Sonipat Old Age Home Case: हरियाणा के सोनीपत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक बुजुर्ग पिता अपनी बेटियों से मिलने की उम्मीद लिए जिंदगी के आखिरी दिन तक इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। निधन के बाद भी उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं पहुंचीं। आखिरकार वृद्ध आश्रम के लोगों ने ही उनका अंतिम संस्कार किया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के रहने वाले शिव चरण रत्न गुप्ता कभी बड़े कपड़ा व्यापारी थे। करीब डेढ़ साल पहले वे अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ सोनीपत के एक वृद्ध आश्रम में रहने आए थे। उनके कोई बेटा नहीं था और उन्होंने अपनी तीनों बेटियों की अच्छी परवरिश की। बेटियों को पढ़ाया-लिखाया और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया। इनमें से दो बेटियां टीचर हैं। कुछ समय पहले उनकी पत्नी का भी निधन हो गया था, जिसके बाद वह अकेले ही आश्रम में रह रहे थे।
निधन के बाद भी नहीं पहुंचा कोई परिवार का सदस्य
वृद्ध आश्रम के संचालक आनंद के अनुसार, करीब 20 दिन पहले जब शिव चरण रत्न गुप्ता की तबीयत खराब हुई तो उनकी तीनों बेटियों, अनीता, निशा और प्रिया को इसकी जानकारी दी गई। उनसे कई बार कहा गया कि वे पिता से मिलने आ जाएं, लेकिन किसी ने आने की हां नहीं भरी। सभी ने कोई- कोई काम बताकर मना कर दिया। आश्रम के अनुसार, शिव चरण रत्न गुप्ता अपनी बेटियों से बात करने के लिए हमेशा एक मोबाइल फोन अपने पास रखते थे। पहले बेटियों से बातचीत होती थी, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद फोन आना भी लगभग बंद हो गया।
जब शिव चरण रत्न गुप्ता का निधन हुआ तो आश्रम की ओर से उनकी बेटियों को तुरंत इसकी सूचना दी गई। इसके बावजूद कोई भी बेटी अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं आई। बताया गया कि बड़ी बेटी अनीता नेपाल में टीचर है, दूसरी बेटी निशा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती है, जबकि सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती है। पिता के निधन के बाद भी तीनों बेटियां उनके अंतिम संस्कार में नहीं पहुंची। ऐसे में आश्रम के कर्मचारियों और समाजसेवियों ने मिलकर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।
VIDEO कॉल पर देखी पिता की अंतिम विदाई
बता दें कि बेटियों ने अंतिम संस्कार में आने की बजाय वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता की अंतिम विदाई देखी। वहीं बड़ी बेटी अनीता ने ऑनलाइन 5,100 रुपये भेजे और आश्रम से अनुरोध किया कि पिता का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जाए।
पहले बेटियों ने कहा था कि अस्थियां सुरक्षित रख दी जाएं, लेकिन बाद में उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि उनके पास आने का समय नहीं है। उन्होंने आश्रम के संचालक से ही गंगा में अस्थियां विसर्जित करने का अनुरोध किया। इतना ही नहीं, अंतिम संस्कार की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग भी उन्हें भेजने की बात कही।
समाज में चर्चा का विषय बना मामला
इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ये परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक रिश्तों की भी असली तस्वीर दिखाती है। जिस पिता ने अपनी बेटियों की पढ़ाई, परवरिश और फ्यूचर के लिए पूरी जिंदगी मेहनत की, वही पिता आखिरी समय में अपनी बेटियों का इंतजार करते रहे। लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।
वहीं वृद्ध आश्रम के लोगों का कहना है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ परिवार और रिश्तों की अहमियत समझाना भी जरूरी है। आज के समय में और जिंदगी भागदौड़ में अगर अपने ही साथ न हों, तो सफलता और धन का महत्व भी कम हो जाता है।
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