दलबदल की लहर के बीच सीपीआई(एम) के ‘क्लास गद्दार’ को लेकर पार्टी में विवाद गहराया

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तिरुवनंतपुरम, 18 मार्च (आईएएनएस)। केरल में सीपीआई(एम) द्वारा “क्लास गद्दार” शब्द का बार-बार इस्तेमाल अब विवाद का विषय बन गया है। यह स्थिति हाल ही में हुए कई नेताओं के दल बदलने की घटनाओं के कारण सामने आई है, जिन्हें लेकर आलोचक अलग-अलग राजनीतिक व्याख्या कर रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ताओं ने इस शब्द का बार-बार इस्तेमाल किया है। खासकर तब जब वी. कुंजीकृष्णन और टी.के. गोविंदन जैसे पुराने नेता, जिन्होंने पांच दशक से ज्यादा समय तक पार्टी के प्रति वफादारी दिखाई और सीपीआई(एम) छोड़कर बाहर चले गए। इन नेताओं ने पार्टी के…

तिरुवनंतपुरम, 18 मार्च (आईएएनएस)। केरल में सीपीआई(एम) द्वारा “क्लास गद्दार” शब्द का बार-बार इस्तेमाल अब विवाद का विषय बन गया है। यह स्थिति हाल ही में हुए कई नेताओं के दल बदलने की घटनाओं के कारण सामने आई है, जिन्हें लेकर आलोचक अलग-अलग राजनीतिक व्याख्या कर रहे हैं।

पिछले कुछ हफ्तों में पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ताओं ने इस शब्द का बार-बार इस्तेमाल किया है। खासकर तब जब वी. कुंजीकृष्णन और टी.के. गोविंदन जैसे पुराने नेता, जिन्होंने पांच दशक से ज्यादा समय तक पार्टी के प्रति वफादारी दिखाई और सीपीआई(एम) छोड़कर बाहर चले गए। इन नेताओं ने पार्टी के भीतर अन्याय और अनदेखी का आरोप लगाया।

उनके जाने के बाद पार्टी ने उन्हें “क्लास गद्दार” के रूप में ब्रांड किया, यानी ऐसा दिखाया जैसे उन्होंने वही राजनीति की जो पार्टी के मूल सिद्धांतों के खिलाफ थी। इससे नाराज पार्टी कार्यकर्ता अपने पुराने प्रिय नेताओं के खिलाफ सड़कों पर नारे लगाते दिखे, जबकि उन्हें पहले बड़े सम्मान के साथ देखा और संबोधित किया जाता था।

इसी तरह, दो बार के मंत्री जी. सुधाकरन ने अंबालाप्पुझा से इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया और कांग्रेस ने उन्हें व अन्य पुराने नेताओं को समर्थन देने के लिए तैयार किया।

इसके अलावा, तीन बार के विधायक एस. राजेंद्रन और आयशा पोट्टी ने अपनी पार्टियों को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में शामिल हो गए। उनकी नई पार्टियों ने उन्हें कैंडिडेट के तौर पर मैदान में उतारा, जिससे चुनावी माहौल पहले से ही और गर्म हो गया।

आलोचकों का कहना है कि सीपीआई(एम) अपने जाने वाले नेताओं को “क्लास गद्दार” कहने में जल्दी करती है लेकिन विरोधी खेमे के नेताओं के लिए बिल्कुल अलग रुख अपनाती है। उदाहरण के लिए कांग्रेस के पूर्व नेता के.पी. अनिल कुमार और डॉ. सरीन का सीपीआई(एम) में स्वागत किया गया और डॉ. सरीन को 2024 में उनके दल बदलने के तुरंत बाद ही उम्मीदवार बना दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी का यह चयनात्मक रुख अब सवालों के घेरे में है, क्योंकि यह दर्शाता है कि सीपीआई(एम) केवल अपने जाने वाले सदस्यों को ही आलोचना का पात्र बनाती है जबकि नए या विरोधी नेताओं को जल्द अपनाकर प्रगतिशील राजनीति के प्रतीक के रूप में पेश किया जाता है।

इसके अलावा, बुधवार को आई रिपोर्ट्स में बताया गया कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता अब्दुर्रहमान रंदाथानी को मलप्पुरम से सीपीआई(एम) का उम्मीदवार बनाने पर विचार किया जा रहा है।

जैसे ही केरल एक महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले की ओर बढ़ रहा है, पार्टी में नेताओं के दल बदलने और समझौते को लेकर सीपीआई(एम) की अलग-अलग प्रतिक्रिया ने बहस को और तेज कर दिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी की विचारधारा की एकरूपता केवल चुनावी फायदे के लिए अपनाई जा रही है।

–आईएएनएस

पीएम

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