आखिर कब तक…

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देश के विभिन्न भागों से कभी बेटियों की इज्जत लूटने तो कभी उनके शोषण की खबर आती है। हर बार सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलैक्ट्रोनिक ​मीडिया में 2-3 दिन तूफान आता है

देश के विभिन्न भागों से कभी बेटियों की इज्जत लूटने तो कभी उनके शोषण की खबर आती है। हर बार सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलैक्ट्रोनिक ​मीडिया में 2-3 दिन तूफान आता है, फिर समय के साथ सब थम जाता है। आखिर में वह परिवार अकेला रह जाता ​है जिसकी बेटी के साथ हादसा होता है। बाकी सभी अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त हो जाते हैं, क्योंकि हर कोई अपनी समस्याओं से जूझ रहा है।
परन्तु पिछले दिनों हरियाणा में जो  घटनाएं सामने आईं, उन्होंने सबका दिल दहला दिया। एक तो हैवानियत को भी शर्मसार कर गई कि वैंटीलेटर  पर पड़ी लड़की के साथ 6 दिन तक बलात्कार होता रहा। इस घटना को कौन अंजाम दे रहा था यह तो सामने आ ही जाएगा, परन्तु यह सब अकेला आदमी नहीं कर सकता, जरूर कुछ लोगों की मिलीभगत से हो रहा होगा। वाक्या ही इस घटना से इंसानियत शर्मिंदा है। दूसरी घटना में दिन-दहाड़े एक लड़की को लव जिहाद के नाम पर मार दिया गया। ​कितने हौंसले बढ़ते जा रहे हैं इन लोगों के। पिछले दिनों जालंधर से प्रमुख समाजसेवी महिलाओं का मुझे फोन आया और पत्र भी उन्होंने भेजा कि कैसे एक संस्था, जिस पर लोगों को अंधविश्वास है, लोगों का धर्म परिवर्तन कर रही है और हर गलत काम वहां हो रहा है। 
सच पूछो तो सारा देश मेरा है, देश में रहने वाली किसी भी नारी के साथ अन्याय और ज्याद​ती चिंता का विषय है। जहां हम देश को विश्व गुरु बनाने की ओर जा रहे हैं, सारी दुनिया भारत का लोहा मान रही है। जहां हमारे देश के प्रधानमंत्री ने भारत का नाम ऊंचा किया है, हम विदेशों में जाकर गर्व से बताते हैं कि हम भारतीय हैं वहीं दूसरी ओर कुछ गंदे नीच लोग अपनी हवस, भूख आैर पैसा कमाने के लालच में अपने देश की बहू-बेटियों की इज्जत नीलाम करने पर उतारू हैं, उन्हें बेटियां भोग की वस्तु ही नजर आती हैं।
मुझे हरियाणा और पंजाब से खास लगाव है क्योंकि मैं पंजाब में जन्मी-पली, पढ़ी हूं। विशेषकर जालंधर जहां मैं पढ़ी भी, ब्याही भी गई और हरियाणा जो मेरे पति की कर्मस्थली है, जहां मैंने अपने पति के साथ मिलकर महिलाओं के लिए बहुत काम ​किया, वहां की महिलाओं को समझा और वहां के हालात को भी समझा।
पंजाब के सीएम मेरे पति के बहुत अच्छे मित्र रहे और हरियाणा के सीएम भी मेरे पति के बहुत अच्छे मित्र और सहयोगी रहे। दोनों ने पंजाबियों की आवाज उठाई, परन्तु जब काम करने का समय आया तो सभी जातियों और वर्गों के लिए काम किया। यानी दोनों प्रदेशों के राजा यानी सीएम अनुभवी और कर्मयोगी हैं परन्तु यह स्थिति उनके लिए भी कठिन हो जाती है क्योंकि यह सही है कि हर लड़की के पीछे सिक्योरिटी नहीं हो सकती। यह तो समाज और शहर, राज्य के लोग हैं जो इन घटनाओं को अंजाम होने से पहले रोक सकते हैं। हरियाणा की महिलाएं हों या पंजाब की, बहुत ही कर्मठ एवं संस्कारों वाली हैं। काम करना जानती हैं, मर्यादाओं को निभाना जानती हैं परन्तु फिर भी आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रही हैं और वो भी ऐसी कि जो भी सुने शर्मसार हो जाए।
इसी तरह यूपी के लखनऊ, फिरोजाबाद, मुरादाबाद और नोएडा के अनेक हिस्सों में और 24 घंटे पहले पुणे में एक लड़की से बलात्कार की खबर मिली। हर बार की तरह बलात्कारी भाग निकले। हर बार पुलिस का वही जवाब कि बलात्कारी बख्शे नहीं जाएंगे। इसलिए लोग सोशल मीडिया पर कहने लगे हैं कि पुलिस और प्रशासन से भरोसा उठ रहा है। हैदराबाद की महिला डाक्टर के रेपिस्ट हों या फिर बिकरू कांड का गुनहगार या उसके साथी लोग, उनके एनकाउंटर करने वाले पुलिस कर्मचारियों का फूलों के हार से स्वागत करती है। इसलिए अब समय आ गया है कि  हरियाणा हो या पंजाब या दिल्ली, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर बेटी की रक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
पुलिस, सरकार, समाज और घर के व्यक्ति या रिश्तेदारों को बेटियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा, क्योंकि बेटी है तो घर है, समाज है, शहर है, गांव है, देश है। बेटी मजबूत है तो आने वाले देश का भविष्य मजबूत होगा। यह तभी होगा जब अपराधी बच न पाएं। उसको वैसी ही सजा उसी समय मिल जाए जब उसने अपराध ​किया हो। हमें कड़े कदम उठाने होंगे अगर बेटियों को बचाना चाहते हैं। अभी भी अधिकतर लोगों की सोच और मानसिकता बेटियों के प्रति छोटी और गलत है। सिर्फ रेप या मर्डर ही नहीं अधिकतर लोग ऐसे भी हैं जो अपने घरों की बहू-बेटियों को आगे नहीं बढ़ने देते हैं। कदम-कदम पर उन्हें अहसास कराते हैं तुम लड़की हो, इसलिए कमजोर हो, ​पीछे रहो। कोई लड़कियों का आंखों से शोषण करता है, कोई उसका हक मार कर करता है, परन्तु सब भूल रहे हैं कि यह देवी भी है और दुर्गा भी। अब समय आ रहा है कि लड़कियां, बेटियां दुर्गा का रूप धारण करेंगी।

