नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। देश में दिव्यांगजनों, खासकर बोलने और सुनने में दिक्कत वाले लोगों को जीवन बीमा का लाभ न मिल पाने का मामला सामने आया है। इस शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लेते हुए बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) को नोटिस जारी किया है और 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।
आयोग की पीठ (जिसकी अध्यक्षता प्रियंक कानूनगो कर रहे हैं) ने इस मामले को मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बीमा कंपनियां दिव्यांग बच्चों, विशेष रूप से मूक-बधिर बच्चों को जीवन बीमा देने से इनकार कर रही हैं या उनके लिए कड़े और शर्तें लगा रही हैं। इससे इन परिवारों में आर्थिक असुरक्षा बढ़ रही है और दिव्यांग बच्चों को बराबरी का वित्तीय सुरक्षा अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
यह शिकायत पंजाब के लुधियाना स्थित लघु उद्योग भारती के एक पदाधिकारी द्वारा की गई थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि बीमा कंपनियां दिव्यांगता को आधार बनाकर पॉलिसी देने से मना कर देती हैं, जो कि भेदभावपूर्ण है। उन्होंने नियामक संस्था से मांग की है कि ऐसी स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की जाएं जिससे दिव्यांगता बीमा से वंचित करने का कारण न बने। साथ ही विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए समावेशी बीमा उत्पाद तैयार करने और बीमा कंपनियों में जागरूकता बढ़ाने की भी मांग की गई है।
एनएचआरसी ने इस मामले में मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत कार्रवाई करते हुए आईआरडीएआई (भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) को निर्देश दिया है कि वह शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करे और 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपे।
इसके साथ ही, इस पूरे मामले की एक प्रति वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग को भी भेजी गई है। आयोग ने आईआरडीएआई को यह भी निर्देश दिया है कि वह अपनी रिपोर्ट की एक प्रति ईमेल के जरिए भी भेजे।
–आईएएनएस
वीकेयू/वीसी
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