हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत अधिक महत्व माना गया है। इनमें से परमा एकादशी का व्रत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो अधिक मास (मैल मास या पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। ये व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। माना जाता है कि इस व्रत को रखने से जीवन से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है। ऐसे में आइए जानते हैं, Parama Ekadashi Vrat Mei Kya Khaye और व्रत खोलने का नियम क्या है।
Parama Ekadashi Vrat Mei Kya Khaye: परमा एकादशी व्रत में क्या खाएं?

- एकादशी व्रत के दौरान आप साबूदाना की खिचड़ी या खीर खा सकते हैं।
- इस दिन आप कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजों का सेवन भी कर सकते हैं।
- आप हर तरह के ताजे फल और मेवे का सेवन भी कर सकते हैं।
- दूध, दही, लस्सी और घर का बना मावा।
- व्रत के खाने में केवल सेंधा नमक और काली मिर्च का ही इस्तेमाल करें।
Parama Ekadashi Vrat Kholne ka Samay: व्रत खोलने का समय

- परमा एकादशी व्रत खोलने का सबसे सही समय सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने के बाद होता है।
- इस व्रत को खोलने से पहले ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन के साथ दान करना बेहद शुभ माना जाता है।
- इसके बाद तुलसी के पत्ते और चरणामृत लेकर अपना व्रत खोलना चाहिए।
Parama Ekadashi Vrat Katha: परमा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में काम्पिल्य नगरी में सुमेधा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी का नाम पवित्रा था, जो बहुत ही पतिव्रता और धार्मिक महिला थी। सुमेधा बहुत गरीब था, जिसके कारण वे दोनों हमेशा भूखे ही रहते थे, लेकिन फिर भी वे आए हुए मेहमान का स्वागत जरूर करते थे।
एक दिन अपनी गरीबी से तंग आकर ब्राह्मण ने परदेश जाने का विचार बनाया। तब उसकी पत्नी ने कहा कि धन और सुख-दुख पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार ही मिलते हैं, इसलिए यहीं रहकर ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए।
कुछ समय बाद उनके घर महर्षि कौंडिन्य आए। ब्राह्मण के परिवार वालों ने उनकी बहुत सेवा की। सुमेधा ने महर्षि से अपनी दरिद्रता दूर करने का उपाय पूछा। तब महर्षि कौंडिन्य ने उन्हें अधिक मास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी और इसके नियम भी बताए।
महर्षि ने जैसा कहा था उसी के अनुसार अनुसार सुमेधा और पवित्रा ने पूरी श्रद्धा के साथ परमा एकादशी का व्रत रखा। व्रत पूरा होने पर उनके घर में एक राजकुमार आया और उसने उन्हें रहने के लिए एक सुंदर घर, गाय और जीवनभर के लिए बहुत सारा धन दिया। इस व्रत के प्रभाव से ब्राह्मण परिवार की गरीबी हमेशा के लिए दूर हो गई और आख्रिरी में उन्हें विष्णु लोक की प्राप्ति हुई।



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