क्या यह क​लयुग है…

Summary :

हमारे समाज को क्या हो रहा है? हम किस युग में जी रहे हैं। मुझे तो लग रहा है कि आज हम कलयुग में जी रहे हैं। जहां एक 13 साल की मासूम बच्ची भी सुरक्षित नहीं, 3 साल की गुड़िया सुरक्षित नहीं है, 80 साल की बुजुर्ग महिला हवस के जानवरों (इन्हें जानवर ही कहूंगी) से सुरक्षित नहीं। कहीं एक पोता अपने ही दादा की हत्या कर देता है। कहीं एक बेटी अपनी ही मां की जान ले लेती है। कहीं ब्याह से पहले होने वाले पति को मार देती है। आज काफी हद तक माता-पिता अपने ही बच्चों…

हमारे समाज को क्या हो रहा है? हम किस युग में जी रहे हैं। मुझे तो लग रहा है कि आज हम कलयुग में जी रहे हैं। जहां एक 13 साल की मासूम बच्ची भी सुरक्षित नहीं, 3 साल की गुड़िया सुरक्षित नहीं है, 80 साल की बुजुर्ग महिला हवस के जानवरों (इन्हें जानवर ही कहूंगी) से सुरक्षित नहीं। कहीं एक पोता अपने ही दादा की हत्या कर देता है। कहीं एक बेटी अपनी ही मां की जान ले लेती है। कहीं ब्याह से पहले होने वाले पति को मार देती है। आज काफी हद तक माता-पिता अपने ही बच्चों से डरने लगे हैं और यही नहीं भगवान का घर भी सुर​िक्षत नहीं है। मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों पर चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। राम मंदिर से जुड़ी चोरी की खबर हो या किसी छोटे मंदिर में चोरी यह केवल धन की चोरी नहीं है, यह लोगों की आस्था पर चोट है। मंदिर के दानपात्र में पड़ा एक रुपया केवल रुपया नहीं होता, उसमें किसी गरीब की श्रद्धा होती है, किसी मां की मन्नत होती है, किसी बुजुर्ग की भक्ति होती है और किसी परिवार की आशा होती है। जब इंसान भगवान के घर में भी चोरी से न डरे तो क्या यह कलयुग नहीं है।
आज हम कहां पहुंच गए हैं। एक तरफ मासूम बच्चियों के साथ अपराध, दूसरी तरफ बुजुर्गों पर अत्याचार। कहीं नशा हमारे युवाओं को बर्बाद कर रहा है, कहीं गैंगस्टरवार, कहीं साइबर ठगी, कहीं फैक न्यूज और डीपफैक और कहीं धर्म तथा जाति के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश। पहले चोर घरों में घुसते थे, आज मोबाइल के रास्ते बैंक खातों में घुस रहे हैं। पहले हथियार से हमला होता था, आज झूठ और अफवाह से समाज पर हमला होता है। आज मुझे सबसे ज्यादा चिंता अपने पंजाब की होती है। पंजाब केवल एक प्रदेश नहीं है, पंजाब गुरुओं की धरती है, वीरों की धरती है, शहीदों की धरती है, बहादुरों की धरती है। देश के किसी भी हिस्से में समस्या आ जाए पंजाब के नौजवान सबकी रक्षा के लिए आगे होते हैं।
इसी पंजाब को विदेशी ताकतों ने कमजोर करने की कोशिश की। जो मंजर हमने देखा, हमारे परिवार ने दर्द सहा, परिवार और आफिस के लोगों की जानें गईं, परन्तु सिख-हिन्दू वो कौम है जो कभी एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते। यह नाखुन और मांस जैसा है, जो कभी अलग नहीं हो सकते। पंजाब के लोग गुरु नानक देव जी की शिक्षा पर चलते हैं। ‘कीरत करो, नाम जपो, वंड खाओ।’ पंजाब के लोग अपने पंजाब को खुशहाल आैर शांत देखना चाहते हैं। जब विदेशी ताकतें इसमें भी फेल हो गईं तो पंजाब के युवकों को नशे का आदी बना दिया। इ​सलिए आज अगर कोई भी ताकत चाहे देश के अन्दर हो या विदेश में पंजाब की शांति, भाईचारे आैर एकता को कमजोर करने की को​िशश करें, हम सबको बहुत सावधान रहना है। खासकर युवकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है लेकिन समाज की शांति और देश की एकता उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। यह सब देखते हुए यही कहना चाहूंगी कि देश का मजबूत नेतृत्व देश को मजबूत करने को लगा हुआ है परन्तु इसके ​िलए देश के 140 करोड़ भारतीयों (चाहे वो किसी भी जाति, धर्म के हों) को मजबूती से साथ देना होगा।
सरकार सीमा की रक्षा कर सकती है लेकिन घर के संस्कारों की रक्षा हमें करनी होगी। पुलिस अपराधी को पकड़ सकती है लेकिन बच्चों को अच्छी राह आैर गलत का अंतर परिवार को सिखाना होगा। कानून सजा दे सकता है लेकिन चरित्र और संस्कार घर तथा समाज ही बना सकते हैं। आज हमें बच्चों को केवल अच्छी शिक्षा नहीं अच्छे संस्कार भी देने होंगे। केवल यह मत पूछिये कि आपका बच्चा कितने नम्बर लाया। यह पूछिये कि वह किसी बुजुर्ग से कैसे बात करता है, वह महिलाओं का कितना सम्मान करता है, उसके दोस्त कौन हैं, वह मोबाइल पर क्या देख रहा है, उसके मन में क्या चल रहा है। डिग्री इंसान को सफल बना सकती है लेकिन संस्कार ही उसे अच्छा इंसान बनाते हैं। आज जरूरत है हम फिर से परिवारों को जोड़ें, बुजुर्गों का सम्मान करें, अपनी बेटियों की रक्षा करें।
कलयुुग है तो क्या हुआ हम सब मिलकर अपने कर्म सतयुग जैसे करें। बुराई बढ़ रही है तो क्या हुआ हम अपनी अच्छाई को बुलंद करें। आइये सब मिलकर परिवार बचाएं, संस्कार बचाएं, आस्था बचाएं, पंजाब बचाएं और भारत को अपने मजबूत नेतृत्व के साथ मजबूत बनाएं। इसे कलयुग नहीं सतयुग बनाएं ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां हमें याद रखें।

Kiran Chopra