Tulsi Chalisa Lyrics for Darsh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में दर्श अमावस्या का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस वर्ष यह शुभ काल 18 मार्च की सुबह 8:25 से शुरू होकर 19 मार्च की सुबह 6:52 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किसी भी नए कार्य का शुभारंभ करना वर्जित माना गया है, लेकिन पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत फलदायी होता है। साथ ही, इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण करने से उनका आशीर्वाद मिलता है, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
दर्श अमावस्या के दिन तुलसी चालीसा का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि पूर्ण श्रद्धा के साथ किया गया यह पाठ घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और जीवन में चल रही समस्याओं या मानसिक अशांति को दूर करने में सहायक होता है। यदि कोई व्यक्ति तनावपूर्ण स्थितियों से गुजर रहा हो, तो इस दिन आध्यात्मिक साधना और तुलसी भक्ति के माध्यम से उसे आंतरिक शांति और संकटों से मुक्ति मिल सकती है। यहां पर तुलसी चालीसा की लिरिक्स दी गई है।
Tulsi Chalisa Lyrics for Darsh Amavasya 2026: श्री तुलसी चालीसा

दोहा
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।
चालीसा
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूं लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।
तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।


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