Sakat Chauth 2026 Vrat Katha: सकट चौथ की पौराणिक कथा

एक समय की बात है, एक नगर में दो देवरानी-जेठानी रहती थीं। जेठानी बहुत धनवान और अहंकारी थी, जबकि देवरानी निर्धन परंतु परम गणेश भक्त थी। देवरानी अपना जीवन यापन करने के लिए जेठानी के घर के कामकाज करती थी और उसका पति जंगल से लकड़ियां काटकर लाता था।माघ मास की सकट चौथ आई। देवरानी ने पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखा। सामर्थ्य न होने के कारण उसने थोड़े से तिल और गुड़ से तिलकुट्टा बनाया, पूजा की और कथा सुनी। वह इस आस में जेठानी के घर काम करने गई कि रात को वहां से मिलने वाले भोजन और अपने तिलकुट्टे से व्रत का पारण करेगी।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शाम को जब जेठानी के घर खाना बना, तो जेठानी ने यह कहकर उसे भोजन देने से मना कर दिया कि “अभी किसी ने खाया नहीं है, तुम सुबह बचा-कुचा ले जाना।” देवरानी खाली हाथ घर लौटी। घर पर भूखे बच्चे और थका-हारा पति आस लगाए बैठे थे। जब उन्हें पता चला कि आज भोजन नहीं मिलेगा, तो घर में उदासी छा गई। पति नराज हुआ और बच्चे रोते हुए सो गए।
दुखी देवरानी गणेश जी को याद करते हुए केवल जल पीकर सो गई। आधी रात को सकट माता एक वृद्ध महिला का रूप धरकर उसके सपने में आईं। माता ने भूख लगने की बात कही, तो देवरानी ने बड़े भाव से पूजा का बचा हुआ तिलकुट्ट अर्पित कर दिया। थोड़ी देर बाद सकट माता ने देवरानी से शौच के लिए स्थान पूछा। देवरानी ने कहा माता से कहा कि वे जहां उचित समझें वहीं बैठ जाएं। सकट माता ने पूरे घर में शौच कर दिया। माता ने जब गंदगी साफ करने का स्थान पूछा, तो देवरानी ने अपनी साड़ी का आंचल ही आगे कर दिया।
अगली सुबह जब देवरानी की आंख खुली, तो वह दंग रह गई। उसकी टूटी झोपड़ी अब सोने-चांदी और कीमती हीरों के महल में बदल चुकी थी और कोना-कोना हीरे-मोतियों से चमक रहा था।जब देवरानी काम पर नहीं गई, तो जेठानी खुद उसके घर पहुंची। वहां का वैभव देखकर वह ईर्ष्या से भर गई। देवरानी ने पूरी घटना सुना दी। धन के लोभ में जेठानी ने भी अगले वर्ष वैसा ही स्वांग रचा। उसने भी सकट माता का व्रत किया, लेकिन उसके मन में भक्ति नहीं, लालच था।
जब माता उसके सपने में आईं, तो जेठानी ने उन्हें पकवान खाने और आलीशान महल का उपयोग करने को कहा। उसे लगा कि ऐसा करने से उसे और अधिक धन मिलेगा। परंतु सुबह उठते ही उसने देखा कि उसका पूरा महल गंदगी और दुर्गंध से भर गया है। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने समझा कि ईश्वर दिखावे से नहीं, बल्कि सच्चे भाव और सरलता से प्रसन्न होते हैं।
इस कहानी से यह सीख मिलती है कि भगवान गणेश केवल सच्चे मन की श्रद्धा देखते हैं, धन-दौलत या दिखावा नहीं।
Sakat Chauth 2026 Vrat Niyam: सकट चौथ व्रत नियम

- सकट चौथ व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद हाथ में फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें और उन्हें गणेश जी को अर्पित करें।
- इसके बाद पूजा स्थल पर गुड़-तिल के लड्डू, शकरकंद, धूप, चंदन, फल और तांबे के लोटे में जल रखें।
- मां दुर्गा की प्रतिमा भी स्थापित करें।
- शाम की पूजा से पहले एक बार फिर से स्नान करें।
- गणेश जी के सामने घी का दीपक जलाएं, तिलक करें और मंत्रों का जाप करें।
- अब श्रद्धापूर्वक सकट चौथ की कथा सुनें और अंत में भगवान गणेश की आरती उतारकर उन्हें भोग लगाएं।
- रात में चंद्रमा के निकलने पर उन्हें अर्घ्य दें और पूजा करें। इसके बाद, जल ग्रहण करें और अपना उपवास खोलें।
Sakat Chauth 2026 Puja Samagri: सकट चौथ पूजन सामग्री

- गणेश जी की प्रतिमा
- लाल फूल
- 21 गांठ दूर्वा (घास)
- जनेऊ
- सुपारी पान का पत्ता
- सकट चौथ की पूजा के लिए लकड़ी की चौकी
- पीला कपड़ा
- लौंग
- रोली
- अबीर
- गुलाल
- गाय का घी
- धूप
- दीप
- गंगाजल
- मेहंदी
- सिंदूर
- इलायची
- अक्षत (चावल)
- हल्दी
- मौली
- गंगाजल
- 11 तिल के लड्डू
- मोदक
- फल
- कलश
- चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए दूध
- चीनी
- इत्र
- सकट चौथ व्रत कथा की पुस्तक
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