डिजिटल प्रचार की वजह से तिरुपुर के कपड़ा उद्योग में चुनावी मंदी, टीशर्ट व झंडों की मांग में भारी गिरावट

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कोयंबटूर, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने वाला है। ऐसे में तिरुपुर का कपड़ा उद्योग केंद्र, जो पारंपरिक रूप से चुनाव के मौसम में गुलजार रहता है, इस साल एक असामान्य मंदी का सामना कर रहा है क्योंकि चुनाव संबंधी सामानों की मांग में भारी गिरावट आई है। तिरुपुर को लंबे समय से चुनाव प्रचार सामग्री उत्पादन का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है। यहां के उद्यमियों का कहना है कि बदलती राजनीतिक रणनीतियों के कारण ऑर्डर में काफी कमी आई है। पार्टियां अब बड़े जनसभाओं के बजाय डिजिटल प्रचार और सोशल मीडिया पर अधिक ध्यान…

कोयंबटूर, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने वाला है। ऐसे में तिरुपुर का कपड़ा उद्योग केंद्र, जो पारंपरिक रूप से चुनाव के मौसम में गुलजार रहता है, इस साल एक असामान्य मंदी का सामना कर रहा है क्योंकि चुनाव संबंधी सामानों की मांग में भारी गिरावट आई है।

तिरुपुर को लंबे समय से चुनाव प्रचार सामग्री उत्पादन का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है। यहां के उद्यमियों का कहना है कि बदलती राजनीतिक रणनीतियों के कारण ऑर्डर में काफी कमी आई है। पार्टियां अब बड़े जनसभाओं के बजाय डिजिटल प्रचार और सोशल मीडिया पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिनसे पारंपरिक रूप से मुद्रित टी-शर्ट, टोपी और झंडे जैसी वस्तुओं की भारी मांग उत्पन्न होती थी।

उद्योग के जानकारों का मानना है कि इस बदलाव ने एक भरोसेमंद मौसमी व्यापार चक्र को बाधित कर दिया है। कई छोटे और मध्यम आकार के उद्यम, जो आम तौर पर चुनावों के दौरान पूरी क्षमता से काम करते थे, अब इनका काम पूरी तरह प्रभावित है। यह प्रौद्योगिकी-आधारित चुनाव प्रचार के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

पिछले चुनावों में उम्मीदवार अक्सर स्थानीय प्रचार अभियानों के लिए अपने नाम और प्रतीकों वाले अनुकूलित सामान मंगवाते थे। यह प्रथा अब काफी हद तक लुप्त हो गई है, जो जमीनी स्तर पर व्यक्तिगत ब्रांडिंग से दूर हटने का संकेत देती है।

जमीनी स्तर पर प्रचार के तरीकों में भी बदलाव आया है। घर-घर जाकर प्रचार करना, जिसमें कभी पार्टी कार्यकर्ता ब्रांडेड टी-शर्ट पहने नजर आते थे, अब अधिक किफायती विकल्पों में तब्दील हो गया है।

पार्टी कार्यकर्ता तेजी से तौलिये जैसी कम लागत वाली वस्तुओं को पसंद कर रहे हैं, जो सस्ती होने के साथ-साथ चुनाव प्रचार में दृश्यता के लिए पर्याप्त भी हैं।

मंदी केवल परिधान तक ही सीमित नहीं है। टोपी जैसे चुनावी प्रचार सामग्री की बिक्री में भी भारी गिरावट आई है और शुरुआती पूछताछ के बावजूद वास्तविक ऑर्डर उम्मीद से कम रहे हैं। इसी तरह, झंडे बनाने वाली कंपनियां भी घाटे का सामना कर रही हैं क्योंकि मतदान का दिन नजदीक आने के बावजूद पहले से तैयार स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा बिना बिका रह गया है।

गठबंधन को अंतिम रूप देने और उम्मीदवारों की घोषणा करने में देरी ने उद्योग को और भी प्रभावित किया है, जिससे चुनाव प्रचार पर खर्च करने के लिए उपलब्ध समय कम हो गया है।

निर्माताओं का कहना है कि नामांकन की पुष्टि होने के बाद ही आमतौर पर ऑर्डर बढ़ते हैं, जिससे इस बार बड़े पैमाने पर उत्पादन की गुंजाइश कम रह गई है। हालांकि, नए राजनीतिक उम्मीदवारों से कुछ मांग उभरी है, जिससे नए ऑर्डर मिलने के सीमित अवसर पैदा हुए हैं। फिर भी, समय की कमी के कारण निर्माता इस सेगमेंट का पूरी तरह से लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

–आईएएनएस

एसएके/पीएम

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