मुख्यमंत्री की सफल जनसभा ने बदली जींद की फिजा

Summary :

जींद में विकास के खाके पर केंद्रित मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चुनावी सभा से स्पष्ट कर दिया कि BJP सीधे तौर पर इस चुनाव को विकास के मुद्दे पर लेकर जाना चाहती।

जींद : जींद के रण में मुख्यमंत्री मनोहर लाल चुनावी सभा के बाद बदली फिजा में भाजपा की जमीन लगातार मजबूत हो रही है। एक ओर मुख्यमंत्री ने एक ही मंच पर भाजपा प्रत्याशी के साथ-साथ पार्टी में टिकट के दावेदार टेकराम कंडेला, सुरेंद्र बरवाला, राजेश गोयल के साथ-साथ शहरी पार्षदों और 35 गांवों के सरपंचों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर इनेलो, जजपा और कांग्रेस की अंदरूनी खटपट पर निशाना साधकर कर आमजन को इशारा दिया कि वह अपने मत का रूख विकास की ओर करेंगे तो जींद का हर तरीके से विकास सुनिश्चित होगा।

हर वर्ग के लोगों को साधने की उनकी कला के कायल हुए लोगों ने भाजपा के साफ्ट कार्नर को सकारात्मक तरीके से लेना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चुनाव प्रचार खत्म होने से पहले ही भाजपा को अन्य राजनीतिक दलों पर इक्कीस साबित करने के लिए विकास और एकजुटता का ट्रंप कार्ड खेलने हुए जींद विधानसभा के मतदाताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 49 साल बनाम सवा चार साल भाजपा से जींद में विकास के खाके पर केंद्रित मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चुनावी सभा से स्पष्ट कर दिया कि भाजपा सीधे तौर पर इस चुनाव को विकास के मुद्दे पर लेकर जाना चाहती है।

इसका असर यह रहा कि शनिवार को भाजपा प्रत्याशी डा कृष्ण मिढा के जनसंपर्क में विभिन्न कालोनियों और गांवों में चाय के कार्यक्रम की डिमांड बढी और अलग-अलग बिरादरी खुलकर सामने आने लगी। वहीं अगर चुनाव प्रचार अभियान के समापन से पहले रिव्यू किया जाए तो यह साफ हो चुका है कि करीब एक दशक तक इनेलो का गढ़ रहा जींद अब इनेलो के हाथ से फिसल चुका है। इनेलो की चुनाव मुहिम पहले दिन से ही नहीं उठ पाई। लिहाजा इनेलो नेता अपना गढ़ बचाने में असफल साबित हो रहे हैं। कभी जींद में ताऊ देवीलाल परिवार की तूती बोलती थी।

यह परिवार यदाकदा अपनी राजनीति ताकत इसी जींद के ‘जाट लैंड’ से लेता रहा है, लेकिन पहली बार इस चुनाव में परिवार की कलह ने पूरे परिवार को सड़क पर ला दिया है। पूरी चुनाव मुहिम के दौरान अभय चौटाला और उनके दोनों भतीजे दुष्यंत व दिग्वजय एक -दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप ही करते रहे हैं। जिसके कारण चुनाव के अंतिम दौर में भी जाट मतदाताओं में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जाट राजनीति पर निगाह रखने वालों का मानना है कि ताऊ देवीलाल परिवार की कलह ने इस परिवार की राजनीतिक जमीन को कमजोर दिया है। हालांकि दुष्यंत के लिए लाभदायक स्थिति यह है कि उनकी पार्टी नई होने के बावजूद भी फिलहाल ठीकठाक स्थित में है।

कांग्रेस पार्टी ने यहां वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला को चुनाव मैदान में उतारा था। शुरुआती चुनाव प्रचार के दौरान रणदीप सुरजेवाला को हैवीवेट उम्मीदवार माना जा रहा था, लेकिन विरोधियों ने उन्हें जहां विधानसभा में सबसे कम उपस्थिति और कभी कैथल के मुद्दे न उठाने पर घेरा, वहीं रणदीप सुरजेवाला चुनाव प्रचार के अंतिम समय तक यह बताने में असफल रहे वह विधायक होकर विधायक का चुनाव क्यों लड़ रहे हैं और वह कैथल छोडकर जींद क्यों आना चाहते हैं। इस अभियान के दौरान ज्यादा समय सुरजेवाला और अशोक तंवर प्रचार में जुटे रहे, जबकि प्रदेश के अन्य कांग्रेसी नेता कुछेक खास अवसरों पर ही दिखाई दिए।

