एक समय था जब भारतीय फौज में सिखों की गिनती सबसे अधिक हुआ करती थी। सिख युवक सिख रेजीमेंट के अलावा सिख इनफैंटरी, पंजाब रेजीमेंट, आर्टलरी, गौरखा, आरमर्ड सहित अन्य रेजीमेंट में भी बड़ी गिनती में भर्ती हुआ करते थे। सिख रेजीमेंट सबसे अधिक मैडल जीतने वाली रेजीमेंट थी और एक समय में तो कामनवैल्थ में सबसे ऊपर इसका नाम आता था। पंजाब के तकरीबन हर घर से एक ना एक बच्चा फौज में भेजा जाता था और कई घर तो ऐसे भी हैं जिनमें कई पीढ़ियां फौज में गई, पर आज सिख युवकों की फौज के प्रति रुचि कम होती देख देश की सेना के द्वारा सिखों को सेना में भर्ती होकर सिख रेजीमेंट से जुड़ने की अपील की गई है जो दर्शाता है कि आज भी समूचे देश को सिखों की देशभक्ति पर गर्व है और वह भलिभान्ति जानते हैं कि सिख सैनिक मुश्किल आने पर कभी पीछे नहीं हटता या तो सामने वाले को मिटा देता है या फिर खुद देश के लिए कुर्बान हो जाते हैैं।
इतिहास गवाह है कि 19वीं सदी में खालसा आर्मी द्वारा अफगानिस्तान विजय करने के बहादुरी वाले किस्साें से प्रभावित होकर ब्रिटिश हकूमत ने सिखों को भारतीय फौज में शामिल करते हुए उन्हें सिख पायोनियर्स का खिताब दिया गया। 1846 में सिख रेजीमेंट की स्थापना हुई। 1932 में जब स्वतन्त्रता के लिए संघर्ष जोरों पर था, स्वतंत्रता संग्राम में भी सिखों द्वारा आगे आकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मोर्चे लगाए जा रहे थे, ऐसे में मार्शल कौम से गौरों को भय सताने लगा और उन्होंने सिख बटालियनों को भंग कर दिया। 1941 में दूसरे विश्व युद्ध के समय उन्हें अधिक फौज की आवश्यकता हुई तो फिर से बड़ी गिनती में सिखों को फौज में शामिल किया गया और सिख रेजीमेंट के अतिरिक्त सिख लाईट इनफैंटरी रेजीमेंट की भी स्थापना की गई जो कि आज भी कायम है और 20 रैगुलर बटालियन, 3 टेरिटोरियल आर्मी इसमें काम कर रही है।
आजादी से पूर्व 245 और आजादी के उपरांत 82 मैडल सिख रेजीमेंट के बहादुर जवानों ने जीते जिसमें 21 इंडीयन आर्डर आफ मैरिट, 14 विक्टोरिया, 2 परमवीर चक्र, 4 अशोक, 8 महावीर, 24 कीर्ति, 64 वीर, 55 शौर्य चक्र के अलावा 375 सेना मैडल प्राप्त किये हैं। पहला अग्निवीर पदक हासिल करने वाला सैनिक भी 7 सिख लाईट एनफेंटरी से आया। सिख सैनिकों की फौज में कम होती गिनती के पीछे कुछ लोग सिख युवकों का रुझान विदेशों की ओर बढ़ने का तर्क देते हैैं मगर सरदार हिम्मत सिंह जिनका पारिवारिक सम्बन्ध फौज से रहा है और इनके परिवार के कई सदस्य आज भी भारतीय फौज का हिस्सा हैं। हिम्मत सिंह का कहना है कि सिखों का विदेशों में पलायन का सिलसिला तो बीसवीं सदी के शुरू से ही हो गया था, यह कोई नया नहीं है।
बावजूद इसके इतने सालों से सेना में भी बड़ी गिनती में सिख भर्ती हुए। असल में जबसे राज्य की जनसंख्या के हिसाब से फौज में भर्ती होने लगी तब से पंजाब से गिनती कम होने लगी। दूसरा अग्निवीर स्कीम भी इसका एक कारण है जिसके लिए सरकार को थोड़ा बदलाव करने की आवश्यकता है। इस स्कीम के आने से सिपाही और अग्निवीर में फर्क दिखने लगा जबकि दोनों ही जवान सेना में रहकर देश के लिए मर-मिटने को तैयार रहते हैं। फिर अग्निवीर की 4 साल बाद रिटार्यरमेंट होने के बाद कोई पैंशन या अन्य लाभ भी नहीं हैं। इसलिए सिर्फ अपील से कुछ नहीं होगा, इसकी गहराई पर विचार करने की आवश्कता है।
विदेशों से संचालित पंजाबी अंडरवर्ल्ड पंजाब जिसे गुरुओं, पीरों की धरती माना जाता है और पंजाब के लोग अपनी मेहनत और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जो विदेशों में जाकर पंजाब ही नहीं बल्कि समूचे देश को कलंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यह लोग विदेशों में बैठकर पंजाबी अंडरवर्ल्ड चला रहे हैं जिसके चलते आज हालात ऐसे बन चुके हैं कि पंजाब में गैंगस्टर कल्चर दिन-प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है जो कि बेहद चिन्ता का विषय है। इसके पीछे क्या कारण रहे, कौन इसके लिए जिम्मेवार है यह मायने नहीं रखता अब सोचना यह होगा कि इसे किस प्रकार रोका जाए।
