रहा है। दूसरी तरफ टीटीपी और बलूचों के हाथों पाकिस्तान की कायर फौज या तो अपनी पतलूनें छोड़कर भाग रही है या फिर जहन्नुम पहुंच रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पाकिस्तान की 22 फीसदी आबादी भुखमरी का शिकार है। 20 फीसदी पाकिस्तानी इमरजैंसी लेवल के गरीबी से पीड़ित है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 40 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं लेकिन मुनीर अपनी सेना पर 20 फीसदी खर्च ज्यादा कर रहा है। उसके बाद भी पाकिस्तान की भगोड़ी फौज के हालात ये हैं कि 2022 से अब तक तकरीबन 6000 पाकिस्तानी सैनिक अलग-अलग मोर्चों पर मारे जा चुके हैं। अब तो हर पाकिस्तानी यही दुआ कर रहा है कि मुल्क को इस मुनीर से आजादी मिल जाए। मुनीर ने इस वक्त पाकिस्तान को तीन मोर्चों की जंग में झोंक रखा है कि अब वापसी की कोई गुंजाइश नहीं है। पड़ोसी अफगानिस्तान से उसके संबंध इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं ​कि अगर दोनों में टकराव हुआ तो पाकिस्तान को जबरदस्त नुक्सान होगा।

अब तो खाड़ी देश भी पाकिस्तान के साथ खड़े दिखाई नहीं देते। पाकिस्तानी सेना के जवान और आवाम मुनीर से मुक्ति चाहते हैं। समाप्त हो रहे वर्ष 2025 में पाकिस्तान में 1063 आतंकवादी हमले हुए हैं। या​नि आत्मघाती हमलों में 53 फीसदी की बढ़ौतरी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आशीर्वाद पाकर मुनीर खुद को हुकुमरान मान बैठा है। पाकिस्तान एक तरह से जहन्नुम बन चुका है। इस बात की प्रबल आशंका है कि भविष्य में वहां सड़कों पर गृहयुद्ध छिड़ सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थक सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। अगर सड़कों पर टकराव हुआ तो पाकिस्तान खुद अराजकता का शिकार हो जाएगा।

Aditya Chopra

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