यह देश सुरक्षित है अपनी गीता के ज्ञान से

Summary :

चाचा जी तो चाचा, भतीजे साहब सुभान अल्लाह! पहले तो चाचाजान और फिर भतीजे क्यों पीछे रहते! जहां लाल किले के विस्फोट के बाद दारुल उलूम देवबंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भारत सरकार के विरुद्ध तोप के गोले छोड़े, उनके भतीजे, जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद, महमूद मदनी ने बी-2 बॉम्बर से बमबारी कर दी। कहने को तो मदनी एंड मदनी प्राइवेट लिमिटेड मुसलमानों की हिमायत में बोल रहे हैं, मगर वास्तव में ये हजरात अपने ही संप्रदाय की कब्र खोद रहे हैं। उनके अनर्गल और उटपटांग बयानों से मुस्लिम समाज बहुत रूष्ट है। दोनों के बयान और विशेष रूप से महमूद…

चाचा जी तो चाचा, भतीजे साहब सुभान अल्लाह! पहले तो चाचाजान और फिर भतीजे क्यों पीछे रहते! जहां लाल किले के विस्फोट के बाद दारुल उलूम देवबंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने भारत सरकार के विरुद्ध तोप के गोले छोड़े, उनके भतीजे, जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद, महमूद मदनी ने बी-2 बॉम्बर से बमबारी कर दी। कहने को तो मदनी एंड मदनी प्राइवेट लिमिटेड मुसलमानों की हिमायत में बोल रहे हैं, मगर वास्तव में ये हजरात अपने ही संप्रदाय की कब्र खोद रहे हैं। उनके अनर्गल और उटपटांग बयानों से मुस्लिम समाज बहुत रूष्ट है। दोनों के बयान और विशेष रूप से महमूद मदनी का, देश और मानवता विरोधी है। मदनी को कोई अधिकार नहीं कि मुसलमानों का नेतृत्व करें क्योंकि वे उन्हें अपना नेता नहीं मानते। भारत के चीफ इमाम, उमैर अहमद इलियासी के अनुसार, मदनी की इस गैर कानूनी हरकत से सभी मुसलमानों को लपेटने के लिए मुस्लिम तबका उनसे बेतहाशा नाराज है। हो सकता है कि मदनी को सरकार और सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं हो, मगर मुस्लिमों को सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी पर पूरा भरोसा है, क्योंकि पिछले 11 वर्ष से उन्होंने मुसलमानों के लिए नाना प्रकार के कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। मुस्लिमों से उनकी नेटवर्किंग सदा से ही एवन रही है। यही नहीं, 7 मुस्लिम देशों ने उन्हें अपने सर्वोच्च सम्मान भी प्रदान किए हैं।
“वन्दे मातरम् ” कहने वाले मुसलमानों को मदनी ने “मुर्दा कौम बता कर और उन्हें जिहाद पर वरगला कर महमूद समाज में दंगे भड़काना चाहते हैं। ये लोग तो लंबे हाथ वाले अमीर और रसूखदार हैं, मगर इनके इन जहरीले बयानों का खामियाजा आम और गरीब मुस्लिमों को भुगतना पड़ता है। भारत रत्न, मौलाना अबुल कलाम आजाद के अनुसार :
मेरी गली के शिवालय में घंटों की आवाजें गूंजें,तेरे मुहल्ले में मेरी मस्जिद के आजानें गूंजें !
“राष्ट्रवादी और संस्कारवादी मुसलमानों को उन्होंने ” मुर्दा कौम” की लांछन लगा कर उन्होंने उनकी अवहेलना की है। अगर ऐसे आग लगाने वाले लोगों को बे सूंड के हाथियों की तरह छोड़ दिया गया तो ये सांप्रदायिक दंगे करा सकते हैं। ऐसे लोगों को सलाखों के पीछे होना चाहिए।
नामचीन अधिवक्ता व मुस्लिम विचारक, मु. अत्यब सिद्दीकी ने बताया कि अगर सरकार मदनी के विरुद्ध देश और मुस्लिम विरोधी बयान के खिलाफ कोई कड़ा कदम नहीं उठाती तो देश को बांटने वाले और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों को सरकार के दबाव में दिए जाने के देशद्रोही बयान के खिलाफ न्यायालय में वे लेखक के लिए जनहित याचिका दायर करेंगे।
सच्चाई तो यह है कि मदनी चाचा-भतीजा परिवारवाद के चलते अपने वर्चस्व का नाजायज लाभ उठा रहे हैं। यह 1915-20 का वह देशभक्त परिवार नहीं है जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों से लोहा लिया था और 16 फरवरी 1916 में दारुल उलूम देवबंद के मौलाना उबेदुल्लाह सिंधी, मौलाना मुफ्ती किफायतुल्लाह देहलवी और मौलाना हुसैन अहमद मदनी की मदद से काबिल में, देश से बाहर काबुल में लाल रूमाल आंदोल द्वारा राजा महेंद्र प्रताप के नेतृत्व बनी थी जिसके प्रधानमंत्री, मौलाना उबेदुल्लाह सिंधी थे। इस परिवार के और इसी आंदोलन में मदरसा दारूल उलूम के उन तमाम मौलानाओं की साख पर मदनियों ने बट्टा लगाया है इस प्रकार की हरकतों से। माफी मांगने को बिल्कुल तैयार नहीं। इतना जहर उगलने के पश्चात कहते हैं कि उन्होंने सब कुछ सही कहा है। इस प्रकार के लोगों और बयानों से मुस्लिम समाज में बड़ी बेचैनी है। बरेली के मौलाना सैयद शहाबुद्दीन रिजवी का कहना है कि मदनी चचा-भतीजा के बयान न केवल देश विरोधी और मानवता विरोधी हैं, बल्कि इस्लाम, कुरान, हदीस और मुस्लिम विरोधी भी हैं। एक मुस्लिम धर्म गुरु होने के नाते उन्हें जिहाद की सही परिभाषा तक मालूम नहीं। जिहाद का अर्थ सरकार या गैर मुस्लिमों से लड़ना नहीं, बल्कि स्वयं अपनी दुर्भावनाओं और बुराइयों से लड़ना जिहाद करना है। जिहाद के नाम में ये लोग हिंदू-मुस्लिम दंगा करा कर “वन्दे मातरम्” की देश से प्यार की गंगा में आग लगाने का काम कर रहे हैं। भारत में मुस्लिम शायर, अफजल मंगलौरी के इस शेर की तरह सदा से शीर-ओ-शकर की भांति रहते चले आए हैं:
“मुझ को सुकून मिलता है मेरी आजान से,यह देश सुरक्षित है अपनी गीता के ज्ञान से!

Team Desk