Kushmanda Mata Ki Katha: मां कुष्मांडा की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने सृष्टि की रचना का संकल्प लिया। उस समय पूरे ब्राह्मण घना अंधकार छाया हुआ था। पूरी सृष्टि में एकांत और शांती पसरी हुई थी। न कोई संगीत, न कोई ध्वनि, केवल एक गहरा सन्नाटा था। सृष्टि को ऐसा देखकर तीनों त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा से सहायता मांगी।
इसके बाद मां दुर्गा अपने चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा के रूप में अवतरित हुई और मां ने तुरंत ही ब्रह्मांड की रचना की। ऐसा कहा जाता है कि मां कुष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से सृष्टि का निर्माण किया। मां के चेहरे पर फैली मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड प्रकाशमय हो गया। इस प्रकार अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने के कारण जगत जननी आदिशक्ति को मां कुष्मांडा के नाम से जाना जाता है। मां की महिमा अद्वितीय है।
मां का निवास स्थान सूर्य लोक है। शास्त्रों की मानें तो ऐसा कहा जाता है कि मां कुष्मांडा सूर्य लोक में निवास करती हैं। ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली मां कुष्मांडा के मुखमंडल पर जो तेज है, वही सूर्य को प्रकाशवान बनाता है। मां सूर्य लोक के भीतर और बाहर हर स्थान पर निवास करने की क्षमता रखती हैं।























