बेंगलुरु, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। कन्नड़ सुपरस्टार दर्शन को रेणुकास्वामी हत्याकांड में गुरुवार को बड़ा झटका लगा। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी नंबर 14 प्रदोष एस. राव को सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही प्रदोष को सरकारी गवाह बनाए जाने के अभियोजन के फैसले को चुनौती देने के दर्शन के विकल्प सीमित हो गए हैं।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदोष के सरकारी गवाह के तौर पर बयान दर्ज करने की प्रक्रिया बुधवार को बेंगलुरु की निचली अदालत में पूरी हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट और निचली अदालत के आदेशों को बरकरार रखते हुए प्रदोष को सरकारी गवाह का दर्जा देने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि ऐसा कोई आधार नहीं है, जिसके चलते शीर्ष अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। पीठ ने याचिका में कोई मेरिट नहीं पाया और इसे खारिज कर दिया।
यह याचिका दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी ने दायर की थी। इसमें प्रदोष को सरकारी गवाह बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान दर्शन की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि आरोपी को सरकारी गवाह का दर्जा देने में निर्धारित प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उचित तरीके से पालन नहीं किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस चुनौती को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि प्रदोष से निचली अदालत में जिरह के दौरान सवाल किए जा सकते हैं। अदालत ने संकेत दिया कि बचाव पक्ष के पास सरकारी गवाह के बयान और उसकी विश्वसनीयता को जिरह के जरिए परखने का पर्याप्त अवसर रहेगा।
दर्शन के वकीलों ने अपनी दलीलें रखने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध भी किया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि वह मामले से संबंधित प्रासंगिक सामग्री पहले ही देख चुकी है। इसके बाद याचिका खारिज कर दी गई और कर्नाटक हाईकोर्ट तथा निचली अदालत के आदेश बरकरार रखे गए।
सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की अब तक की कार्यवाही का भी संज्ञान लिया। अदालत को बताया गया कि मृतक रेणुकास्वामी की मां अपने बयान से मुकर गई हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए पीठ ने कहा कि मामले में सरकारी गवाह की मौजूदगी आवश्यक हो सकती है।
बुधवार को निचली अदालत में प्रदोष का सरकारी गवाह के तौर पर बयान दर्ज किया जाना भी सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद महत्वपूर्ण हो गया है। उसका बयान अब मुकदमे में साक्ष्य का हिस्सा होगा। वहीं, बचाव पक्ष को सुनवाई के दौरान प्रदोष से जिरह करने का अधिकार रहेगा।
प्रदोष को शुरुआत में इस मामले में आरोपी नंबर 14 बनाया गया था। बाद में निचली अदालत ने उसे सरकारी गवाह बनने की अनुमति दी थी। इस फैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
अब शीर्ष अदालत द्वारा चुनौती खारिज किए जाने के बाद दर्शन और अन्य आरोपियों को प्रदोष के सरकारी गवाह के तौर पर दिए गए बयान और उससे जुड़े साक्ष्यों का सामना मुकदमे के दौरान ही करना होगा। वे ऊपरी अदालतों में उसके सरकारी गवाह का दर्जा रद्द कराने की दिशा में आगे नहीं बढ़ सकेंगे।
रेणुकास्वामी हत्याकांड जून 2024 में सामने आया था। रेणुकास्वामी का शव बेंगलुरु में बरामद किया गया था। मामले में अभिनेता दर्शन समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। सभी आरोपी इस मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला दर्शन की बचाव रणनीति के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब प्रदोष का सरकारी गवाह के तौर पर बयान निचली अदालत में पहले ही दर्ज हो चुका है।
अब बचाव पक्ष के पास प्रदोष के बयान की सामग्री और उसकी विश्वसनीयता को जिरह के जरिए चुनौती देने का विकल्प है। मुकदमे की आगे की कार्यवाही में प्रदोष की गवाही और उससे जुड़े साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
–आईएएनएस
डीएससी
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