हालांकि रणदीप सुरजेवाला ने अपने बाहरी समर्थकों के सहारे खुद को चुनावी मुकाबले में बनाने के लिए अंतिम समय तक जबरदस्त प्रयास किए, लेकिन चुनाव के अंतिम दौर में कांग्रेस के पास किसी भी वर्ग का कोई बड़ा हिस्सा मतदाताओं का नहीं है। रणदीप सुरजेवाला का पूरा चुनाव बाहरी लोग लड़ रहे थे। इसलिए चुनाव के अंतिम दौर में सब लोगों की विदाई के साथ ही इस चुनाव में रणदीप सुरजेवाला की राजनीतिक जमीन भी काफी हद तक कमजोर हो गई है। यह चुनाव सबसे अधिक महत्व जननायक जनता पार्टी के लिए रखता है। दिग्विजय चौटाला के माध्यम से जननायक जनता पार्टी का भविष्य तय होगा। हालांकि दिग्विजय व दुष्यंत का मुख्य एजेंडा चुनाव हारना या जीतना नहीं केवल इनेलो प्रत्याशी को पहले तीन की दौड़ से बाहर करना है।

सत्तारूढ़ भाजपा ने जींद चुनाव के पूरी ताकत झौंकते हुए दिन-रात एक किए रखा। भाजपा के सभी मंत्री और बोर्ड व निगमों के चेयरमैन जींद में जमे रहे। भाजपा की मजबूत संगठनात्मक ताकत के बूते पार्टी आज जबरदस्त मजबूत स्थिति में है। भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मिढ्ढा भी जीत के प्रति आश्वस्त दिखाई दिए। शुरू से लेकर अब तक बड़ी बारिकी से चुनाव की हर गतिविधि पर निगाह रखने वाले पार्टी के प्रदेश महामंत्री संजय भाटिया का मानना है कि भाजपा ग्रामीण और शहरी क्षेत्र दोनों जगह कमल खिलाने जा रही है। पार्टी की रणनीति ने इस बार पार्टी की राजनीति जमीन को मजबेत किया है। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह का बूथ प्रबंधन भाजपा का है ऐसी स्थिति किसी की भी नहीं है। इसलिए पार्टी बड़े अंतराल से चुनाव जीतेगी।

अलग-अलग समुदायों के समर्थन से मिढ़ा की स्थिति मजबूत : भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा को चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में अलग-अलग समुदायों से लगातार मिल रहे भारी जनसमर्थन से भाजपा मजबूत स्थिति में आ रही है। पिछले तीन दिनों से अग्रवाल, ब्राह्मण, सैनी, जाटो, पिछड़ा वर्ग, एससी, सैनी समुदाय का भारी जनसमर्थन मिल रहा है। सभी समुदायों से भाजपा को मिल रहे भारी जनसमर्थन से शहर में भाजपा के पक्ष में माहौल बन रहा है और भाजपा लगातार बढ़तर पर है।

भाजपा प्रत्याशी डॉ. मिढ़ा को शनिवार को शहर में हकीकत नगर, कुम्हार माहौले में प्रजापत समाज, अप्राही माहौल में कश्यप समाज, न्यू कृष्णा कॉलोनी में धानक समाज ने, रामनगर में वाल्मीििक समाज ने, स्कीम नंबर 19 में अग्रवाल समाज ने, हनुमान गली में ब्राह्मण समाज ने अपना समर्थन दिया और दर्जनभर स्थानों पर लड्डुओं से तोलने के साथ-साथ अलग-अलग समुदायों ने पगड़ी पहनाकर भारी मात्रा में जनसमर्थन दिया। इसके अलावा शनिवार को शहर की कई सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं ने व्यक्तिगत मिलकर डॉ. कृष्ण मिढ़ा को अपना जनसमर्थन दिया।

(निसं)

Desk Team