नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मौजूदा विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लाने की कवायद तेज कर दी है। इस संबंध में कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी, उदित राज, सुखदेव भगत, सुरेंद्र राजपूत, जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडेय, सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने प्रतिक्रिया दी।
प्रमोद तिवारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “भारत के संविधान में मिले अधिकारों का उपयोग करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएंगे। दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि उनकी आपत्ति के बावजूद 10 माह में 14 बार नियमों के विरुद्ध काम किया गया है। जिस तरह भाजपा ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रही है, उससे लगता है कि भाजपा सह अपराधी है। भाजपा और ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र, संविधान और मूल आत्मा के अपराधी हैं। इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में जांच होनी चाहिए।
राहुल गांधी पर भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “मैं राहुल गांधी को सलाम करता हूं। इस व्यक्ति ने तीन साल पहले जो बातें कही थीं, वही बातें अब दोनों चुनाव आयुक्तों ने भी कही हैं। उन्होंने जो बातें किसी भविष्यवक्ता की तरह कही थीं, वे जनता की कसौटी पर खरी उतरी हैं। इस समय, भाजपा जनता के सामने एक बेशर्म समूह के तौर पर उभरी है जो लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश कर रही है।”
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “मेरा मानना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता है, जिसकी मुझे उम्मीद नहीं है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। चुनाव आयोग का काम चुनाव को निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कराना है। आयोग का काम है वोट बचाना लेकिन ज्ञानेश कुमार सवालों को बचा रहे हैं और बच रहे हैं। चुनाव आयोग ने एसआईआर के तहत 13 करोड़ नाम काटे हैं लेकिन एक नाम जोड़ा नहीं है। संविधान ने चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संस्था बनाया है लेकिन ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग को सरकारी विभाग बना दिया है।”
भाजपा और ज्ञानेश कुमार द्वारा आरोपों के नकारने पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “देश के साथ ज्ञानेश कुमार और गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा धोखा किया है। इन लोगों ने पूरे तंत्र को हाईजैक कर लिया। इतना ही नहीं ज्ञानेश कुमार द्वारा फार्म-6 बदला गया, जो केवल संसद और सरकार कर सकती है। ज्ञानेश कुमार को तो जेल भेजना चाहिए।”
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष के प्रस्ताव लाने की तैयारी पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “संसद अब बेलगाम हो गई है और नियंत्रण में नहीं है। संसद में आप कुछ भी कर लें, उसका कोई असर नहीं होता। लोगों को सड़कों पर उतरना होगा। संसद निश्चित रूप से एक मंच है और संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए उसे मिले संवैधानिक अधिकारों का पूरा इस्तेमाल होना चाहिए। अब मैं कहूंगा कि यह मामला कांग्रेस पार्टी या किसी क्षेत्रीय पार्टी से आगे निकल चुका है। यह पूरे देश और आम लोगों से जुड़ा मुद्दा बन गया है। उन्हें सड़कों पर उतरकर इन्हें बाहर करना चाहिए और मध्यावधि चुनाव होने चाहिए।”
जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा, “अगर सरकार इमानदार होती तो, इतना गंभीर आरोप लगने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से बर्खास्त कर देती। हालांकि इस मामले में उलटा दिख रहा है। आरोप लग रहे हैं ज्ञानेश कुमार पर और सफाई दे रहे हैं भाजपा प्रवक्ता। भाजपा और मुख्य चुनाव आयुक्त मिले हुए हैं। इस तरह की कोशिश की गई है कि एक पार्टी को फायदा हो।
चुनाव आयोग पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी के बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “सुधांशु त्रिवेदी संस्कृत में झूठ बोलते हैं। सुधांशु त्रिवेदी खुद जानते हैं कि चुनाव आयोग और उसमें बैठे अधिकारी भारतीय जनता पार्टी के कहने पर गड़बड़ी कर रहे हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों की कथित गड़बड़ी से सीधे बीजेपी को फायदा हो रहा है। राहुल गांधी ने कई बार इसके सबूत पेश किए हैं। अगर सुधांशु त्रिवेदी में हिम्मत है, तो उन्हें बताना चाहिए कि हरियाणा में 19 लाख वोटर कहां से और क्यों जोड़े गए।”
सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा, “इंडी गठबंधन और पूरा विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के लोकतंत्र-विरोधी रवैये और उनके लोकतंत्र-विरोधी कदमों के खिलाफ मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना जरूरी है। यह लोकतंत्र की रक्षा के लिए है। वह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को खत्म कर रहे हैं। और यह चुनाव आयोग वोटर लिस्ट से लाखों लोगों के नाम हटाने की कोशिश कर रहा है। यह मुख्य चुनाव आयुक्त लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांत का उल्लंघन कर रहे हैं और चुनाव आयोग तथा उसका समर्थन करने वाली मशीनरी आरएसएस और भाजपा मिलकर पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे हैं।”
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा, “मेरा मानना है कि चुनाव आयोग के अंदर बढ़ता मतभेद पूरा देश देख रहा है। तीन चुनाव आयुक्तों में से दो एक तरफ हैं और एक दूसरी तरफ। इसे लेकर राजनीतिक दलों और पूरे देश में नाराजगी है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया गया है कि ज्ञानेश कुमार अब उत्तर प्रदेश नहीं जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में और कोई जोखिम नहीं उठा सकती। वे जानते हैं कि जब नाव डूब रही हो, तो उसे और डुबोने के लिए किसी और को नहीं लाया जा सकता।”
–आईएएनएस
ओपी/पीएम
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