Kiran Chopra

कब तक…

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आज मोदी जी के कारण हमारे देश की छवि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत ऊंचाइयों पर है। जहां हमेशा भारत की छवि सपेरों का देश या गरीबों का देश के रूप में दिखाई जाती थी, आज विकासशील देश की छवि उभरकर आ रही है जिससे भारतीय होने पर गर्व महसूस होता है और विदेशों में रह रहे भारतीयों का सीना भी गर्व से ऊंचा होता है परन्तु दूसरी तरफ हमारे देश के अन्दर जो हालात बन रहे हैं, आये दिन कश्मीर में जवान मारे जा रहे हैं, उन जवानों की मांओं के कौन आंसू पौंछेगा, उन शहीदों की पत्नियों का कौन सहारा बनेगा, उनके अनाथ बच्चों को कौन पूछेगा। एक मां होने के नाते दिल चीर-चीर हो जाता है। खून के आंसू निकलते हैं जब अपने ही देश में अपनों के हाथों (मुझे नहीं मालूम इन्हें अपना कहूं या नहीं) जवान मारे जाते हैं। कश्मीर से मुझे ही क्या, सारे भारतवासियों को बहुत लगाव है। मैं शादी के तुरन्त बाद अश्विनी जी के साथ कश्मीर गई थी। उस समय हमारे अखबार के एजेंट अब्दुल्ला जी और उनके परिवार का स्वागत, उनका स्नेह, उनका भोजन, उनकी बेटियों से मिलना और उनके गिफ्ट-भेंटें कश्मीरी फिरिन अभी तक मेरे पास हैं।

