केंद्र सरकार ने देश से मादक पदार्थों के खात्मे और युवाओं को सुरक्षित रखने के लिए कई बड़े स्तर के कदम उठाए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में 2029 तक भारत को पूरी तरह से नशा मुक्त बनाने का एक व्यापक रोडमैप पेश किया है, जिसका मुख्य लक्ष्य 2047 के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करना है। केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार कर लिया है। यह रोडमैप चार स्तंभों पर आधारित है।
खुफिया जानकारी और अभियान आधारित प्रवर्तन, पूर्वगामी और कृत्रिम दवाओं पर नियंत्रण, मांग और नुक्सान में कमी और चौथा क्षमता निर्माण और समन्वय। ये सभी स्तंभ मिलकर ड्रग सरगनाओं की फाइलें तैयार करेंगे, पिछड़े-अग्रणी संबंधों पर समन्वय स्थापित करेंगे और व्यावसायिक मात्रा से जुड़े हर मामले की वित्तीय जांच के माध्यम से शिकंजा कसेंगे। भारत एक युवा राष्ट्र है, जहां 40 फीसदी आबादी 18 वर्ष से कम आयु की है लेकिन इस युवा ऊर्जा को नशे की लत कमजोर कर रही है।
नशे की लत, जिसे अंग्रेजी में सब्सटेंस एब्यूज कहा जाता है, में अल्कोहल, गांजा, अफीम, कोकीन, एलएसडी और अन्य नशीले पदार्थ शामिल हैं। युवा अवस्था में यह समस्या इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि यह मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करती है और लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार युवाओं में नशे की शुरुआत आमतौर पर 12-17 वर्ष की आयु में होती है जो उनके भविष्य को जोखिम में डाल देती है।
भारत के युवाओं में नशे की लत का बढ़ता ग्राफ एक गंभीर और चिंताजनक समस्या बन चुका है। आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में भारत में लगभग 1.6 करोड़ युवा नशे की चपेट में हैं और विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि देश के लगभग 21.4 फीसदी किशोर मध्यम से उच्च स्तर के नशीले पदार्थों के सेवन के जोखिम पर हैं। यह लत न केवल युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि उनके भविष्य, परिवार और पूरे समाज को भी नुक्सान पहुंचा रही है।
नशीले पदार्थों का व्यापार एक ऐसा अपराध है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को तबाह कर सकता है। नशीले पदार्थों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए भी किया जाता है। 2014 से पहले यह लड़ाई टुकड़ों में लड़ी जाती थी और छोटी-मोटी ज़ब्ती और कुछ आरोपियों को पकड़ने से ही संतोष मिलता था लेकिन 2019 से मोदी सरकार ने इस विषय को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बना दिया है। नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अब फाइलों और अलग-अलग एजेंसियों की कार्रवाई से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित और निरंतर अभियान बन गई है।
2019 में चार स्तरीय एनसीओआरडी तंत्र बनाया गया था। केंद्रीय एजेंसियों, राज्य सरकारों और उनके विभागों के समन्वय से, बड़े नेटवर्क, अंतर्राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और परिचालन कमियों को दूर करने के लिए एक वैज्ञानिक पद्धति अपनाई गई। मादक पदार्थों के आदी युवाओं के पुनर्वास के लिए ‘1933’ मानस हेल्पलाइन शुरू की गई। मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के कैडर का पुनर्गठन किया गया। निदान पोर्टल के माध्यम से मादक पदार्थों के अपराधियों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाया गया।
नशीले पदार्थों से जुड़ा आतंकी मॉड्यूल दुनिया के कई देशों में सक्रिय है और आज पूरी दुनिया इस समस्या से जूझ रही है। मोदी सरकार ने 2019 से इसे रोकने के लिए एक मजबूत व्यवस्था लागू की है। इसके लिए व्यवस्था में बदलाव किए गये हैं, नेटवर्क को पकड़ा है, वित्तीय शृंखला को तोड़ा है और नशे के आदी लोगों को नशे से मुक्ति दिलाने के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान किया है। आंकड़ों के आलोक में बात करें तो यूपीए के दस साल के शासनकाल में 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त की गई, जिनकी कीमत लगभग 40,000 करोड़ रुपये थी।
वहीं, मोदी सरकार के अब तक के 12 साल के में यह जब्ती बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक हो गई है, जिसकी कीमत लगभग 1 लाख 89 हजार करोड़ रुपये है। 2004 से 2014 तक 3 लाख 36 हजार किलोग्राम नशीले पदार्थ नष्ट किए गए, जबकि 2014.26 में 48 लाख 68 हजार किलोग्राम नशीले पदार्थ नष्ट किए गए हैं। सरकार ने ड्रग ट्रैफिकिंग के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है, जिसके तहत करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थों को जब्त कर नष्ट किया गया है। सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए सुरक्षा बलों को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है।
इस बहुआयामी दृष्टिकोण के जरिए सरकार का प्रयास न केवल ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ना है, बल्कि समाज में इसके प्रति चेतना जगाकर मांग को भी पूरी तरह खत्म करना है। बीते अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरूआत की है। उपचार एवं पुनर्वास के तहत 5 लाख 70 हजार नागरिकों को नशामुक्त किया गया है। सरकार केवल कार्रवाई पर ही नहीं, बल्कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों के इलाज और पुनर्वास पर भी ध्यान दे रही है।
इसके लिए देशभर में परामर्श और नशामुक्ति केंद्र खोले गए हैं। सामाजिक न्याय विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जेल प्रशासन मिलकर नशामुक्ति केंद्रों की संख्या को तीन गुना बढ़ाकर 1751 करने जा रहे हैं। इस अभियान में लगभग 10,000 स्वयंसेवक अपनी सेवाएं देंगे। वहीं एनसीसीए एनएसएस और माय भारत के माध्यम से लाखों ‘नशामुक्ति मित्र’ तैयार करने की भी योजना है।
नक्सलवाद और आतंकवाद की तरह ही ड्रग्स का नेटवर्क भी देश की आंतरिक सुरक्षा और युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। इस पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ सामाजिक चेतना और परिवारों की सजगता भी उतनी ही जरूरी है। पीएम मोदी युवा पीढ़ी को भारत की ‘अमृत पीढ़ी’ बताते हैं। उनका मत है कि युवाओं की ऊर्जा, कल्पनाशीलता और प्रतिभा देश को 2047 के विकास लक्ष्यों की ओर ले जाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में देश के भविष्य और आपके अपने जीवन के लिएए व्यसन से मुक्त रहना अत्यंत आवश्यक है। जब गृह मंत्री अमित शाह यह कहते हैं कि देश से नशे की समस्या को भी उसी तरह खत्म करेंगे जैसे नक्सलवाद की समस्या का खात्मा किया है तो देशवासी उन पर पूरा भरोसा करते हैं। क्योंकि मोदी सरकार बरसों पुरानी आतंकवाद और नक्सलवाद की समस्या की अच्छे से नकेल कस चुके हैं। सरकार ही नहीं देशवासियों को भी भरोसा है कि युवा नशे से दूर रहकर अपनी ऊर्जा बचाएंगे और विकसित भारत के संकल्पों को आगे बढ़ाएंगे।


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