बु़िद्धजीवी वर्ग का मानना है कि सरहद पार की लड़ाई लड़कर ही इस पर काबू पाया जा सकता है क्योंकि निश्चित तौर पर इन्हें फन्डिंग, हथियार आदि की आर्पूति पड़ौसी मुल्क के द्वारा ही की जाती है जिसकी हमेशा कोशिश रहती है कि किसी भी प्रकार भारत में दहशत का माहौल बनाया जाए। भारतीय युवा वर्ग को ड्रगस, गैंगस्टर, सैक्स रैकेट आदि में लगाकर उन्हें गलत राह पर डाला जाए ताकि वह देश की तरक्की में योगदान ना दे पाएं। हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पंजाब मूल के 61 बड़े गैंगस्टरों में से 18 सीधे अमेरिका की सरज़मीं से अपने आपराधिक नेटवर्क चला रहे हैं। यानी पंजाब में होने वाले कई कत्ल, फिरौती, धमकी और हथियार सप्लाई की डोर विदेशों से हिलाई जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका के बाद यूएई में 9, कनाडा और जर्मनी में 6-6, ब्रिटेन और यूरोप में 5-5, ऑस्ट्रेलिया व पुर्तगाल में 3-3, थाईलैंड और मलेशिया में 2 जबकि पाकिस्तान, इटली, ब्राज़ील और इंडोनेशिया में एक-एक गैंगस्टर बैठा है। यह अपराधी विदेश में सुरक्षित रहकर पंजाब में खौफ का कारोबार चला रहे हैं। इसी खतरे को तोड़ने के लिए पंजाब पुलिस ने 72 घंटे का बड़ा अभियान चलाया, जिसमें 3,287 गैंग सहयोगियों को दबोचा गया। 21 गैंगस्टरों पर रेड कॉर्नर नोटिस पहले से जारी हैं। साथ ही विदेश में बैठे अपराधियों को पकड़ने के लिए ओवरसीज़ फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्स्ट्राडिशन सेल बनाया गया है, ताकि दुनिया के किसी भी कोने से अपराधियों को घसीटकर लाया जा सके।
आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2022 से अक्तूबर 2025 तक पंजाब में पुलिस और गैंगों के बीच 324 मुठभेड़ें हुईं, जिनमें 24 गैंगस्टर मारे गए, 515 गिरफ्तार हुए, 319 घायल हुए और तीन पुलिसकर्मी शहीद हुए। यह साफ दिखाता है कि पंजाब में गैंगवार कितना खतरनाक रूप ले चुका है। जत्थेदार अकाल तख्त साहिब की ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज ने सिख समुदाय से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की है क्योंकि मौजूदा समय में सिखों में एक या दो बच्चे पैदा करने का चलन है जिसके चलते सिखों की गिनती में निरन्तर कमी देखी जा रही है। मगर बेहतर होता कि जत्थेदार साहिब सिखों को सिखी में रहने की अपील करते क्योंकि आज ज्यादार युवा वर्ग खासकर पंजाब में ही सिखी का त्याग करता दिख रहा है जिसके चलते दस्तारधारी सिख बहुत ही कम दिखने लगे हैं।
सिख संस्थानों के अन्तर्गत सिख वोटर बनने हेतु दस्तारधारी सिख होना आवश्यक होता है, पर अगर युवा वर्ग दस्तारी होगा ही नहीं तो वोटर नहीं होगा और ऐसे में निश्चित तौर पर सिखों की जनसंख्या कम आंकी जाएगी। इस पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हरविन्दर सिंह सरना ने भी चिन्ता प्रकट की है। उन्होंने कहा ज्यादा बच्चे पैदा करने से पहले बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा, मैडिकल, रोजगार के साधन मुहैया करने पर जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा ईसाई मिशनीयां इसलिए ही कामयाब हैं क्योंकि वह अपने धर्म के लोगों के लिए बिना गोलकों के इन सभी जरुरतों की पूर्ति करते हैं। सिख संस्थानोें के पास गोलकों का भंडार है, बस सिख नेताओं को इसके प्रति सोच रखनी होगी।


Download Android App
Download iOS App




