Maharashtra’s Freedom of Religion Act : महाराष्ट्र सरकार जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून लेकर आ रही है। इस कानून के तहत अब बल, छल या प्रलोभन से यदि कोई किसी का धर्म परिवर्तन करवाता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
बता दें, गृह विभाग ने यह नोटिफिकेशन 17 अगस्त को जारी किया है। इस नोटिफिकेशन के अनुसार 28 अगस्त से कानून लागू हो जाएगा। नए कानून के तहत बल या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने के मामलों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा, जिसमें दोषी पाए जाने पर अधिकतम सात साल तक की कैद और भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान रखा गया है। ऐसे मामलों में 7 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है और यह अपराध गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है।
इन राज्यों में प्रभावी कानून
बता दें, इससे पहले देश के 12 राज्यों में इस तरह का कानून प्रभावी किया जा चुका है। इनमें मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं।
इन राज्यों में बनाए गए कानूनों का मकसद यह है कि किसी भी व्यक्ति को दबाव, धोखा, लालच या शादी के जरिए धर्म बदलने के लिए मजबूर न किया जाए. बता दें, महाराष्ट्र अब 13 वां राज्य बन चुका है।
देनी होगी 60 दिन पहले सूचना
महाराष्ट्र में प्रभावी होने जा रहे कानून के अनुसार किसी की व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाना नहीं, बल्कि अनुचित तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को नियंत्रित करना है। यदि कोई नागरिक स्वेच्छा से अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे प्रक्रिया के तहत निर्धारित प्राधिकारी के पास 60 दिन पूर्व आवेदन देकर अपनी लिखित सहमति दर्ज करानी होगी। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही धर्म परिवर्तन की अनुमति दी जाएगी।
बच्चे को मिलेगा मां का धर्म
इस अधिनियम में सब से ख़ास बात विवाह के चलते हुए धर्म परिवर्तन से जुड़ा है, जिसके तहत यदि कोई कोई विवाह धर्म परिवर्तन के मकसद से किया गया पाया जात है या धोके से किया पाया जाता है तो उस शादी से जन्म लेने वाले बच्चे की धार्मिक पहचान उसकी मां के पूर्व धर्म से ही जोड़ा जाएगा। यानी बच्चे का धर्म मां के धर्म परिवर्तन से पूर्व धर्म ही होगा।
सबसे कड़ी सजा कहां
बता दें, धर्मांतरण को लेकर कई राज्यों में सख्त कानून बन चुके हैं। सबसे कड़े कानूनों में से सबसे ऊपर उत्तर प्रदेश है। यहां उत्तर प्रदेश विधि-विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 लागू किया गया था, जिसे बाद में 2024 में संशोधित करके और सख्त बना दिया गया।
कानून कहता है कि अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे 14 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीँ अगर इस अपराध का विक्टिम कोई नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा/जुड़ी हो तो सजा और बढ़ जाती है।
ऐसे मामलों में आरोपी को 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है. खास बात यह है कि इन मामलों को गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
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