नेटफ्लिक्स पर यशराज फिल्म्स की नई वेब सीरीज ‘अक्का’ स्ट्रीम हो चुकी है। इस सीरीज के जरिए साउथ सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश ने OTT की दुनिया में कदम रखा है। उनके साथ राधिका आप्टे भी मेन रोल में नजर आ रही हैं। इस सीरीज की कहानी एक ऐसी फिक्शनल दुनिया के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां सदियों से महिलाओं का शासन है। इसका शानदार सेट, कॉस्ट्यूम और कलाकारों की एक्टिंग काफी अट्रेक्टिव है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या दिलचस्प कॉन्सेप्ट के बावजूद कमजोर कहानी दर्शकों को बांधे रख पाती है या नहीं? आइए जानते हैं।
AKKA Review: क्या है ‘अक्का’ की कहानी?

‘अक्का’ की कहानी 1980 के दशक के फिक्शनल स्टेट पेरनुरु पर बेस्ड है। इस राज्य का इतिहास करीब 800 साल पुराना बताया गया है। वहीं यहां पर मान्यता है कि यहां के राजा और सभी पुरुष युद्ध के लिए गए थे, लेकिन कभी वापस नहीं लौटे। इसके बाद राज्य की रानी ने शासन की कमान संभाली और धीरे-धीरे यहां महिलाओं का वर्चस्व स्थापित हो गया। इस समाज में कारोबार से लेकर अपराध तक की दुनिया महिलाओं के कंट्रोल में है। वहीं परिवार की पहचान भी महिलाओं के नाम से होती है और यहां शादी की परंपरा को कोई खास महत्व नहीं दिया जाता।
इस सीरिज़ की कहानी में कीर्ति सुरेश भवानी का किरदार निभा रही हैं, जिन्हें अक्का के नाम से जाना जाता है। वह इस अनोखे समाज की अरेंजमेंट को संभालती हैं। लेकिन उसकी जिंदगी में तब नया मोड़ आता है, जब रुद्रा यानी राधिका आप्टे की एंट्री होती है। रुद्रा पेरनुरु पहुंचकर वहां के लड़कों को एकजुट करती है और महिलाओं के शासन को चुनौती देने लगती है। हालांकि सवाल यहां यही उठता है कि आखिर रुद्रा इस समाज से बदला क्यों लेना चाहती है, यही सीरीज की कहानी का मेन अट्रेक्शन है।
अनोखा कॉन्सेप्ट, लेकिन कहानी में नहीं है दम

सीरीज का सबसे दिलचस्प पहलू इसका कॉन्सेप्ट है। आमतौर पर फिल्मों और सीरीज में पुरुष प्रधान समाज दिखाया जाता है, लेकिन ‘अक्का’ में पूरी अरेंजमेंट्स महिलाओं के हाथों में दिखाई गई है। शुरुआत में पेरनुरु की दुनिया और वहां के रहन-सहन को जिस तरह पेश किया गया है, वह काफी प्रभावशाली लगता है। हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसकी कमजोरियां सामने आने लगती हैं। कई घटनाएं ऐसी हैं, जिनका तर्क समझना मुश्किल हो जाता है।
करीब 800 साल से स्थापित समाज की सत्ता को रुद्रा इतनी आसानी से चुनौती दे देती है कि कहानी थोड़ी इन्क्रेडिबल लगने लगती है। इसके अलावा कुछ किरदारों और उनके आपसी रिश्तों को समझने में भी परेशानी होती है। कमजोर स्क्रीनप्ले और बिखरी हुई कहानी की वजह से सीरीज दर्शकों को उस तरह बांधकर नहीं रख पाती, जैसी उम्मीद इसके कॉन्सेप्ट से होती है।
शानदार लोकेशन और कॉस्ट्यूम ने जीता दिल

अगर ‘अक्का’ के सबसे मजबूत पहलू बात की जाए, तो इसका विजुअल प्रेजेंटेशन सबसे पहले सामने आता है। सीरीज में इस्तेमाल की गई सिल्क की साड़ियां, पारंपरिक गहने और खूबसूरत लोकेशन कहानी को एक अलग ही अंदाज देते हैं। राधिका आप्टे का 80 के दशक वाला ग्लैमरस लुक भी काफी अट्रेक्टिव है। इसके अलावा बैकग्राउंड म्यूजिक और डायलॉग भी कहानी के माहौल को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। तकनीकी और विजुअल लेवल पर सीरीज ने अच्छा काम किया है।
देखनी चाहिए या नहीं?

अगर आपको वुमेन प्रधान कहानियां और लीक से हटकर बने कॉन्सेप्ट पसंद हैं, तो ‘अक्का’ को एक बार देखा जा सकता है। कीर्ति सुरेश और राधिका आप्टे की एक्टिंग सीरीज की खासियत है। दोनों कलाकारों ने अपने किरदारों को बेहद ही प्रभावशाली बनाने की कोशिश करी है। हालांकि, कमजोर राइटिंग और कहानी में कई जगह आने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से यह सीरीज पूरी तरह इफेक्टिंव नहीं हो पाती। ऐसे में शानदार कलाकारों और बेहतरीन सेट के बावजूद एंटरटेंमेंट के मामले में ‘अक्का’ थोड़ी पीछे रह जाती है।
रेटिंग: 2/5
सीरीज: अक्का
निर्देशक: धर्मराज शेट्टी
कलाकार: कीर्ति सुरेश, राधिका आप्टे, तन्वी आजमी और अंशुमान पुष्कर
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स


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