तीन टन ‘हेरोइन’ की दास्तां !

Summary :

गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित निजी मुन्द्रा बन्दरगाह पर विगत 16 सितम्बर को तीन हजार किलो अर्थात तीन टन मादक पदार्थ हेरोइन का पकड़ा जाना वास्तव में बहुत सनसनीखेज और हैरान करने वाला वाकया है

गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित निजी मुन्द्रा बन्दरगाह पर विगत 16 सितम्बर को तीन हजार किलो अर्थात तीन टन मादक पदार्थ हेरोइन का पकड़ा जाना वास्तव में बहुत सनसनीखेज और हैरान करने वाला वाकया है जिसके चलते यह कहा जा सकता है कि मादक द्रव्यों (ड्रग्स) की तस्करी करने वालों के लिए गुजरात बहुत आसान जरिया बना हुआ है। पकड़ी गई हेरोइन की बाजार कीमत 21 हजार करोड़ रुपए आंकी जा रही है जबकि सरकारी कीमत नौ हजार करोड़ रुपए बताई जा रही है मगर इतना निश्चित है कि तीन टन मादक पदार्थ का भारत के मुन्द्रा बन्दरगाह पर पकड़ा जाना समूचे देश में नशे की लत फैलाने की साजिश का एक अंग है। सवाल उठना लाजिमी है कि मादक पदार्थ की तस्करी निजी बन्दरगाह के माध्यम से ही क्यों हो रही थी? इससे सार्वजनिक संस्थानों के निजी करण का प्रश्न भी जाकर कहीं न कहीं न जुड़ता है। मुन्द्रा बन्दरगाह देश के प्रमुख अडानी उद्योग समूह का है। बेशक माल की ढुलाई या आवाजाही की तस्दीक करने की जिम्मेदारी सरकारी जांच एजेंसियों की ही होती है परन्तु तस्कर कहीं न कहीं निजी बन्दरगाहों पर स्वयं को ज्यादा सामान्य महसूस करते हैं। इस तरफ भी ध्यान दिये जाने की जरूरत भविष्य में पड़ सकती है।
 सवाल यह है कि इस हेरोइन की आवक मूल रूप से अफगानिस्तान से बताई जा रही है जो ईरान के बन्दरगाह होते हुए गुजरात में पहुंची। इसका सीधा मतलब यह है कि अफगानिस्तान से मादक द्रव्यों की तस्करी का सिलसिला बाकायदा एक व्यापार के रूप में विकसित है जिसके तालिबान के अफगानिस्तान पर काबिज होने के बाद और ज्यादा फलने-फूलने का अन्देशा है। सवाल यह भी है कि कौन लोग हैं जो देश में नशे में लत फैलाना चाहते हैं। तीन टन हेरोइन की आवक से अन्दाजा लगाया जा सकता है कि तस्करों के हौंसले कितने बुलंद हैं। 
पिछले सात सालों से आसानी से भारत में गुजरात बन्दरगाहों के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं। मादक द्रव्यों को भारत में बेच कर जो धन प्राप्त किया जाता है उसका उपयोग किन कार्यों में होता है? जाहिर तौर पर यह यह धन संशोधन (मनी लाउंडरिंग) का मामला भी है। मादक द्रव्यों को पकड़ना मूल रूप से नारकोटिक्स ब्यूरो (मादक पदार्थ अवरोध विभाग) का कार्य है मगर इसके मुखिया का पद ही पिछले 18 महीनों से खाली पड़ा हुआ है। मुन्द्रा बन्दरगाह पर जो तीन टन हेरोइन पकड़ी गई है वह नारकोटिक्स ब्यूरो नहीं बल्कि राजस्व खुफिया निदेशालय की जांच में पकड़ी गई है। बन्दरगाहों पर यह जांच सामान्य प्रक्रिया होती है। अगर इस जांच में ही सेलखड़ी पत्थर के पाऊडर की आड़ में तीन टन हेरोइन बरामद होती है तो इससे अन्दाजा लगाया जा सकता है कि भारत में कितने मादक द्रव्य आ सकते हैं। यह और भी हैरतंगेज है कि तीन टन की इस खेप को आन्ध्र प्रदेश के विजयवाड़ा शहर में पंजीकृत एक आयात- निर्यात फर्म ने मंगवाया जबकि आन्ध्र प्रदेश में अपने बन्दरगाह हैं। 
सबसे बड़ा खतरा इस बात का है कि ये तस्कर भारत की पूरी युवा पीढ़ी को नशेड़ी बना देना चाहते हैं। हम देख चुके हैं कि किस प्रकार पंजाब राज्य की नई पीढ़ी नशे की शिकार हो गई थी। इस पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए राज्य की सरकारें युद्ध स्तर पर लगी हुई हैं इसके बावजूद यह लत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। तब भी यह सवाल उठा था कि मादक द्रव्यों की भारत में आपूर्ति पाकिस्तान के जरिये अफगानिस्तान से ही होती है। अब यह तीन टन हेरोइन का नया मामला प्रकाश में आया है। जबकि इससे पहले मुम्बई के एक फिल्म कलाकार के घर से नारकोटिक्स ब्यूरो ने केवल दो ग्राम मादक द्रव्य पकड़ा था तो उस पर पूरे भारत में इस तरह कोहराम मच गया था कि मानों पूरा फिल्मी जगत ही नशेड़ी हो गया हो।  जरा अनुमान लगाइये कि यदि दिल्ली और नोएडा में कल ही दस या 15 किलो हेरोइन पकड़ी गई हो तो इस तीन हजार किलो हेरोइन की सप्लाई किन-किन राज्यों में किस तरह हो सकती है। यह विषय राजनीति का नहीं है बल्कि युवा पीढ़ी का भविष्य बचाने का है और इस तरफ हमें पूरा चौकन्ना होकर चलना होगा। हम किसी भी प्रकार विकास नहीं कर सकते यदि हमारी युवा पीढ़ी नशे की लत में पड़ जाये। तस्करी रोकने के लिए हमें अपनी अन्तर्राष्ट्रीय जल सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ानी पड़ेगी और देश के भीतर पुलिस व मादक अवरोधी दस्तों को सब प्रकार से सशक्त करना होगा। भारत को नशेड़ी बनाने की इस साजिश को हर कोण से तोड़ना होगा।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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