Chaitra Amavasya 2026 Vrat Katha in Hindi: चैत्र अमावस्या की पौराणिक कथा

चैत्र अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, पुराने समय में एक राजा और रानी थे। रानी बहुत पूजा-पाठ करती थी। महल के सामने रहने वाली एक साहूकारनी उसकी पक्की सहेली थी। एक दिन साहूकारनी के रोने की आवाज़ सुनकर रानी ने राजा से इसका कारण पूछा। राजा ने बताया कि उसका बेटा मर गया है, इसलिए वह दुखी है। रानी ने आज तक कभी दुख देखा ही नहीं था, तो उसने पूछा कि “दुख क्या होता है?” राजा ने कहा कि जब तुम्हारा खुद का बेटा मरेगा, तब तुम्हें समझ आएगा। रानी ने तुरंत अपने बेटे को ऊपर से नीचे फेंक दिया, लेकिन भगवान की कृपा से उसे खरोंच तक नहीं आई।
रानी ने फिर वही सवाल किया, तो राजा ने कहा कि जब मैं अकेले युद्ध पर जाऊंगा और तुम मेरे मरने की खबर सुनोगी, तब तुम्हें दुख का पता चलेगा। लेकिन रानी हमेशा अमावस्या का व्रत रखती थी, इसलिए उस व्रत के असर से राजा युद्ध जीतकर सुरक्षित घर लौट आए। राजा ने हार नहीं मानी और कहा कि जब हम गंगा किनारे जाएंगे और मैं नदी में कूद जाऊंगा, तब तुम्हें दुख होगा। वहीं दूसरी तरफ, भगवान शिव और माता पार्वती यह सब देख रहे थे। शिवजी ने पार्वती जी से कहा कि चलो मैं तुम्हें एक ऐसी आत्मा के दर्शन कराता हूं जिसे कोई दुख छू ही नहीं सकता।

भगवान शिव और माता पार्वती ने बकरी और बकरे का रूप लिया और एक बावड़ी के पास घास चरने लगे। राजा-रानी जब वहां आराम करने रुके, तो रानी ने उनकी बातें सुन लीं। शिवजी कह रहे थे कि रानी ने हमेशा अमावस्या का व्रत किया है, इसलिए इस जन्म में उसे कोई भी दुख नहीं मिल सकता। रानी को सारा सच समझ आ गया और उसने राजा को भी यह बात बताई। तभी से यह माना जाता है कि अमावस्या का व्रत रखने से इंसान के सारे संकट कट जाते हैं।
Disclaimer: यहां बताई गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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