विज्ञान अपने आप में खतरनाक नहीं यह दुनिया के बारे में विश्वसनीय ज्ञान उत्पन्न करने की एक व्यवस्थित विधि है। खतरा इस बात से उत्पन्न होता है कि आप के द्वारा ज्ञान उपकरण और प्रौद्योगिकियों को सामाजिक और आर्थिक प्रणालियों में कैसे लागू किया जाता है। आज के दौर में तकनीक का दुरुपयोग हो रहा है। ऐसे मामलों में नई प्रौद्योगिकी अत्यंत खतरनाक हो चुकी है। यह सच है कि विज्ञान ने आधुनिक अविष्कारों की मदद से दुनिया के स्वरूप को बदल कर रख दिया है। विज्ञान ने युद्धों का तरीका बदल कर रख दिया। कुछ दिन पहले तक शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक मोबाइल एप चलते-चलते ई-रिक्शा को रोक देगा। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में ई-रिक्शा चालकों ने अपनी परेशानी बताई कि उनका रिक्शा चलते-चलते बंद हो जाता है। पहले तो लोगों ने ऐसे वीडियोज को मजाक समझा लेकिन जब ई-रिक्शा चालकों में कोहराम मच गया तो अंततः केन्द्र सरकार को इस मामले पर कार्रवाई करनी पड़ी। सरकार ने चीनी एप बैट, बी एम एस,लॉसिजी और स्पॉक आई आयन समेत कुछ एप्स पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया। समूचे घटनाक्रम से एक नई बहस छिड़ चुकी है। मामला किसी एक एप का नहीं। असली सवाल यह है कि जिस रफ्तार से इलैक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाये जा रहे हैं क्या उतनी मजबूत उनकी डिजिटल सुरक्षा है या नहीं। गर्मागर्म बहस के बीच लोग सितम्बर 2024 में लेबनान में हुए मेजर धमाकों की भी चर्चा कर रहे हैं।
इजराइली एजैंसी मोसाद ने ताइवान में बने हजारों पेजर में साजिश के तहत तीन ग्राम विस्फोटक रखा था। मोसाद ने डिवाइस के अंदर एक बोर्ड लगाया जिसमें विस्फोटक सामग्री थी जो एक कोड प्राप्त करता था। यही पेजर लेबनान में हिज्बुल्लाह को सप्लाई किए गए। जब वहां देशभर में पेजर पहुंचे तो इनमें विस्फोट कर दिया। अगर पेजर में विस्फोट हो सकते हैं तो फिर एक एप से ई-रिक्शा क्यों नहीं बंद हो सकते। चीनी एप तो पहले से ही बहुत खतरनाक करार दिए जा चुके हैं। केन्द्र सरकार समय पर चीनी एप्स पर प्रतिबंध लगाती रही है। यह एप्प भारतीयों के संवेदनशील डाटा को विदेशों में ट्रांस्फर कर रहा था। चीनी एप्स पर जासूसी के आरोप भी लगते रहे हैं। चीनी एप के खिलाफ लगातार की जा रही कार्रवाई भारत की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के िलए खतरनाक गतिविधियों में संलग्न रहने के कारण की गई। ई-रिक्शा मामले में भी बैट, बी एम एस नाम का एप चर्चा में आया। यह एप भी चीन की कम्पनी शेन झेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी का बनाया हुआ एप है और मूल रूप से इसे ब्लूटुथ वाली लिथियम आयन बैटरियों की निगरानी और सर्विसिंग के लिए तैयार किया गया था।
