टीवी के पॉपुलर शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ (Kyunki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi 2) के रीसेंट एपिसोड में इमोशंस और सस्पेंस का ड्रामा देखने को मिला है। शो की कहानी अब ऐसे मोड़ पर आ गई है जहां हर एक किरदार की जिंदगी में उथल-पुथल मची हुई है। आइए जानते हैं कि इस एपिसोड में क्या-क्या खास हुआ और कैसे घर के हालात तेजी से बदल रहे हैं।
मिहिर का सीक्रेट मुंबई मिशन और मंदिरा से छुपाने की जुगत

कहानी की शुरुआत होती है शोभदा और जयेश से, जो मिहिर के अतीत के राज़ को टटोलने में लगे हैं। वे मिहिर के बारे में सब कुछ जानने के लिए मिस्टर हेरी से मिलते हैं और उनसे 10 साल पहले गायब हुए मिहिर का सच बाहर लाने के लिए कहते हैं। मिस्टर हेरी भी उनकी मदद के लिए तैयार हो जाते हैं।
दूसरी तरफ, मिहिर मिस्टर और मिसेज लालवानी से कहकर कुछ दिनों के लिए मुंबई जाने की बात कहता है। लालवानी दंपती उसे भगवान राम की एक मूर्ति देकर मुंबई में उसकी मरम्मत करवाने के लिए कहते हैं। मिहिर चुपचाप मुंबई पहुँच जाता है और अनुपम को अपनी सुरक्षित लैंडिंग की खबर देता है। अनुपम उसे सलाह देता है कि वह वहां बहुत संभलकर रहे और अपनी पहचान छुपाकर रखें। हालांकि, असली डर इस बात का है कि कहीं मंदिरा को मिहिर के इस सीक्रेट ट्रिप की भनक न लग जाए।
नंदिनी को घर छोड़ने से रोकेंगी तुलसी, परिवार की बिखेरेंगी हिम्मत

इधर शांति निकेतन (Shanti Niketan) में हालात कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं। घर के अंदर चल रही उथल-पुथल, सिड और समैरा की समस्याओं और करण के खुद से दूर होने के कारण नंदिनी खुद को इन सब चीजों का जिम्मेदार मानने लगती है। उसे लगता है कि उसका घर से चले जाना ही सबके लिए बेहतर होगा और वह जाने का फैसला कर लेती है।
लेकिन तभी तुलसी की नजर उस पर पड़ती है और वह नंदिनी पर भड़क जाती है। तुलसी उसे समझाती है कि मुश्किल समय में अपनी परेशानियों से भागना कोई समझदारी नहीं है। तुलसी साफ शब्दों में कहती है कि वह इस परिवार को बिखरने नहीं देगी और इस वक्त किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है। तुलसी का यह मजबूत रूप परिवार को बांधे रखने की एक और कोशिश है।
सिड और समैरा के बीच बढ़ा तनाव, करण का फूटा भयंकर गुस्सा

एपिसोड के अंत में ड्रामा और ज्यादा गहरा जाता है। तुलसी को पता चलता है कि सिड ने समैरा को चोट पहुंचाई है और उसे एक कमरे में बंद कर दिया है। यह सुनते ही करण का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। वह तुरंत अपनी बेटी को बचाने के लिए जाने की जिद करता है।
तुलसी उसे समझाने की कोशिश करती है कि पहले पुलिस को फोन करना चाहिए और स्थिति के बारे में ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए, लेकिन करण गुस्से में है और किसी की सुनने को तैयार नहीं है। एपिसोड यहीं खत्म होता है जहां तुलसी करण को समझाती है कि उसे नंदिनी और पार्थ की तरह बिना सोचे-समझे कोई भी जल्दबाजी भरा कदम उठाने से बचना चाहिए।
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