वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब को लगभग 22 साल हो गए हैं। यह ऐसा कार्य है, सेवा है जिसमें सदस्यों का आये दिन जाना (ईश्वर को प्यारा होना) लगा रहता है क्योंकि हम सब जानते हैं कि हम सब ने एक न एक दिन जाना है परन्तु जब कोई बहुत ही अपना जिसने लोगों के दिल में अपनी जगह बनाई हो, वो जाता है तो बहुत ही दु:ख होता है। क्योंकि हमारा वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब मैं से नहीं हमसे चलता है जिसमें हमारे सभी ब्रांच हैड और सह प्रमुख एक बहुत ही अहम हिस्सा हैं।
श्याम नरूला जी हमारे बहुत ही सम्मानित चौखंडी ब्रांच के हैड थे जिनकी आयु 96 की थी। जब अचानक रात को ग्रुप में मैसेज आया कि वो ब्रह्मïलीन हो गये तो कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि बहुत अच्छे, हर समय मुख पर खुशी, जब भी मिलना हरि ओम कहना। वो और उनकी पत्नी जिनकी मैं बहुत ही प्रशंसक और कायल हूं, वह ऑल इंडिया रेडियो में काम करते थे उन्होंने समय से पहले उन्होंने रिटायरमेंट ली और एक छोटी सी चाय की दुकान खोली और आज बहुत बड़ी स्वीट्स शॉप अपने तीनों बेटों के साथ एक्टिव होकर काम कर रहे थे। दो साल पहले उनके एक बेटे का देहांत हो गया था।
अभी उनके दोनों बेटों से बात हुई तो मालूम पड़ा कि दो दिन से थोड़े ढ़ीले थे, पर काम पर आ रहे थे और शाम को मंदिर गये और उन्होंने मंदिर में ही अपने प्राण त्याग दिये। वाह! सिर श्रद्धा से झुक गया। ऐसा इंसान जो हमेशा सबको खुशियां, प्यार बांटता था, जाते-जाते प्रभु के चरणों में मंदिर में जाकर लीन हो गये। वाह! ऐसा जाना तो किसी-किसी को नसीब होता है। एक अच्छी पुण्य आत्मा थे। ईश्वर ने अपने घर में बुलाकर ही बुला लिया। हमारे लिए हमारी लगभग 25 ब्रांच के सभी हैड बहुत ही प्यारे हैं।
महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि इन 22 सालों में कोई 80 को टच कर गया, कोई 90 को और कई अभी 60 की लाइन में सभी नि:स्वार्थ भाव से सेवा देते हैं और हजारों बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं, जो न तो खुद को थकने देते हैं, न सदस्यों को थकने देते हैं और अपने-अपने काम को एक्टिव रख कर खुद भी जवान रहते हैं और सदस्यों को भी बूढ़ा नहीं होने देते। ऐसे ही थे हमारे प्रिय नरूला जी, 96 साल के जवान जिनका जाना हम सबके लिए बेहद दु:ख की बात है।
बस मेरी यही प्रार्थना है कि हमारे सभी वरिष्ठ नागरिक केसरी परिवार और पंजाब केसरी परिवार की तरफ से उनके बेटे उनके दिखाये हुए रास्ते पर चलें, उनके नाम को और भी ऊंचाइयों पर लेकर चलें। चौखंडी ब्रांच उनके पूजनीय पिता का लगाया पौधा है, उन्हें आगे बढ़ायें जिसे बग्गा जी चला रहे हैं उनकी सहायता करें, स्वयं आगे बढ़ें क्योंकि हम सब जानते हैं-जीवन-मरण, लाभ-हानि, यश-अपयश सब विधि के हाथ है।



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