इस एप में बैटरी का वोल्टेज करंट तापमान चार्जिंग स्टेटस और बैटरी हैल्थ जैसी जानकारी देखी जा सकती है। साथ ही, कुछ कंपैटिबल बैटरियों में इसमें कंट्रोल फीचर भी मौजूद है, यानी बैटरी को ऑन या ऑफ करने की सुविधा। आरोप यही है कि कुछ लोग इसी कंट्रोल फीचर का गलत फायदा उठा रहे थे। जानकारों के मुताबिक यह एप करीब दस से पंद्रह मीटर की ब्लूटुथ रेंज में मौजूद कंपैटिबल बैटरी से जुड़ सकता है और अगर उस बैटरी में सुरक्षा कमजोर हो तो उसे बंद तक किया जा सकता है। भारत में बिकने वाले कई सस्ते ई-रिक्शा और इलैक्ट्रिक टू-व्हीलर की बैटरियां या तो बिना पासवर्ड के आती हैं या फैक्ट्री के डिफालट पासवर्ड पर ही चलती रहती हैं। ऐसी स्थिति में 10 से 15 मीटर की ब्लूटुथ रेंज में मौजूद कोई भी व्यक्ति उस बैटरी से जुड़ सकता है। मुद्दा कमजोर हार्डवेयर और कमजोर सैटिंग से है।
ड्राइवरों के लिए यह सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे रोजी-रोटी का सवाल है। ज्यादातर ई-रिक्शा चालक वाहन किराए पर चलाते हैं, इसलिए एक दिन का नुक्सान भी उनके लिए बहुत भारी पड़ता है। अगर बीच रास्ते में ई-रिक्शा बंद हो जाए तो सवारी उतर जाती हैं, किराया नहीं मिलता और वाहन को धक्का देकर ले जाना पड़ता है। इससे पूरे दिन की कमाई अटक जाती है। कई ड्राइवरों को तो यह भी नहीं पता होता कि उनका रिक्शा असल में खराब नहीं हुआ, बल्कि एप से बंद किया गया है। ऐसे में कुछ लोग तो किसी राहगीर या मैकेनिक को पैसे देकर वाहन ठीक कराने की कोशिश करते हैं, जबकि रिक्शा में कोई खराबी ही नहीं होती। दिल्ली से सामने आए एक मामले में एक चालक का रिक्शा सुबह से एक ही जगह खड़ा रहा और उसकी दिनभर की करीब चार सौ से पांच सौ रुपये की कमाई डूब गई। बाद में मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने अपने एप से जुड़कर उसका रिक्शा दोबारा चालू किया। डीलरों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में ऐसी शिकायतें बढ़ी हैं और कई वाहन जांच के लिए वर्कशॉप तक पहुंचे हैं।
सड़कों पर भागते ई-रिक्शा अचानक बंद होने लगें तो हादसों का खतरा कितना बढ़ जाता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अनेक तरह के सुझाव दे रहे हैं कि इससे कैसे बचा जा सकता है। मुद्दा बैटरी और बी एम एस की सुरक्षा की जड़ को मजबूत करने से जुड़ा हुआ है। जब तक हार्डवेयर सुरक्षित नहीं होगा तब तक एप आते-जाते रहेंगे और खतरा बना रहेगा। वाहन बेचने से पहले सुरक्षा सैटिंग बहुत जरूरी है। सरकार को अब ईवी बैटरियों के लिए साइबर सुरक्षा मानक जारी करने चाहिए ताकि हर कंपनी को इन नियमों का पालन करना पड़े। आने वाले दिनों में देश को ईवी उद्योग के लिए नए साइबर सुरक्षा नियम की जरूरत है और ई-रिक्शा घटनाक्रम से सीख लेने की जरूरत है।
ई-रिक्शा पर साइबर अटैक
Summary :
विज्ञान अपने आप में खतरनाक नहीं यह दुनिया के बारे में विश्वसनीय ज्ञान उत्पन्न करने की एक व्यवस्थित विधि है। खतरा इस बात से उत्पन्न होता है कि आप के द्वारा ज्ञान उपकरण और प्रौद्योगिकियों को सामाजिक और आर्थिक प्रणालियों में कैसे लागू किया जाता है। आज के दौर में तकनीक का दुरुपयोग हो रहा है। ऐसे मामलों में नई प्रौद्योगिकी अत्यंत खतरनाक हो चुकी है। यह सच है कि विज्ञान ने आधुनिक अविष्कारों की मदद से दुनिया के स्वरूप को बदल कर रख दिया है। विज्ञान ने युद्धों का तरीका बदल कर रख दिया। कुछ दिन पहले तक शायद…


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