Premanand ji Maharaj on Chandra Grahan 2026: 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। यह संयोग बहुत दुर्लभ है, क्योंकि होली का त्योहार और ग्रहण एक साथ आ रहे हैं। ग्रहण सिंह राशि में लगेगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा, जबकि सूतक सुबह 9:39 बजे से शुरू होकर ग्रहण समाप्ति तक चलेगा।
प्रेमानंद जी महाराज ने भक्तों के सवालों के जवाब में ग्रहण और सूतक काल के बारे में सरल और स्पष्ट मार्गदर्शन दिया है। महाराज जी का कहना है कि ग्रहण के समय डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी और नाम जाप से हर नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है। आइए Premanand Ji Maharaj guide holi 2026 की कुछ अहम बातों पर नजर डालते हैं।
Premanand ji Maharaj on Chandra Grahan 2026: प्रेमानंद महाराज ने बताया ग्रहण पर क्या करें
1. ग्रहण के समय डरने की जरूरत नहीं

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ग्रहण के समय डरने से कुछ नहीं है, बल्कि सावधान और जागरूक रहना चाहिए। ग्रहण के दौरान बाहरी वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इससे बचने का सबसे आसान और अचूक उपाय नाम जाप है। चाहे आप अपने इष्ट का नाम लें, गुरु मंत्र जपें या गायत्री मंत्र पढ़ें, मन में भगवान का स्मरण ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। यह जाप न केवल अशुभ प्रभाव से बचाता है, बल्कि मन की एकाग्रता को भी बढ़ाता है। महाराज जी का कहना है कि डर को भगाने के लिए सबसे अच्छा हथियार भगवान का नाम ही है।
2. ग्रहण से पहले की तैयारी जरूरी

प्रेमानंद महाराज ने ग्रहण शुरू होने से पहले की तैयारी पर खास जोर दिया है। ग्रहण से करीब एक घंटा पहले स्नान कर लें। साफ कपड़े पहनें और घर में किसी शांत जगह या पूजा स्थल पर आसन लगाकर बैठ जाएं। इसके बाद प्रभु के नाम में लीन हो जाएं। नाम जाप या भगवान का स्मरण करते रहें। महाराज जी कहते हैं कि अगर आप इस तरह से खुद को तैयार कर लेते हैं, तो ग्रहण की कोई भी नकारात्मक ऊर्जा आप पर असर नहीं कर पाएगी। इसके बजाय आपको मानसिक शांति और आत्मिक बल मिलेगा।
3. ग्रहण समाप्ति के बाद की शुद्धि

ग्रहण खत्म होने के बाद तुरंत सामान्य दिनचर्या में ना लौटें। महाराज जी की सलाह है कि ग्रहण समाप्त होने के बाद भी कम से कम आधा घंटा तक नाम जाप जारी रखें। इसके बाद दोबारा स्नान करें। स्नान के बाद ही भोजन करें या कोई सांसारिक काम शुरू करें। यह शुद्धि का पूरा चक्र मन और शरीर दोनों को स्वच्छ करता है। प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ग्रहण के बाद स्नान और जाप से आपकी ऊर्जा पूरी तरह सकारात्मक हो जाती है और पुरानी नकारात्मकता का कोई प्रभाव नहीं बचता है।
4. होली और ग्रहण का संयोग साधना का विशेष अवसर

इस बार चंद्र ग्रहण होलिका दहन के दिन पड़ रहा है। महाराज जी के अनुसार, यह संयोग बहुत खास है। होलिका दहन बुराई के अंत का प्रतीक है और ग्रहण नकारात्मक ऊर्जा का समय है। दोनों एक साथ होने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन जप, ध्यान या होलिका दहन के साथ नाम जाप करने से नकारात्मकता का नाश होता है और सकारात्मकता की शुरुआत होती है। प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि इस दिन की गई साधना बहुत फलदायी होती है। भक्तों को डरने की बजाय इसे अवसर की तरह लेना चाहिए।
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