नई विश्व व्यवस्था और भारत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए विपक्ष को जमकर निशाने पर लिया। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, वामपंथी दलों और आप पार्टी पर धुंआधार हमले बोले। प्रधानमंत्री ने बोफोर्स का उल्लेख कर कांग्रेस शासन में एक के बाद एक हुए घोटालों की याद दिलाई। राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप चलते ही रहते हैं। लोकतंत्र में संसद में हंगामे हमने पहले भी देखे हैं। मर्यादाएं टूटती भी देखी हैं। शर्मसार कर देने वाली घटनाएं भी हमने देखी हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष की बोलती तो बंद की ही लेकिन उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात यह कही कि न्यू वर्ल्ड आर्डर यानि नई विश्व व्यवस्था का झुकाव भारत की तरफ हो रहा है। उनके कहने का अभिप्राय यह है कि नई विश्व व्यवस्था में भारत अहम भूमिका निभाने को तैयार है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि पिछले कुछ दिनों में भारत ने दुनिया के 9 बड़े महत्वपूर्ण देशों के साथ ट्रेड डील साइन की है​ जिसमें यूरोपीय यूनियन भी शामिल है। इसमें 27 देश शामिल हैं। पहले दुनिया का कोई देश हमसे डील करने आगे नहीं आता था। अब दुनिया के देश भारत के साथ डील कर रहे हैं जो कभी हमारी तरफ देखते नहीं थे। अमेरिका के साथ हाल ही में हुई डील की पूरी दुनिया तारीफ कर रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है भारत की व्यापार गति कोई भी वैश्विक घटना, परिवर्तन या बड़ा विचार जो विश्व की चली आ रही किसी व्यवस्था को बदलकर नई वैश्विक व्यवस्था बनाने और अपनाने के लिए मजबूर कर दें तो यह नई व्यवस्था ही न्यू वर्ल्ड आर्डर कहलाती है। को​िवड महामारी के कारण कई व्यवस्थाएं बदल गईं या बदलनी पड़ी थी। राष्ट्रीय संबंध प्रभावित हुए, व्यापार प्रभावित हुआ तो कई कम्पनियों ने भारत सहित अन्य देशों की राह पकड़ी। अर्थव्यवस्था के आयाम बदल गए, देशों की भूमिकाएं बदल गईं, सत्ताएं बदल गईं और उनके सोचने के तरीके भी। बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत अपनी उचित जगह हासिल कर रहा है जिस प्रकार भारत तेजी से प्रगति कर रहा है वो न सिर्फ भारत की 140 करोड़ आबादी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है बल्कि इसका प्रभाव दुनिया पर भी पड़ना तय है। भारत एक ऐसा देश माना जाता है जो दुनिया में नैतिकता और अच्छाई के लिए लड़ाई लड़ता है। एक ऐसी दुनिया में जिसमें विचारों को लेकर जबरदस्त खींचतान मची हुई है। इन परिस्थितियों में भारत बहुत मजबूत होकर उभरा है। भूराजनीति परिस्थितियों के लिहाज से वर्ष 2025 ने उथल-पुथल मचाए रखी। पुराने रिश्तों में दरार पड़ी और वर्षों से दूरी बनाए भी पास आ गए। रूस, यूक्रेन युद्ध, फिलिस्तीन-हमास युद्ध, ईरान से अमेरिका और फिलिस्तीन के बढ़ते तनाव से पूरी दुनिया सकते में है। भारत के साथ भी कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए जो हमारे नियंत्रण से बाहर थे। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ आॅपरेशन सिंदूर हुआ। प्रधानमंत्री शेख हसीना का तख्तापलट नहीं होता तो बांग्लादेश से ​रिश्ते नहीं बिगड़ते। नेपाल में भी भारत विरोधी भावनाएं उबाल खाती रहती है। ऐसी स्थिति में हम अपेक्षा नहीं कर सकते कि हमेशा से ही हमारे रिश्ते सभी से एक समान और बेहतर रहेंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां और देश की अर्थव्यवस्था की चुनौतियां भारत के सामने हैं। इन हालत में जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को