नीट यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद एक के बाद एक छात्र-छात्राओं द्वारा मौत को गले लगाने के बाद मचे भारी बवाल और चौतरफा आलोचनाओं के बीच केन्द्र सरकार ने बड़े प्रशासनिक कदम उठाए हैं। परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए की साख पर लगे गम्भीर दाग धोने के लिए एनटीए के दो नए संयुक्त सचिव और दो नए संयुक्त निदेशक नियुक्त कर दिए गए हैं। छात्रों की आत्महत्या को सिस्टम द्वारा की गई हत्या करार दिया जा रहा है िजससे जनाक्रोश भी दिखाई देता है। लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए यह पहला प्रशासनिक फेरबदल है। यद्यपि केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने रद्द हुई नीट यूजी परीक्षा दोबारा 21 मई को कराने की तिथि घोषित कर दी है और अगले वर्ष परीक्षा ऑनलाइन कराने का भी ऐलान कर दिया है लेकिन लीक और गोपनीयता भंग ने राष्ट्रीय परीक्षा एजैंसी की विश्वसनीयता पूरी तरह से नष्ट कर दी है। पेपर लीक प्रकरण में एनटीए की साख खत्म होने का बड़ा कारण मास्टर माइंड दो प्रोफैसरों की गिरफ्तारी है जो एनटीए की परीक्षा पेपर बनाने वाली समिति से जुड़े हुए थे। इससे स्पष्ट है कि एनटीए के कुएं में भांग पड़ी हुई थी। माफिया खुद एनटीए से जुड़े लोग ही निकले। उनके तार संगठित गिरोह, धन के लोभी, संवेदनहीन सािजशकर्ताओं से जुड़े हुए थे, जिन्होंने एक बार फिर युवा वर्ग को हताश किया और उनकी उम्मीदें छीन लीं। कहने को तो हम विश्व गुरु हैं। विशाल जनसंख्या वाले देश में हम सफलतापूर्वक जनगणना करा लेते हैं। चुनावों से पहले दिन-रात एक करके मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण भी करा लेते हैं। अंतरिक्ष में हमारी धाक है। हम चांद पर मानव मिशन भेजने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन बिना लीक के परीक्षा नहीं करवा सकते। स्पष्ट है कि सिस्टम में ही काली भेड़ें छिपी हुई हैं।
लिहाजा मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की जरूरत है। शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने नीट परीक्षा की प्रक्रिया में सुधार के लिए बनाई गई राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को भी पूरी तरह से लागू करने की बात कही है लेकिन सवाल यह भी है कि यह सिफारिशें पहले लागू क्यों नहीं की गईं। कहते हैं कि दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है लेिकन बार-बार पेपर लीक हो जाने के बाद भी पहले कोई कदम नहीं उठाए गए। जबकि कुछ अन्य परीक्षाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं तो नीट परीक्षा के ऑनलाइन करने में िवलम्ब क्यों हुआ। नीट परीक्षा शुरू से विवादों से घिरी रही है, कई राज्यों ने तो इस प्रारूप का ही विरोध किया लेकिन इसके बावजूद जब इसे देश भर में लागू कर दिया गया तो परीक्षा कराने वाली एजैंसी एनटीए को अपनी विश्वसनीयता पर गंभीर चोटें सहनी पड़ी हैं और विभिन्न किस्म के आरोप एवं विवाद निराशाजनक रूप से नियमित अंतराल पर सामने आते रहे हैं। इसमें तमिलनाडु में हुआ साल 2019 का घोटाला जिसमें छात्रों ने परीक्षा लिखने के लिए दूसरों का इस्तेमाल किया। केरल में साल 2022 का लड़की परीक्षार्थियों की जामा-तलाशी का विवाद और साल 2024 का पेपर लीक और ग्रेस मार्क विवाद शामिल हैं।
