टीवी के फेमस सीरियल ‘सहेर होने को है’ का नया एपिसोड ड्रामे और भावनाओं से भरपूर रहने वाला है। शो में सहर एक बार फिर अपनी निडर छवि में नज़र आ रही है। समाज और परिवार की परवाह किए बिना सहर ने भरी सभा में एक ऐसा सच एक्सपोज़ कर दिया है, जिसे सुनकर वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। सहर ने साफ कहा कि किसी औरत की मर्जी के बिना उस पर हाथ उठाना या ज़बरदस्ती करना हैवानियत है।
औरतों के हक में शहर ने उठाई आवाज, कहा- ‘मर्जी के बिना हाथ लगाना हैवानियत है’
प्रोमो में दिख रहा है कि सहर ने बड़े-बड़े लोगों और मुफ्ती साहब के सामने बिना डरे अपनी बात रखी। वह कहती है कि जब कोई औरत अपना दर्द बयां करना चाहती है, तो लोग उस पर हया की चादर डालकर उसे चुप कराने की कोशिश करते हैं। शहर चीख-चीख कर कहती है कि औरत की मर्जी के बगैर उस पर हक जताना या जुल्म करना कोई शराफत नहीं बल्कि सीधे तौर पर हैवानियत है। बंद कमरे के राज और औरतों पर होने वाले अत्याचारों पर सहर का यह रूप देखकर सभी हैरान रह जाते हैं।
समाज के ठेकेदारों का फूटा गुस्सा, बोले- ‘लड़की को समाज से बाहर फेंको’

सहर की यह बात सुनकर वहां बैठे बड़े-बुजुर्ग और धर्मगुरु भड़क गए। लोग शहर पर ही सवाल उठाने लगते हैं कि उसने शर्म और हया की सारी हदें पार कर दी हैं। पुरानी सोच वाले लोग कहते हैं कि दो किताबें क्या पढ़ लीं, यह लड़की अपनी मर्यादा भूल गई है। कुछ लोग तो यहां तक कहने लगते हैं कि ऐसी बेबाक लड़की को इस समाज और ईमान वालों के बीच रहने का कोई अधिकार नहीं है और इसे फौरन बाहर फेंक देना चाहिए।
मुफ्ती साहब के सामने सच बोलने से पीछे नहीं हटी सहर

तमाम विरोध बातों के बावजूद सहर जरा भी नहीं डरती। जब लोग उसे चुप कराने की कोशिश करते हैं, तो वह पवित्र ग्रंथ सूरह निसा की आयतों का हवाला देती है। वह बताती है कि औरतों के साथ नेक सुलूक करने, उन्हें परेशान न करने और शराफत से जिंदगी गुजारने का हुक्म दिया गया है। जब उसे चुप रहने की सख्त हिदायत दी जाती है, तो शहर साफ कह देती है कि ‘खुदा के लिए तो हम चुप नहीं बैठ सकते।‘ सहर के इस सख्त तेवर ने कहानी को एक नया मोड़ दे दिया है।
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