राजनीति लोकतन्त्र में ऐसा क्षेत्र माना जाता है जो सदैव गतिमान व चलायमान रहता है। भारत ने स्वतन्त्रता के बाद जिस संसदीय लोकतन्त्र को अपनाया उसमें संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक दलों को अपने नेतृत्व की कुशलता का परिचय देना होता है और इसके लिए ये दल अपनी छवि को बेहतर बनाये रखने हेतु सदैव कार्यरत रहते हैं हालांकि राजनीति में आयु की विशेष महत्ता नहीं समझी जाती है, क्योंकि यह विधा एक उम्र के परिपक्व होने के बाद ही जनहित के सर्वांगीण विकास पक्षों पर गंभीर चिन्तन करने योग्य हो पाती है, मगर दुनिया में ऐसे भी उदाहरण भरे पड़े हैं जब युवावस्था में ही विभिन्न देशों के नेताओं ने अपने–अपने देशों में राजनीति को नई धार देते हुए जन क्रांतियां तक कीं।
वर्तमान में देश की सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष एक 45 वर्ष के नवोदित राजनीतिज्ञ नितिन नबीन को बनाकर केवल यही सिद्ध किया है कि वह तेजी से बदलते सामयिक घटनाक्रमों के सापेक्ष अपना नेतृत्व खड़ा करना चाहती है और बदलते समय की चुनौतियों का सामना करना चाहती है, लेकिन महात्मा गांधी ऐसे दूरदृष्टा नेता थे जिन्होंने समय की गति को बहुत करीब से पकड़ा था और भारत की दिशा को स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान ही तय कर दिया था। हालांकि तब के विश्व के आर्थिक हालात पूरी तरह भिन्न थे, क्योंकि आधी के करीब दुनिया साम्राज्यवाद के साये तले सांस ले रही थी। यह साम्राज्यवाद पश्चिमी यूरोपीय देशों जैसे ब्रिटेन, फ्रांस आदि देशों का ही था। इन देशों ने दुनिया के आर्थिक स्रोतों पर एकाधिकार जमा रखा था जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जाकर ही टूटा जिसमें से अमेरिका व सोवियत संघ दो विश्व शक्ति बनकर निकले।
गांधी ने इसका पुरजोर विरोध किया और यहां तक किया कि उन्होंने विद्यार्थियों को धर्म की शिक्षा दिये जाने का भी समर्थन किया और कहा कि इससे वे नीतिशास्त्र में प्रवीण होंगे। अतः स्वतन्त्रता आन्दोल के दौरान गांधी ने कांग्रेस को समय– समय पर युवा नेतृत्व देकर गुलाम भारत नई ऊर्जा का संचार करने में सफलता भी प्राप्त की। 1930 में जब पंडित जवाहर लाल नेहरू को लाहौर अधिवेशन में अध्यक्ष बनाया गया तो वह खासे युवक थे। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने पूर्ण स्वतन्त्रता का प्रस्ताव पारित करके देश के युवा वर्ग को आजादी के आन्दोलन से जोड़ने में सफलता प्राप्त की। इसके विपरीत इसी वर्ष इलाहाबाद में मशहूर शायर इकबाल की सदारत में हुआ मुस्लिम लीग का सम्मेलन पूरी तरह असफल रहा जिसमें पहली बार अंग्रेज साम्राज्य के भीतर अलग से मुस्लिम राज स्थापित करने की मांग की गई । इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए मुस्लिम नागरिकों की संख्या तक पर्याप्त नहीं थी जिसे पूरा करने के लिए इलाहाबाद के मुस्लिम कारोबारियों की दुकानें बन्द करा कर लाया गया। मगर शायर इकबाल ने इस सम्मेलन में पाकिस्तान की नींव डाल दी थी।
गांधी ने इस हकीकत को पहचाना और अगले वर्ष 1931 में कराची में कांग्रेस सम्मेलन का अध्यक्ष सरदार वल्लभ भाई पटेल को बनाया गया और उनकी सदारत में स्वतन्त्र भारत में सभी नागरिकों को मौलिक मानवीय अधिकार प्रदान करने का प्रस्ताव पारित कराया गया। बेशक तब तक कांग्रेस पार्टी ने भारत का संविधान लिखे जाने के लिए मोती लाल नेहरू के नेतृत्व में समिति का गठन कर दिया था, मगर इस समिति में गांधी ने जवाहर लाल नेहरू व नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जैसे युवा नेताओं को शामिल करा दिया था। इस समिति ने स्वतन्त्र भारत में प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मत देने के अधिकार से सुसज्जित करने का फैसला लिया था और भारत को एक संघीय ढांचे का राष्ट्र बताया था तथा केन्द्र व राज्यों के अधिकारों की सूचियां बनाई थीं। यह सारा काम नेहरू व सुभाष चन्द्र बोस की उपस्थिति में ही हुआ।