पेपर लीक के सहारे राजस्थान में एक युवा नेता के परिवार के चार बच्चे डॉक्टर बन गए। इससे स्पष्ट है िक देश के डॉक्टर कितने प्रतिभाशाली होंगे? डॉक्टरों को मरीजों के लिए भगवान स्वरूप माना जाता है। अगर वे लाखों में लीक वाले प्रश्नपत्र खरीद कर पास हुए हैं तो क्या इस वर्ग को छोड़ा जा सकता है। 23 लाख बच्चों के भविष्य पर जो आघात हुआ है वह असहनीय है। लाखों युवाओं में कई प्रतिभावान आैर विशेषज्ञ डॉक्टर बनने की योग्यता रखते होंगे जो लाखों की जिन्दगियां बचा सकते थे। हो सकता है अिभभावकों ने कर्ज लेकर बच्चों की तैयारी करवाई होगी लेकिन माफिया ने उनके सपनों को खंड-खंड कर दिया।
सवाल यह भी है कि पेपर लीक माफिया और नकल माफिया पहले भी पकड़े जाते रहे हैं लेिकन आज तक उनको कितनी सजाएं हुईं। किस पर स्थायी पाबंदी लगाई गई। इसका कोई जवाब नहीं। बड़े-बड़े माफिया जमानत पर बाहर हैं और केस ठप्प हैं। छात्रों की आत्महत्याओं के बाद एक अत्यंत संवेदनशील पक्ष छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य और अभिभावकों की भूमिका का भी सामने आया है। देश में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि ऐसी परिस्थितियों में अभिभावक अपने बच्चों को डिप्रेशन से कैसे बचाएं। कहते हैं असफलता सफलता की सीढ़ी होती है। परीक्षा रद्द होना या परीक्षा में असफल होना जीवन का अंत नहीं है। ऐसे समय में अभिभावकों को बच्चों पर बहुत अधिक दवाब बनाने की बजाय उनके साथ खड़ा होना चाहिए, उनकी बात सुननी चाहिए और घर के माहौल को सकारात्मक बनाए रखना चाहिए ताकि बच्चे किसी भी तरह के आत्मघाती विचारों से दूर रह सकें। राधाकृष्णन कमेटी ने एनटीए के पुनर्गठन और एक सुरक्षित परीक्षा प्रशासन तंत्र निर्मित करने के लिए राज्य और जिला प्राधिकारियों के साथ एक मजबूत संस्थागत जुड़ाव बनाने की सिफारिश की। इनके अलावा, उसने बहु-चरणीय परीक्षा, कागज और कंप्यूटर के हाइब्रिड इस्तेमाल और सेंध व कदाचार रोकने के उपायों की शृंखला की भी सिफारिश की। एनटीए को लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित करने वाली, संयुक्त प्रवेश परीक्षाओं का अपना अकुशल संचालन जारी रखने देना अपराध होगा। मेडिकल में दाखिले के लिए एकल, मानकीकृत और पारदर्शी प्रवेश परीक्षा लागू करने के उपाय के रूप में नीट को लाया गया था। बेहतर होगा मौजूदा एनटीए को बर्खास्त कर परीक्षा प्रणाली में अमूलचूल परिवर्तन किए जाएं।
एनटीए ही निकला माफिया
Summary :
नीट यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद एक के बाद एक छात्र-छात्राओं द्वारा मौत को गले लगाने के बाद मचे भारी बवाल और चौतरफा आलोचनाओं के बीच केन्द्र सरकार ने बड़े प्रशासनिक कदम उठाए हैं। परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए की साख पर लगे गम्भीर दाग धोने के लिए एनटीए के दो नए संयुक्त सचिव और दो नए संयुक्त निदेशक नियुक्त कर दिए गए हैं। छात्रों की आत्महत्या को सिस्टम द्वारा की गई हत्या करार दिया जा रहा है िजससे जनाक्रोश भी दिखाई देता है। लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए यह पहला प्रशासनिक फेरबदल है। यद्यपि केन्द्रीय…


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