प्रियंका के राजनैतिक कौशल पर भाजपा का पलटवार

Summary :

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने लोकसभा में परीक्षा लीक से जुड़े संशोधित बिल पर बहस के दौरान अपने तीखे भाषण से बीजेपी को परेशान कर दिया है। कुछ समय पहले तक, बीजेपी नेता उनके आकर्षण, शालीनता और हाज़िरजवाबी की तारीफ़ करते थे और यह कहकर भाई-बहन के बीच दरार डालने की कोशिश करते थे कि वह राहुल गांधी से बेहतर राजनेता और वक्ता हैं। लेकिन हाल ही में नियुक्त अंतरिम शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी पर उनके ज़ोरदार हमले के बाद पार्टी का रुख बदल गया है। कामाकोटी परीक्षा लीक पर बनी नंदन नीलेकणि…

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने लोकसभा में परीक्षा लीक से जुड़े संशोधित बिल पर बहस के दौरान अपने तीखे भाषण से बीजेपी को परेशान कर दिया है। कुछ समय पहले तक, बीजेपी नेता उनके आकर्षण, शालीनता और हाज़िरजवाबी की तारीफ़ करते थे और यह कहकर भाई-बहन के बीच दरार डालने की कोशिश करते थे कि वह राहुल गांधी से बेहतर राजनेता और वक्ता हैं। लेकिन हाल ही में नियुक्त अंतरिम शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी पर उनके ज़ोरदार हमले के बाद पार्टी का रुख बदल गया है। कामाकोटी परीक्षा लीक पर बनी नंदन नीलेकणि कमेटी के सदस्य भी हैं। अब उन्हें ‘पप्पू 2.0’ कहकर मज़ाक उड़ाया जा रहा है, जो राहुल गांधी के लिए बीजेपी द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला उपनाम है।
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने बिलकिस बानो के बलात्कारियों का माला पहनाकर स्वागत करने के लिए जोशी की आलोचना की और कामाकोटी को ‘गौमूत्र विशेषज्ञ’ कहकर उनका मज़ाक उड़ाया, क्योंकि वैज्ञानिक होने के बावजूद वह गौमूत्र थेरेपी को बढ़ावा दे रहे हैं। बीजेपी को लगा था कि प्रियंका गांधी को अपनाकर वह कांग्रेस में फूट डाल देगी। पार्टी की यह चाल नाकाम रही क्योंकि प्रियंका गांधी ने साबित कर दिया कि वह वैसी आकर्षक गुड़िया नहीं हैं, जैसा उन्हें दिखाने की कोशिश की गई थी। आखिरकार वह गांधी परिवार की सदस्य हैं और अपनी दादी और भाई की तरह ही आरएसएस-बीजेपी के साथ कोई समझौता न करने के पक्के इरादे वाली नेता के तौर पर सामने आई हैं।
यूपी चुनावों से पहले राहुल-अखिलेश की ‘गहरी होती दोस्ती’
एक अहम घटना जिस पर ज़्यादा ध्यान नहीं गया, जबकि देशभर में युवाओं के विरोध प्रदर्शन सुर्खियों में थे, वह थी विपक्ष के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बीच नई दोस्ती। जब देशभर में युवाओं का विरोध प्रदर्शन ज़ोरों पर था, तब पिछले हफ्ते लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी के अचानक ​दिए गए धरने में शामिल होने वाले इंडिया गठबंधन के नेताओं में अखिलेश यादव और सपा के कुछ सांसद ही गैर-कांग्रेसी नेता थे। सपा की यह मौजूदगी राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव के बीच बंद कमरे में हुई बैठक के बाद हुई, जिसमें उन्होंने अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी समझौते को अंतिम रूप दिया।
यूपी के लिए सपा-कांग्रेस गठबंधन का मामला लटका हुआ था क्योंकि कांग्रेस सीट बंटवारे के समझौते पर अखिलेश यादव से बातचीत करने में देरी कर रही थी। युवाओं के विरोध-प्रदर्शन से सरकार और भाजपा के बैकफुट पर आने के बाद, राहुल गांधी ने सपा के साथ समझौता करने में जल्दबाजी की। यह समझौता धरने से एक दिन पहले संसद भवन में हुई एक गुप्त बैठक में हुआ। इसमें कोई सहयोगी मौजूद नहीं था, यहां तक कि दोनों पार्टियों के यूपी के बड़े नेता भी नहीं थे।
माना जाता है कि गांधी भाई-बहन ने अखिलेश यादव को भरोसा दिलाया है कि यूपी चुनाव उनकी लीडरशिप में लड़ा जाएगा, भाजपा की मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर सपा ज़्यादातर सीटों पर चुनाव लड़ेगी और इमरान मसूद और प्रमोद तिवारी जैसे यूपी कांग्रेस के नेता जो सपा के खिलाफ बयान देने में मज़ा लेते हैं, उन्हें चुप करा दिया जाएगा। इसके बदले में, माना जाता है कि अखिलेश यादव ने गांधी परिवार से वादा किया है कि वे कांग्रेस को ज़्यादा से ज़्यादा सीटें देंगे। उत्तर प्रदेश को जीतने के लिये भाजपा जोर लगा देगी क्योंकि यह उसके लिये सबसे महत्वपूर्ण राज्य है।
यह भाजपा के राष्ट्रीय राजनीतिक दबदबे के लिए अहम है और यहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र वाराणसी भी है। हालांकि राज्य में दो बार सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा चुनाव में सबसे आगे है, लेकिन अगर सपा और कांग्रेस का गठबंधन हो जाए और दोनों पार्टियां एकजुट होकर लड़ें और एक-दूसरे को नुकसान न पहुंचाए, तो यह एक चुनौती बन सकता है। यूपी वही राज्य है जहां भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन किया था और अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी।
सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाई सीजेआई ने
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जिनकी बेरोजगार युवाओं और कॉकरोच के बीच की दुर्भाग्यपूर्ण तुलना ने हाल ही में देशव्यापी युवा विरोध-प्रदर्शनों को जन्म दिया था, आजकल सार्वजनिक रूप से कम ही दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वे कोर्ट में आ रहे हैं और अपना आधिकारिक काम कर रहे हैं, लेकिन वे सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रह रहे हैं। उदाहरण के लिए, ऐसी खबरें थीं कि वे 26 जुलाई को जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी लॉ स्कूल के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे, लेकिन वे नहीं गए।
सीनियर वकील और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को संबोधित किया। उन्हें 28 जुलाई को जस्टिस एच.आर. खन्ना मेमोरियल लेक्चर में मुख्य अतिथि के तौर पर भी शामिल होना था। यह कार्यक्रम होने से ठीक दो दिन पहले टाल दिया गया। हालांकि सीजेआई ने बाद में कॉकरोच वाली अपनी टिप्पणी पर सफाई दी थी, लेकिन ऑनलाइन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के गठन के बाद यह बात लोगों के दिमाग में बनी रही। उनके इस बयान के बाद गठित काकरोच जनता पार्टी ने हालिया विरोध-प्रदर्शनों की अगुवाई की थी।

R R Jairath