मुंबई, 19 अगस्त (आईएएनएस)। कॉकरोच जनता पार्टी ने देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नीट पेपर मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें देशभर के छात्रों ने हिस्सा लिया। इस दौरान पुलिस की ओर से छात्रों के साथ किए गए रवैये को निंदनीय बताते हुए कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं। जिस पर कोर्ट ने एक पैनल गठित करने की बात कही है। इस पैनल में एक रिटायर्ड जज को भी शामिल किया जाएगा। इस पर एनसीपी (एसपी) के नेता रोहित पवार ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि इस पैनल में एक ऐसे जज को शामिल किया जाना चाहिए, जो सम्मनित हो। वहीं अगर छात्रों के साथ किए गए पुलिस के रवैये की बात करे, तो वो निंदनीय था। इसमें दिल्ली पुलिस के अलग-अलग विभागों के लोग शामिल थे, जिन्होंने छात्रों के साथ ऐसा सलूक किया था, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग थे जिनके रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन लोगों ने चप्पल पहन रखी थी, सैंडल पहन रखी थी, सिविल ड्रेस में थे, हाथ में डंडा था, उस डंडे पर कील लगाई गई थी। आखिर ये लोग कौन थे? यह जांच का विषय है। अब इस मामले की जो न्यायिक जांच होगी, उसमें प्रमुख रूप से कई मुद्दे शामिल होंगे, जिसमें यह सवाल उठेगा कि आखिर प्राथमिकी दर्ज क्यों की गई थी? लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया था? इसके अलावा, दिल्ली पुलिस की जो गाड़ियां खराब हो चुकी थी, जो चलने में असमर्थ थी, उसे भी वहां पर लाया गया था। उसे जानबूझकर तोड़ा गया था और उसे ऐसे प्रस्तुत करने की कोशिश की गई थी कि लोगों के बीच में यह संदेश जाए कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने इन पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया है। आखिर यह सब कैसे हुआ? इसकी जांच होनी चाहिए, ताकि सब दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
रोहित पवार ने कहा कि जिन भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने सिविल ड्रेस में प्रदर्शन में शामिल स्टूडेंट को निशाना बनाया, उन पर हमला किया। यहां तक की लड़कियों के साथ भी बदसलूकी की। आखिर ये लोग कौन थे, इसकी जांच होनी चाहिए। ऐसे लोगों के चेहरे को चिन्हित किया जाना चाहिए। ऐसे लोगों के बारे में पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर ये लोग कौन हैं। इसके बाद यह साफ होनी चाहिए कि इन लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो। इस तरह के लोगों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, उन्होंने मराठी मानुस को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हमारा साफ कहना है कि जो लोग भी यहां पर पैदा हुए, यहां की माटी का सम्मान करते हैं, यहां के लोगों का सम्मान करते हैं। ऐसे सभी लोग हमारे लिए मराठी मानुस हैं और मैं साफ कर देना चाहता हूं कि ऐसे लोगों की गरिमा और हितों पर किसी भी कीमत पर कुठाराघात स्वीकार नहीं किया जाएगा।
रोहित पवार ने कहा कि भाजपा के लोग ओबीसी और गैर-ओबीसी, मराठी और गैर मराठी के नाम पर राजनीति करते हैं। ये लोग महाराष्ट्र के चुनाव में राजनीतिक फायदा प्राप्त करने के मकसद से ये सब कर रहे हैं। कोई महाराष्ट्र में रहते हुए मराठियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की विवादित टिप्पणी करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। राज्य में भाषा के नाम पर राजनीति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
साथ ही, तमिलनाडु के मातृत्व अवकाश पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, मातृत्व अवकाश महिलाओं का अधिकार है और यह उन्हें मिलना चाहिए। पहला बच्चा हो, या दूसरा या फिर तीसरा। उन्हें मातृत्व अवकाश मिलता रहने चाहिए। वहीं, अगर किसी के दो बच्चे हैं और इसके बाद उसका कोई तीसरा बच्चा होगा, तो वह राजनीति में नहीं आ सकता है। इस बारे में नियम तो आपको मालूम ही होगा। लेकिन, मातृत्व अवकाश महिलाओं को मिलना चाहिए।
–आईएएनएस
एसएचके/एएस
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