Gangaur Vrat 2026: 16 दिनों का गणगौर पर्व

गणगौर का त्योहार होली के अगले दिन शुरू होता है और पूरे 16 दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान महिलाएं रोज़ाना माता गणगौर की पूजा करती हैं। घर में मिट्टी या लकड़ी की मूर्तियां (ईसर-गौरी) रखकर उन्हें सजाया जाता है। महिलाएं सजती-संवरती हैं, मेहंदी लगाती हैं और लोकगीत गाती हैं। कई जगहों पर महिलाएं सिर पर कलश रखकर जुलूस भी निकालती हैं।
इस त्योहार पर महिलाएं और लड़कियां लहंगा-चोली और ओढ़नी जैसे पारंपरिक कपड़े पहनती हैं। वे चूड़ियां और बोरला पहनकर पूरा सोलह श्रृंगार करती हैं। हर तरफ लोकगीत और नृत्य की धूम होती है, जिससे यह त्यौहार और भी उत्साह से भर उठता है।
Gangaur Vrat ka Mahatva: क्यों मनाया जाता है यह त्यौहार?
शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी के लिए में माता गौरी की पूजा करती हैं। इसमें भगवान शिव (ईसर) और माता पार्वती (गौरी) की पूजा होती है, जो सुखद वैवाहिक जीवन और प्रेम का प्रतीक माने जाते हैं।
Gangaur Vrat Story: गणगौर की पौराणिक कहानी
कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कड़ी तपस्या की थी। उनकी भक्ति से खुश होकर शिव जी ने उन्हें अपना लिया। ‘गण’ का अर्थ है शिव और ‘गौर’ का अर्थ है पार्वती। उन्हीं के अटूट प्रेम और मिलन की याद में यह त्योहार मनाया जाता है।




















