Sawan Somvar Vrat Katha: सावन के पहले सोमवार पर जरूर पढ़ें यह पौराणिक व्रत कथा, शिव-पार्वती पूरी करेंगे हर मनोकामना

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सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस दौरान सोमवार व्रत का विशेष महत्व है। माना जाता है कि यह व्रत सुखी वैवाहिक जीवन, अच्छा जीवनसाथी और संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी करता है।एक धनी साहूकार को संतान नहीं थी। शिव-पार्वती की भक्ति और सोमवार व्रत से प्रसन्न होकर शिव जी ने उसे पुत्र का वरदान दिया, लेकिन बताया कि वह पुत्र केवल 12 वर्ष ही जीवित रहेगा। साहूकार ने यह बात सुनी, पर अपनी भक्ति जारी रखी।

Sawan Somvar Vrat Katha: आज सावन का पहला सोमवार है। देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों का हुजूम देखने को मिल रहा है। हिंदू धर्म में सावन के महीने को बहुत पवित्र माना जाता है। यह महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। यही वजह है कि भोलेनाथ के भक्त पूरे साल इस महीने का इंतजार करते हैं। माना जाता है कि सावन में पूजा करने से भोलेनाथ बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। इस पूरे महीने में शिव जी की पूजा करने, उन पर जल चढ़ाने और सोमवार का व्रत रखने से बहुत पुण्य मिलता है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सावन का महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू चुका है और 28 अगस्त 2026 को इसका समापन होगा।
इस पावन महीने में भक्त उपवास रखकर भोलेनाथ की अराधना करते हैं। लोग सावन में सोमवार का व्रत रखते हैं। माना जाता है कि जो पूरे सावन नियम से भगवान शिव की पूजा करता है, उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं। सावन सोमवार का व्रत रखने से अच्छा जीवनसाथी मिलता है और वैवाहिक जीवन भी खुशहाल रहता है। मान्यता है कि जो लोग सावन सोमवार का व्रत रखते हैं उन्हें सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। यहां पर संपूर्ण व्रत कथा दी गई है।

सावन सोमवार व्रत कथा (Sawan Somvar Vrat ki Kahani)

Sawan Somvar Vrat Katha
Sawan Somvar Vrat Katha (AI Generated)

एक शहर में एक अमीर साहूकार रहता था, लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। इस वजह से वह दुखी रहता था। बेटा पाने के लिए वह हर सोमवार व्रत रखता और शिव-पार्वती की पूजा करता। उसकी भक्ति देखकर माता पार्वती खुश हुईं और शिव जी से उसकी इच्छा पूरी करने की प्रार्थना की। शिव जी बोले कि सबको अपने कर्मों और भाग्य का फल मिलता है, लेकिन पार्वती जी के कहने पर वे साहूकार की इच्छा पूरी करने को तैयार हो गए।

पार्वती जी के कहने पर शिव जी ने साहूकार को बेटा होने का वरदान दिया, लेकिन कहा कि वह बालक केवल 12 साल ही जिएगा। साहूकार ने यह बात सुन ली, फिर भी उसे न दुख हुआ न खुशी, वह पहले की तरह पूजा करता रहा।

कुछ समय बाद साहूकार को बेटा हुआ। जब वह 11 साल का हुआ, तो उसे पढ़ने के लिए काशी भेजा गया। साहूकार ने बेटे के मामा को बुलाकर बहुत सारा धन दिया और कहा कि रास्ते में यज्ञ कराते हुए और ब्राह्मणों को दान-भोजन देते हुए काशी जाओ। दोनों रास्ते में यज्ञ और दान करते हुए आगे बढ़े। रास्ते के एक नगर में राजा की बेटी की शादी थी, लेकिन जिससे शादी हो रही थी वह राजकुमार एक आंख से काना था और यह बात किसी को पता नहीं थी।

राजकुमार के पिता ने सच छुपाने के लिए साहूकार के सुंदर बेटे को दूल्हा बनाकर शादी करवा दी और सोचा कि बाद में उसे पैसे देकर विदा कर देगा। शादी तो हो गई, लेकिन साहूकार का बेटा सच्चा था। उसने मौका देखकर राजकुमारी के चुनरी पर लिख दिया, “तुम्हारी शादी मेरे साथ हुई है, लेकिन जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजेंगे वह काना है। मैं पढ़ने काशी जा रहा हूं।”

राजकुमारी ने यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो राजा ने बेटी को विदा नहीं किया। उधर, साहूकार का बेटा और मामा काशी पहुंचकर यज्ञ करने लगे। जिस दिन लड़का 12 साल का हुआ, उसने अस्वस्थ महसूस किया और सो गया। शिव जी के वरदान के अनुसार उसकी मृत्यु हो गई। मामा के रोने की आवाज सुनकर वहां से गुजर रहे शिव-पार्वती रुके। पार्वती जी के आग्रह पर शिव जी बालक के पास गए।

शिव जी ने बताया कि यह वही साहूकार का बेटा है जिसकी 12 साल की उम्र तय थी। लेकिन पार्वती जी की प्रार्थना पर शिव जी ने दया करके उसे फिर से जीवित कर दिया। पढ़ाई पूरी करके लड़का और मामा लौटते समय उसी नगर पहुंचे। ससुर ने दामाद को पहचान लिया और आदर-सत्कार के साथ अपनी बेटी को उसके साथ विदा कर दिया।

उधर साहूकार और उसकी पत्नी दाना-पानी छोड़कर बेटे का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कसम खाई थी कि बेटे की मौत की खबर मिली तो वे जान दे देंगे। बेटे के जीवित लौटने की खबर से वे बहुत खुश हुए। उसी रात शिव जी ने साहूकार के सपने में आकर कहा, “तुम्हारी सच्ची भक्ति और सोमवार व्रत से खुश होकर मैंने तुम्हारे बेटे को लंबी उम्र दी है।” जो भी सोमवार का व्रत और कथा सुनता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।