अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बेहद विरोधाभासी व्यक्तित्व के रूप में देखा जाता है। आलोचक और विश्लेषक उन्हें गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला अस्थिर व्यक्ति मानते हैं क्योंकि उनके बयान, नीतियां और कार्य समय के साथ या एक ही समय में एक-दूसरे के विपरीत नजर आते हैं। भारत के संदर्भ में भी ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को सच्चा दोस्त कहा तो कभी भारी-भरकम टैरिफ लगा दिया। ट्रंप ने नाटो, यूरोपीय संघ, चीन, रूस, सीरिया के प्रति भी बार-बार रुख बदला है। ट्रंप खुद को आम जनता का प्रतिनिधि बताते हैं लेकिन उनकी नीतियां अक्सर अरबपतियों को फायदा पहुंचाने वाली होती हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का अब एक नया पाखंड सामने आया है। अमेरिका ने भारत को ‘गाजा पीस बोर्ड’ में शामिल होने का न्यौता दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर आमंत्रित किया है। गाजा पीस बोर्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी योजना है। इसका मकसद युद्ध के बाद गाजा में शासन और वहां हो रहे रिडेवलपमेंट की देखरेख करना है। गाजा के लिए ट्रंप ने 16 जनवरी को पीस ऑफ बोर्ड का ऐलान किया था। इसमें 20 बिंदुओं में शांति स्थापित करने का प्लान रखा है। इसे भविष्य में ग्लोबल झगड़ों को सुलझाने के लिए एक मैकेनिज्म के तौर पर देखा जा रहा है। यह न्यौते 60 देशों को भेजे गए हैं। इसमें यूरोप के देश भी शामिल हैं।
पहले गाजापट्टी में विध्वंस करने वाले इजराइल को खुली छूट देने और अब गाजा में शांति स्थापित करने की योजना बड़ी हास्यास्पद लगती है। हैरानी की बात तो यह है कि ट्रंप ने गाजा में शांति और सुरक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी आमंत्रित किया है। अमेरिका के इस कदम से इजराइल के प्रधानमंत्री बेजामिन नेतन्याहू परेशान हैं क्योंकि पाकिस्तान खुलेआम हमास का समर्थन करता है और शुरू से ही इजराइल का विरोध करता आया है। पाकिस्तान के अलावा ट्रंप ने तुर्की को भी आमंत्रित किया है जिससे इजराइल चिंतित हो उठा है। हमास ट्रंप के शांति योजना का विरोध कर रहा है। उसका कहना है कि यह योजना उसे पूरी तरह से निहत्था करने की साजिश है।
ट्रंप की योजना के मुताबिक अगर कोई देश शांति बोर्ड का तीन साल से ज्यादा समय तक सदस्य बनना चाहता है तो उन्हें एक बिलियन डॉलर कैश देने होंगे। एक तरफ शांति की बातें तो दूसरी तरफ डेनमार्क के ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकियां किसी को रास नहीं आ रही। ट्रंप का टैरिफ कार्ड अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है, क्योंकि यूरोप ने भी अपने सबसे शक्तिशाली हथियार ट्रेड बाजूका को चलाने की तैयारी कर ली है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड का समर्थन करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर एक फरवरी से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप की इस जबरन वसूली की कूटनीति ने दशकों पुराने नाटो गठबंधन की नींव हिला दी है।
यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील राेक दी है और ट्रंप के टैरिफ का मुकाबला करने के लिए 93 अरब यूरो के जवाबी टैरिफ की योजना बनाई है। अगर यूरोपीय संघ के देश 93 अरब यूरो के जवाबी टैरिफ लगाते हैं तो इससे अमेरिका हिल जाएगा। यह राशि इतनी विशाल है कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों, जैसे कृषि, ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी सैक्टर को हिलाकर रख सकती है। यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि यदि ट्रंप व्यापार नियमों का उल्लंघन करते हैं तो यूरोप के पास अपनी अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए समान स्तर की कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। यह जवाबी कार्रवाई विशेष रूप से उन राज्यों को निशाना बना सकती है जो ट्रंप के राजनीतिक आधार (वोट बैंक) माने जाते हैं।
यूरोपीय संघ के पास एक ऐसा विध्वंसक आर्थिक हथियार है जिसे ‘एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट’ या व्यापारिक भाषा में ‘ट्रेड बाजूका’ कहा जाता है। यह मूल रूप से चीन जैसे देशों के आर्थिक दबाव से निपटने के लिए बनाया गया था लेकिन ट्रंप के अड़ियल रुख ने यूरोप को इसे अमेरिका के खिलाफ इस्तेमाल करने पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। इसके तहत कई तरह से अमेरिका पर वार किए जा सकते हैं। अगर अमेरिकी कम्पनियों के लिए यूरोपीय संघ के विशाल बाजार में व्यापार करना मुश्किल हुआ तो अमेरिका वैश्विक मंच पर अलग-थलग पड़ जाएगा। ट्रंप को शायद इस बात का अहसास नहीं कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बोर्ड कोई प्रोपर्टी डील नहीं िजसे धमका कर लिया जा सके। ट्रंप के दोहरे मापदंड वाली नीतियों की आलोचना और ग्रीनलैंड पर कब्जे की योजना का विरोध अमेरिका के भीतर भी होने लगा है।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिका में उन पर मुकदमे ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी लेकिन इस कार्रवाई के साथ ही एक गहरा विवाद भी खड़ा हो गया है। विपक्षी नेता इसे डोनाल्ड ट्रंप का ‘दोहरा मापदंड’ और ‘पाखंड’ बता रहे हैं। इस विवाद की जड़ में है होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नाडेज की कहानी। हर्नांडेज और मादुरो, दोनों पर एक ही जैसे आरोप लगाए गए। हर्नांडेज को 400 टन कोकीन की तस्करी और ड्रग तस्कर से रिश्वत लेने के आरोप में 45 साल की सजा हुई थी लेकिन ट्रंप ने उन्हें माफ कर दिया।
अब विरोधाभास यह है कि जिस ड्रग तस्करी के अपराध के लिए ट्रंप ने हर्नांडेज को ‘बेगुनाह’ मानकर रिहा किया, उसी अपराध के लिए मादुरो को आधी रात को उनके घर से उठाकर न्यूयॉर्क लाया गया है। एक आदमी को माफी और दूसरे को हथकड़ी, यह कहां का न्याय है। स्विट्जरलैंड के दावोस में होने जा रही वर्ल्ड इकोनोमिक फोर्म व्यापार युद्ध का अखाड़ा बनने जा रही है। यूरोपीय संघ के नेता और ट्रंप आमने-सामने होंगे। ट्रंप के कदम कई अंतर्राष्ट्रीय समझौते के खिलाफ हैं। ट्रंप के जंगलराज में कौन रहना चाहेगा। देखना होगा कि यह टकराव क्या रंग दिखाता है।


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