इसके बाद जब अंग्रेजों ने 1936 में प्रान्तीय एसेम्बलियों के चुनाव कराये तो केवल बंगाल को छोड़कर सभी ब्रिटिश प्रान्तों में मुस्लिम लीग की भारी पराजय हुई। इसी वर्ष लखनऊ में कांग्रेस का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ जिसकी अध्यक्षता पुनः प. जवाहर लाल नेहरू ने की और उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस सरकारे जमीदारी प्रथा का उन्मूलन करेगी और खेत जोतने वाले किसानों को जमीनों का मालिकाना हक देगी। इसके बाद ही जिन्ना ने खुलकर साम्प्रदायिक राजनीति खेलनी शुरू की। जिसकी वजह से 1947 में भारत के दो टुकड़े हुए और मुसलमानों के लिए अलग से पाकिस्तान देश का निर्माण किया गया। वास्तव में यह गांधी के जीवित रहते ही उनके सिद्धान्तों की हत्या थी, मगर यही ऐतिहासिक सच है।
अतः भारतीय जनता पार्टी की जिम्मेदारी बनती है कि वह भारत की हिन्दू बहुल जनता की अपेक्षा पर खरी उतरे और भारत का चहुंमुखी विकास करें। इस सिलसिले में इस पार्टी द्वारा अपना राष्ट्रीय अध्य़क्ष एक 45 वर्ष को युवा बनाया जाना बहुत मायने रखता है, हालांकि पूर्व में ऐसा प्रयोग विपक्षी कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी को बनाकर कर चुकी है, जो पूरी तरह असफल रहा,
इसका प्रमुख कारण यह माना गया कि राहुल गांधी को केवल गांधी परिवार का सदस्य होने की वजह से यह जिम्मेदारी दी गई, जबकि राजनीतिक तौर पर उनमें परिपक्वता की कमी थी। कांग्रेस पार्टी को परिवार वाद व वंश वाद के चलते ऐसा निर्णय करने का जिम्मेदार भी समझा गया जबकि दूसरी ओर भाजपा ने नितिन नबीन को अध्यक्ष बनाने का फैसला पूरी तरह रणनीतिक बदलाव के तहत लिया है। हमे यह याद रखना चाहिए कि स्वतन्त्रता के बाद भारत में जिस पंचवर्षीय योजना के तहत विकास का ढांचा खड़ा किया गया था वह विचार सबसे पहले नेता जी सुभाष चन्द बोस ने ही 1937 में कांग्रेस की अध्यक्षता करते हुए दिया था तब उन्होंने इसे राष्ट्रीय योजना समिति का नाम दिया था।
नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य यह है कि वह भारतीय जनता पार्टी को किस प्रकार दक्षिण भारत में स्थापित करते हैं और इस क्षेत्र के राज्यों के लोगों के बीच अपनी पार्टी की छवि को गुणात्मक रूप से अखिल भारतीय रूप में पेश करते हैं। उनके साथ कोई भी पुराना जनसंघ या भाजपा की छवि का पुछल्ला नहीं जुड़ा हुआ है, क्योंकि वह नये जमाने की पहचान है। दक्षिण भारत के तीन राज्यों तमिलनाडु, केरल व पुडिचेरी में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव हो रहे हैं।
इन राज्यों में भाजपा ने अपना कार्यकर्ता आधार तो बना लिया है, मगर उसकी छवि में दक्षिण की संस्कृति का वह आवेश नहीं आ पाया है जिसकी जरूरत चुनावों में सफलता के लिए होती है। इस सिलसिले में नितिन नबीन को अपनी युवा प्रतिभा को दिखाना होगा और उतर-दक्षिण के उस तार को मजबूत करना होगा जिसे भी आदिशंकराचार्य ने बनाया था। यह कार्य केवल पुरातन सांस्कृतिक चेतना को जाग्रत करके ही किया जा सकता है।
राजनीति में युवा नेतृत्व का महत्व
Summary :
राजनीति लोकतन्त्र में ऐसा क्षेत्र माना जाता है जो सदैव गतिमान व चलायमान रहता है। भारत ने स्वतन्त्रता के बाद जिस संसदीय लोकतन्त्र को अपनाया उसमें संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक दलों को अपने नेतृत्व की कुशलता का परिचय देना होता है और इसके लिए ये दल अपनी छवि को बेहतर बनाये रखने हेतु सदैव कार्यरत रहते हैं हालांकि राजनीति में आयु की विशेष महत्ता नहीं समझी जाती है, क्योंकि यह विधा एक उम्र के परिपक्व होने के बाद ही जनहित के सर्वांगीण विकास पक्षों पर गंभीर चिन्तन करने योग्य हो पाती है, मगर दुनिया में ऐसे भी उदाहरण…


Download Android App
Download iOS App



