हरियाणा राज्यसभा चुनाव ! 31 जीत के लिए, एक्स्ट्रा हाथ में, फिर भी क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं में कांग्रेस, जानिए जीत का पूरा समीकरण

Haryana Rajya Sabha Election

Haryana Rajya Sabha Election : हरियाणा में राज्यसभा के दावेदारों को जिताने के लिए सुबह 9 बजे से चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बीच हलचल तेज हो गई है अपने पाले के उम्मीदवार को जिताने के लिए। बता दें हरियाणा की राजनीति में यह दिन अहम होने वाला है. प्रदेश की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने जा रहे चुनाव ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

वैसे तो संख्या बल के हिसाब से मुकाबला सीधा लग रहा था, लेकिन एक निर्दलीय उम्मीदवार की एंट्री ने पूरी बाजी को ‘सस्पेंस थ्रिलर’ बना दिया है. आपको जानकारी दे दें, मतदान सुबह शुरू हो चुका है और सीएम नायब सिंह सैनी ने अपना वोट डाल दिया है। 11:20 बजे तक राज्यसभा चुनाव के लिए 25 वोट डाले गए हैं।

इस बीच मंत्री अनिल वीज पैरों में फ्रेक्चर के कारण व्हीलचेयर पर वोट डालने पहुंचे। कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट, सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा और सतपाल ब्रह्मचारी के साथ विधानसभा पहुंची हैं। कांग्रेस के चार सांसद लगातार विधानसभा परिसर के बाहर डटे हुए हैं। विधायकों को साथ लेकर वोट डलवा रहे हैंसुबह शाम 4 बजे तक विधायक अपने मतों का प्रयोग करेंगे और शाम 5 बजे के बाद ही जीते उम्मीदवारों का नाम सामने आ जाएगा।

Haryana Rajya Sabha Election: मैदान में उम्मीदवार

हरियाणा में राज्यसभा की दो खाली सीटों के लिए इस बार तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें से एक भाजपा से, एक कांग्रेस से और एक निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं, तीनों को जिताने के लिए जद्दोजहद चल रही है।

ये उम्मीदवार कुछ यूं हैं-

  • भाजपा: संजय भाटिया
  • कांग्रेस: कर्मबीर बौद्ध
  • निर्दलीय: सतीश नांदल

अगर आंकड़ों की बात करें तो एक-एक सीट भाजपा और कांग्रेस के खाते में जानी तय मानी जा रही थी, लेकिन सतीश नांदल के नामांकन ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं. अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस अपने कुनबे को एकजुट रख पाएगी या भाजपा एक बार फिर ‘चाणक्य नीति’ से बाजी मार ले जाएगी?

Haryana Rajya Sabha Election 2026: जीत का गणित: 31 का जादुई आंकड़ा

Haryana Rajya Sabha Election 2026
Haryana Rajya Sabha Election 2026 (Source: Social Media)

बात करें हरियाणा की राजनीतिक डेमोग्राफी की तो राज्य में कुल 90 विधानसभा सीट्स हैं, जिसमें से मुख्यत 48 बीजेपी और 37 कांग्रेस ने जीती हैं। इसके अलावा 3 इंडिपेंडेंट और 2 INLD ने जीतीं। यही विधायक राज्यसभा के लिए मतदान कर रहे हैं। इन सभी को अपने दलों को जिताने के लिए 31 विधायकों का जादुई आंकड़ा छूना होगा, जिसमें कांग्रेस और भाजपा तो सफल हो जाएगी, क्योंकि अगर कोई बड़ी गड़बड़ी न हो तो दोनों पार्टियों के पास उपयुक्त विधायक हैं। मगर निर्दलीय पर पेंच फंसेगा।

Rajya Sabha Election 2026: पक्ष-विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

बता दें, राज्यसभा चुनाव प्रतिष्ठा का चुनाव होता है। यह दिखाता है कि राज्य में पार्टी की राजनीतिक पकड़ कितनी मजबूत है। भाजपा के सामने चुनाव में इतिहास दोहराने का अवसर है। इससे पहले भी पार्टी 2 सदस्य भेज चुकी है।

दूसरी ओर कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश में रखा हुआ था ताकि वे एक साथ मतदान के लिए पहुंचे। कांग्रेस ने ऐसी किलेबंदी तैयार की है कि कोई भी विधायक सत्ता पक्ष के संपर्क में ना आ सके। कांग्रेस हाईकमान भी चुनाव के लिए पूरी तरह से सतर्क है और नजर बनाए हुए है।

क्या है समीकरण

भाजपा के पास अपने 48 विधायक हैं और 3 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है. इस तरह भाजपा के पास कुल 51 वोट हैं. संजय भाटिया की जीत के लिए 31 वोट चाहिए, जिसके बाद भाजपा के पास 20 अतिरिक्त वोट बचेंगे.

वहीं, कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं. जीत के लिए 31 वोट चाहिए. तकनीकी रूप से कांग्रेस के कर्मबीर बौद्ध सुरक्षित दिख रहे हैं, लेकिन सतीश नांदल की चुनौती ने खेल फंसा दिया है. निर्दलीय सतीश नांदल को भाजपा के बचे हुए 20 वोट मिलने की संभावना है. यदि वे इनेलो के 2 विधायकों का साथ भी पा लेते हैं, तो उनके पास 22 वोट होंगे. जीत के लिए उन्हें फिर भी 9 और वोटों की जरूरत होगी, जो केवल कांग्रेस में ‘सेंधमारी’ से ही मुमकिन है.

Haryana News Today: आसान नहीं होगा भाजपा के लिए किला फतह करना

हालांकि ऐसा करना भाजपा के लिए इतना भी आसान नहीं होने जा रहा। क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए कांग्रेस ने अपने किले को बचाने की भरसक कोशिश की है। अगर सब ठीक रहता है तो एक कांग्रेस और एक भाजपा का राज्यसभा उम्मीदवार जीत जाएगा।

हालांकि पिछले दो राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद अपने उम्मीदवार को जिताने में नाकाम रही थी. हार की इस ‘हैट्रिक’ से बचने के लिए कांग्रेस ने इस बार अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश में ठहराया था, ताकि क्रॉस वोटिंग या खरीद-फरोख्त से बचा जा सके.

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