स्टार प्लस के फेमस टीवी शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के 2 सितंबर 2026 वाले एपिसोड में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ (ट्विस्ट) आने वाला है। जिस सच को छुपाने के लिए तुलसी ने अब तक इतनी बड़ी कुर्बानी दी थी, आखिरकार वो राज अब सबके सामने आने की दहलीज पर है।
शांतिनिकेतन में ड्रामे की कोई कमी नहीं है, लेकिन आज के एपिसोड ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए। एक तरफ जहां नंदिनी के कबूलनामे से करन के पैरों तले जमीन खिसक गई, वहीं दूसरी तरफ अंबा भवन के पुराने कागजातों ने एक नई पहेली खड़ी कर दी है।
तुलसी और नंदिनी के बीच हुई बहस, तृप्ति के ब्लैकमेल का खुला भेद

एपिसोड की शुरुआत होती है नंदिनी और तुलसी के बीच की जोरदार बातचीत से। नंदिनी सीधे तुलसी के पास पहुंचती है और सवाल करती है कि वो तृप्ति का बचाव क्यों कर रही है। तब तुलसी मजबूर होकर नंदिनी को पूरा सच बताती है। तुलसी खुलासा करती है कि तृप्ति को यह बात पता चल चुकी है कि पार्थ की जान तुलसी ने नहीं, बल्कि खुद नंदिनी ने ली थी।
यह सुनकर नंदिनी के होश उड़ जाते हैं। तुलसी बताती है कि उसने केवल नंदिनी को बचाने के लिए पूरा इल्जाम अपने सिर लिया था। नंदिनी घबरा जाती है और तुलसी से कहती है कि अब इस सच को छुपाना मुमकिन नहीं है, हमें खुद ही सबको सच बता देना चाहिए। लेकिन तुलसी उसे रोकती है और वादा करती है कि वो जन्माष्टमी से पहले तृप्ति का काम तमाम कर देगी और परिवार की खुशियां छिनने नहीं देगी।
अंबा भवन की प्रॉपर्टी फाइल्स से सामने आई नई साजिश

इसी बीच, शांतिनिकेतन में एक और नया मोड़ आता है। दामिनी पुरानी फाइल्स नीचे ला रही होती है, तभी अचानक उसका पैर फिसल जाता है और वो गिर पड़ती है। तुलसी तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़ती है और जमीन पर बिखरे कागजातों को समेटने लगती है।
कागजों को समेटते वक्त तुलसी की नजर अंबा भवन से जुड़े एग्रीमेंट पेपर्स पर पड़ती है। यह वही प्रॉपर्टी थी जिसे पार्थ बेचना चाहता था। जब तुलसी उन पेपर्स को ध्यान से पढ़ती है, तो उसे कुछ बहुत ही गड़बड़ और शक वाला लगता है तुलसी को अहसास होता है कि इस एग्रीमेंट के पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है, जिसके बारे में उसे तुरंत नंदिनी से बात करनी होगी।
नंदिनी का करन के सामने कबूलनामा, सामने आया डरावना सच

इसके बाद एपिसोड में वो पल आता है जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था। नंदिनी अपनी हिम्मत जुटाती है और करन के सामने जाकर रोते हुए कहती है कि तुलसी निर्दोष है। करन हैरान रह जाता है और उससे सच बताने को कहता है। नंदिनी फूट-फूटकर रोते हुए मानती है कि अपने बेटे पार्थ का कत्ल उसने ही किया था, तुलसी ने सिर्फ उसे बचाने के लिए जेल का सफर तय किया।
हालांकि, यह पूरी घटना नंदिनी की एक डरावनी कल्पना (इमेजिनेशन) है, नंदिनी सोचती है कि अगर उसने करन को सच बता दिया, तो करन गुस्से में उसे घर से धक्के देकर निकाल देगा और उस पर यह आरोप लगाएगा कि उसने माँ का नाम खराब कर दिया, नंदिनी जब हड़बड़ाकर अपनी सोच से बाहर आती है, तो राहत की सांस लेती है कि अभी करन को यह सच पता नहीं चला है।
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