मैं कभी नहीं भूलती और दूसरी तरफ हमारे संवाददाता मि. कौल और उनकी पत्नी का स्वागत, उनकी भेंट कानों के कश्मीरी झुमके मेरे पास हैं। तब कोई फर्क भी नहीं था, शांति थी। दूसरी बार मैं अश्विनी जी, उनकी माता, भाई, पिता अमर शहीद रोमेश चन्द्र जी के साथ अमरनाथ यात्रा के लिए गई थी तब फारूक अब्दुल्ला जी ने अपने घर पर लंच के लिए बुलाया था। कहने का भाव है कि न तो कोई फर्क था, शांति थी, टूरिज्म बहुत था। डल लेक, गुलमर्ग, खिलनमर्ग, पहलगाम की यादें ताजी हैं। परन्तु थोड़े समय बाद कश्मीरी पंडितों को वहां से निकाला गया। मैं क्योंकि पंडितों की बेटी हूं। मुझे बहुत पीड़ा हुई। अभी भी दिल में गहरा जख्म है। अपने ही देश में यह क्या है, कैसी विडम्बना है। अभी दो रोज पहले जब शब-ए-कद्र की मुबारक रात को पूरी दुनिया में मुस्लिम अपने गुनाहों से तौबा करते हुए खुदा की इबादत में डूबे हुए थे, उस समय श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद के बाहर अलगाववादियों की समर्थक भीड़ ने जम्मू-कश्मीर के एक ईमानदार, कर्मठ पुलिस उपाधीक्षक डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित को पीट-पीटकर नंगा कर मार डाला। ये कैसे अलगाववादी लोग हैं जिनसे आज हैवानियत भी शर्मसार है। इन्सानियत भी शर्मिन्दा है। ऐसे लोगों को जन्म देने वाली माताएं भी शर्मिन्दा हैं जिनमें न दिल है न दिमाग। मैं अक्सर कहती हूं कि कोई भी अलगाववादी अपनी मां के पेट से पैदा नहीं होता, उसे हालात बनाते हैं जिसमें सबसे बड़ा कारण बेरोजगारी है परन्तु अब सोचती हूं ये लोग बिना दिल और दिमाग के पैदा हुए हैं जिन्हें कोई भी चन्द पैसों में खरीद कर अपने ही भाइयों को मरवा देता है।
सोते-सोते डर से नींद खुल जाती है।

उन मांओं, बच्चों, पत्नियों का दिल को हिला देने वाला रूदन (रोना), न थमने वाले आंसू बेचैन कर देते हैं। आखिर कब तक यह चलेगा। यही नहीं सेना के जवान संदीप जाधव ने अपने बेटे से वादा किया था कि वह उसके जन्मदिन पर घर जरूर आएंगे लेकिन किसी को नहीं मालूम था कि यह जवान देश के लिए शहीद होकर तिरंगे में लिपट कर घर पहुंचेगा। यह एक सैनिक या सिपाही या डीएसपी की हत्या नहीं होती बल्कि उनके पूरे परिवार की हत्या होती है, कौन पूछेगा उन्हें? थोड़े दिन तो सब श्रद्धांजलि देने आएंगे, सांत्वना भी देंगे परन्तु पूरी पहाड़ जैसी जिन्दगी कैसे कटेगी। आखिर में मैं अपने मजबूत सशक्त प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री और गृहमंत्री से पूछूंगी कि आखिर कब तक चलेगा यह। क्यों हम अपने देश में दुश्मनों को पनपने दे रहे हैं। क्या इन मांओं की चीखें, विलाप आपको नहीं हिलातीं, क्या आपके सीने में दिल इनके लिए नहीं रोता क्योंकि हमने यह पीड़ाएं सही हैं। बिन बाप के जिन्दगी काटना बहुत मुश्किल है। प्रधानमंत्री जी, कुछ तो करो क्योंकि सारे देश को, मुझको और खासकर देश के युवाओं को आपसे बड़ी उम्मीदें, आशाएं हैं। अगर आप कुछ न कर सके तो शायद आने वाला कोई भी शख्स कुछ नहीं कर सकेगा क्योंकि आप जमीन से जुड़े प्रधानमंत्री हो, आप देश का भूगोल-इतिहास अच्छी तरह से जानते हो। जब मैं लोकसभा चुनावों में गांव-गांव घूम रही थी तो देश के हर जवान, बूढ़े और महिलाओं के चेहरे पर एक आशा की किरण देखी थी जो सिर्फ मोदी जी के नाम की थी और आज हर शहीद की पत्नी, मां, बहन, बेटी आपसे उम्मीद रखती हैं कि या तो यह सब ठीक हो जाए या हमारे देश में रह रहे

दुश्मन भाग जाएं और हम सब फख्र से कह सकें :
अब किसी मां की कोख न उजड़े, अब वतन आजाद है
अब किसी का सुहाग न उजड़े, अब वतन आजाद है
अब किसी के सर से बाप का साया न उजड़े, अब वतन आजाद है
अब कोई घर न उजड़े, अब हमारा प्रधानमंत्री मोदी है।

Desk Team