NHAI Toll Collection : देशभर में नेशनल हाईवे का जाल बिछाने के साथ ही सरकार की टोल से होने वाली कमाई भी नए रिकॉर्ड बना रही है। संसद में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, बीते तीन सालों में टोल के जरिए राष्ट्रीय राजमार्गों से 1.87 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रिकॉर्ड वसूली हुई है।
अगर इसका रोजाना का हिसाब देखें, तो नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को टोल वसूली के तौर पर हर दिन औसतन 171 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिल रहा है। संसद में 28 जुलाई को कांग्रेस सांसद के सवाल के जवाब में मंत्रालय ने ये आंकड़े पेश किए, जिससे साफ है कि डिजिटल टोल कलेक्शन में लगातार जबरदस्त उछाल आ रहा है।
टोल कलेक्शन में उत्तर प्रदेश नंबर-1
वित्तीय वर्ष 2024-25 के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूपी सबसे ज्यादा टोल देने वाला राज्य बनकर उभरा है। वहीं पहाड़ी और छोटे राज्यों से सबसे कम कलेक्शन आया है।
| राज्य (टॉप कलेक्शन) | टोल वसूली (करोड़ रु.) | राज्य (सबसे कम कलेक्शन) | टोल वसूली (करोड़ रु.) |
| उत्तर प्रदेश | 6,573.82 | हिमाचल प्रदेश | 171.00 |
| राजस्थान | 6,289.22 | जम्मू-कश्मीर | 507.56 |
| महाराष्ट्र | 6,102.80 | असम | 547.56 |
| गुजरात | 5,450.20 | केरल | 579.22 |
| तमिलनाडु | 4,459.40 | उत्तराखंड | 581.73 |
| कर्नाटक | 4,320.27 | झारखंड | 894.55 |
| मध्य प्रदेश | 4,188.15 | — | — |
| बिहार | 2,036.94 | — | — |
क्या राज्यों को भी मिलता है इस कमाई का हिस्सा?
अक्सर यह सवाल उठता है कि जिस राज्य के हाईवे से टोल वसूला जाता है, क्या उस राज्य सरकार को भी इसमें से हिस्सा मिलता है? सरकार ने साफ किया है कि ऐसा कोई नियम नहीं है।
टोल से मिलने वाला पूरा पैसा भारत सरकार के ‘कंसोलिडेटेड फंड’ (संचित निधि) में जमा होता है। बाद में इसे बजट आवंटन के जरिए पूरे देश में नई सड़कों के निर्माण और पुरानी सड़कों के रखरखाव पर खर्च किया जाता है।
हाल ही में केरल सरकार ने हाईवे विकास में अपने 5,800 करोड़ रुपये के योगदान का हवाला देकर टोल में हिस्सा मांगा था। हालांकि केंद्र ने साफ कर दिया कि किसी भी राज्य को अलग से टोल की हिस्सेदारी देने का प्रावधान नहीं है।
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