शक्ति की धुरी बनाया उसकी सराहना तो करनी ही पड़ेगी। कहते हैं दुनिया झुकती है झुकाने वाला चाहिए। भारत आज ​अमेरिका जैसी वैश्विक शक्ति के साथ भी लोहा ले रहा है। भारत ने जी-20 शिखर सम्मेलन के मंच का उपयोग कर खुद को एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया। दुनिया में नई बहुआयामी विश्व व्यवस्था में योगदान देने के लिए खुद को तैयार किया। भारत ने अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर जो सफलताएं हासिल कीं उससे कई देशों से हमारी दूरियां खत्म हुईं। तमाम मुश्किलों के बावजूद भारत ने अपनी नी​ितयों को स्वतंत्र रखा और अमेरिका के मनमाने रवैये के आगे झुकने से साफ इंकार कर दिया। भारत ने अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए रूस से व्यापारिक रिश्ते बनाए रखे और देश की तेल और ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में वैश्विक स्तर पर मज़बूत नेतृत्व एवं आगे बढ़ने के लिहाज से देखा जाए तो हक़ीक़त यह है कि भारत आज एक लोकतंत्र के रूप में अकेला खड़ा है और अपने दम पर फैसले लेने में सक्षम है। पूरी दुनिया के राष्ट्राध्यक्ष और राजनेता जिस प्रकार से आज नई दिल्ली के दौरे कर रहे हैं और दुनियाभर के उद्यमी एवं व्यावसायी भारत के अलग-अलग हिस्सों में पहुंच रहे हैं, वो इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की आज कैसी साख है। आज जब वैश्विक स्तर के मामलों में पड़ने से पश्चिमी देश अपने क़दम पीछे खींच रहे हैं, तब भारत कुशलता के साथ दुनिया के साथ अपने संबंध स्थापित कर वैश्विक स्तर पर मची खींचतान में दखल देते हुए अपने लिए अनुकूल जगह बना रहा है। भारत को खुद पर और पारस्परिक रूप से जुड़ी दुनिया, दोनों पर ही अटूट भरोसा है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक भारत ने विभिन्न देशों के साथ जिस प्रकार से अलग-अलग और विरोधाभासी लगने वाली साझेदारियां की हैं, उनमें उसका यह विश्वास साफ तौर पर झलकता है।
अमेरिका से टैरिफ विवाद शुरू होने पर भारत ने नए बाजार तलाशने शुरू किए और एक के बाद एक फ्री ट्रेड एग्रीमैंट किए। ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, जापान, मारीशिस, ओमान, आसियान, सिंगापुर और यूरोपिय संघ के साथ ट्रेड समझौते किए। भारत और यूरोपिय संघ के बीच हाल ही में जो मुक्त व्यापार समझैता हुआ वह दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत व्यापार और 25 प्रतिशत जीडीपी को प्रभावित करेगा। जब डोनाल्ड ट्रम्प ने देखा कि भारत पर भारी भरकम टैरिफ कुछ काम नहीं कर रहा और भारत जैसा विशाल बाजार उसके हाथ से निकलता जा रहा है तब जाकर उन्होंने ट्रेड डील पर सहमति का ऐलान किया और ट्रैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। भारत ने खाड़ी सहयोग परिषद से मुक्त व्यापार समझौते के लिए संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। भारत और खाड़ी सहयोग परिषद मुक्त व्यापार समझौता हमारे ऊर्जा स्रोतों के विविधिकरण और विकास में सहायक होगा जिससे लंबे समय तक आपूर्ति सुरक्षा मजबूत होगी और व्यापार का विस्तार होगा। वर्तमान में भारत और खाड़ी सहयोग परिषद के बीच व्यापार 170 अरब डालर का है और लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं। भारतीय कारीगरों के लिए अब वैश्विक बाजार खुल रहे हैं। भारत अब मैन्युफैक्चरिंग हब बन सकता है। कई अन्य देशों के साथ समझौते पाइप लाइन में हैं और भारत विकसित राष्ट्र बनने की राह पर अग्रसर है।

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