भारत में न्यायपालिका की प्रमुख भूमिका संविधान की रक्षा करना, कानूनों की व्यवस्था करना, कानून का शासन सुनिश्चित करना तथा गरीब हो या अमीर, नौकरशाह हो या कर्मचारी सभी के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करना है। भारत में न्यायपालिका ने अनेक ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिए हैं जिससे संवैधानिक आदर्श साबित हुए हैं। यह फैसले लोकतंत्र की तीनों संस्थाओं में शक्ति संतुलन बनाए रखते हैं। इन फैसलों के अनुसार नागरिकों के मौलिक अधिकारों की न केवल रक्षा हुई बल्कि संविधान के संरक्षक के रूप में कार्यपालिका और विधायिका की मनमानी पर अंकुश भी लगा। यद्यपि आज के दौर में न्यायपालिका को आसानी से निशाना बनाया जा रहा है लेकिन जनता का भरोसा न्यायपालिका पर कायम है।
एक सशक्त न्यायालय मूल रूप से एक समृद्ध और न्यायसंगत लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिक्षा है जो यह सुनिश्चित करता है कि शासन निष्पक्ष जवाब दे और कानूनी मूल्यों के अनुरूप बना रहे। महाराष्ट्र के 5 साल पुराने कीचड़ कांड में सिंधु दुर्ग अदालत ने महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे को एक महीने की जेल की सजा सुनाकर एक नया उदाहरण स्थािपत किया। नितेश राणा फडणवीज सरकार में मंत्री हैं। यद्यपि अदालत ने नितेश राणे की सजा को निलम्बित कर उन्हें अपनी अदालत में अपील करने का समय दिया है। यह मामला 2019 का है जब नितेश राणे ने एनएचएआई के एक इंजीनियर पर कीचड़ फैंक दिया था। नितेश राणे का कहना था कि वे मुम्बई-गोवा राजमार्ग को चौड़ा करने के लिए चल रहे काम से नाराज थे। उनका कहना था कि खराब क्वालिटी का मैटीरियल इस्तेमाल किया जा रहा था। वे सड़कों पर जलभराव के खिलाफ अपनी अावाज उठा रहे थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीएस देशमुख ने मामले की सुनवाई करते हुए राजनेताओं के व्यवहार पर सख्त टिप्पणी की। कहा, “भले ही राणे का इरादा काम की खराब क्वालिटी और लोगों को हो रही परेशानी के खिलाफ आवाज उठाना था लेकिन उन्हें किसी सरकारी कर्मचारी का सार्वजनिक रूप से अपमान या बेइज्जती नहीं करनी चाहिए थी।” जज ने कहा, “अगर ऐसी घटनाएं होती रहीं तो सरकारी कर्मचारी गरिमा के साथ अपने कर्त्तव्यों का पालन नहीं कर पाएंगे।” इस कृत्य को सत्ता का दुरुपयोग बताते हुए अदालत ने कहा कि ऐसी प्रवृत्ति पर रोक लगाना समय की मांग है। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों की जांच करने के बाद कहा कि शिकायतकर्ता एनएचएआई में एक बड़े पद पर कार्यरत था। इसके बावजूद उसे सबके सामने कीचड़ भरे पानी से गुजरने पर मजबूर किया गया। इससे निश्चित रूप से उसे अपमान और बेइज्जती महसूस हुई होगी। जज ने माना कि इंजीनियर शेडेकर को कीचड़ भरे पानी से गुजरने पर मजबूर करना शिकायतकर्ता का जान-बूझकर किया गया अपमान था और यह एक ऐसी उकसाने वाली हरकत थी जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा था। प्रायः देखा जाता है कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच अपनी छवि चमकाने के उद्देश्य से काफी आक्रामक रुख अपनाते हैं ताकि लोगों को लगे कि उनका विधायक या सांसद जनहित में काम कर रहे हैं और उसमें अफसरशाही पर नकेल डालने की ताकत है। जनप्रतिनिधियों का व्यवहार सद्भावपूर्ण और जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। लेिकन आज के दौर में जनप्रतिनिधियों का सार्वजनिक आचरण मर्यादाओं और शालीनता को तोड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं कि जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि लोगों से दुर्व्यवहार करते हैं और कई बार वह नौकरशाहों या अधीनस्थ कर्मचारियों से मारपीट तक करने लग जाते हैं। जनप्रतिनिधियों के आचरण और व्यवहार पर ही प्रतिनिधि संस्थाओं की गरिमा निर्भर करती है। जनता के भरोसे पर खरा उतरने के दायित्व के प्रति जनप्रतिनिधियों को हमेशा संवेदनशील रहना चाहिए। जनप्रतिनिधि जिस तरह का आचरण सदन में दिखा रहे हैं उससे सदन की मर्यादा लगातार कम हो रही है। कहते हैं लोकतंत्र लज्जा से चलता है लेकिन अब सब कुछ लज्जाहीन है। यही कारण है िक राज्य विधानसभाओं से लेकर संसद तक बहस का स्तर गिर रहा है। कभी दौर था जब राजनीतिज्ञों का एक-एक शब्द सुनने के लिए लोग घंटों इंतजार करते थे। अगर बाजार में चलते हुए आकाशवाणी पर राजनीतिज्ञों का भाषण प्रसारित हो रहा हो तो वे वहीं ठिठक जाते थे। देश में ऐसे कई राजनीतिज्ञों को देखा है जिनका स्वभाव बड़ी से बड़ी बातों पर भी गर्म मिजाज नहीं होता। आज के नेताओं का अपनी वाणी और शब्दों पर कोई संयम नहीं रहा। महाराष्ट्र के सिंधु दुर्ग अदालत का फैसला अपने आप में राजनीतिज्ञों के लिए एक संदेश है िक वे सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिक मानदंडों का पालन करें। कुछ िदन पहले प्रधान न्यायधीश सूर्यकांत ने जयपुर में कहा था कि न्यायपालिका पर जनता का विश्वास बनाए रखना हमारा दायित्व है। देश की जनता न्यायधीशों के शब्दों को अत्यंत सम्मान के साथ स्वीकार करती है जो जनता के विश्वास को ही दर्शाता है। न्यायपालिका ने समय-समय पर ऐतिहासिक फैसले देकर देश के विश्वास को पुख्ता किया है।
नितेश राणे को सजा
Summary :
भारत में न्यायपालिका की प्रमुख भूमिका संविधान की रक्षा करना, कानूनों की व्यवस्था करना, कानून का शासन सुनिश्चित करना तथा गरीब हो या अमीर, नौकरशाह हो या कर्मचारी सभी के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करना है। भारत में न्यायपालिका ने अनेक ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिए हैं जिससे संवैधानिक आदर्श साबित हुए हैं। यह फैसले लोकतंत्र की तीनों संस्थाओं में शक्ति संतुलन बनाए रखते हैं। इन फैसलों के अनुसार नागरिकों के मौलिक अधिकारों की न केवल रक्षा हुई बल्कि संविधान के संरक्षक के रूप में कार्यपालिका और विधायिका की मनमानी पर अंकुश भी लगा। यद्यपि आज के दौर में न्यायपालिका को…


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