जून में सीपीआई महंगाई अनुमान के अनुरूप रही, अगले दो तिमाहियों में 4-4.5 प्रतिशत के दायरे में रहने की उम्मीद: अर्थशास्त्री

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नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। अर्थशास्त्रियों ने सोमवार को कहा कि जून में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर 4.38 प्रतिशत रही, जो उनके अनुमान के अनुरूप है। उनका मानना है कि अगले दो तिमाहियों में महंगाई 4 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। हालांकि, खाद्य महंगाई इसकी दिशा तय करने वाला सबसे अहम कारक होगी, क्योंकि मानसून की असमान प्रगति और अल नीनो से जुड़ी बारिश की अनिश्चितता खाद्य कीमतों को प्रभावित कर सकती है। जून में जिन वस्तुओं की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, उनमें चांदी के आभूषण सबसे…

नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। अर्थशास्त्रियों ने सोमवार को कहा कि जून में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर 4.38 प्रतिशत रही, जो उनके अनुमान के अनुरूप है। उनका मानना है कि अगले दो तिमाहियों में महंगाई 4 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है। हालांकि, खाद्य महंगाई इसकी दिशा तय करने वाला सबसे अहम कारक होगी, क्योंकि मानसून की असमान प्रगति और अल नीनो से जुड़ी बारिश की अनिश्चितता खाद्य कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

जून में जिन वस्तुओं की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, उनमें चांदी के आभूषण सबसे ऊपर रहे, जिनकी कीमतों में सालाना आधार पर 133.21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, सोने के आभूषणों की कीमतें 36.82 प्रतिशत बढ़ीं।

वहीं, जून में कुल खाद्य महंगाई 5.32 प्रतिशत दर्ज की गई।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि गैर-खाद्य श्रेणी में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर खुदरा ईंधन कीमतों पर पड़ा, जिससे परिवहन महंगाई बढ़कर 4.3 प्रतिशत हो गई।

उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में नरमी आने से व्यक्तिगत देखभाल (पर्सनल केयर) श्रेणी की महंगाई कुछ कम हो सकती है, लेकिन बेस इफेक्ट के कारण यह अभी ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है।

सबनवीस के अनुसार, आने वाले समय में महंगाई का मौजूदा रुझान जारी रहने की संभावना है और खाद्य कीमतों की दिशा मुख्य रूप से मानसून की प्रगति पर निर्भर करेगी।

वहीं, डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक राधिका राव ने कहा कि जून की महंगाई बाजार के अनुमान से थोड़ी अधिक रही, जिसका कारण खाद्य कीमतों का सामान्य स्तर पर लौटना और मई के मध्य में ईंधन कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर है।

उन्होंने कहा कि बाजार की नजर अब दक्षिण-पश्चिम मानसून के भौगोलिक वितरण पर है। राहत की बात यह है कि जुलाई में देश भर में बारिश की कमी घटकर 15 प्रतिशत रह गई है, जबकि जून के अंत तक यह 40 प्रतिशत से अधिक थी। मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बारिश में सुधार देखने को मिला है।

इसके अलावा, ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च प्रमुख राजीव शरण ने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आती है और सोना-चांदी (बुलियन) महंगे बने रहते हैं, तो महंगाई पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।

हालांकि, यदि मानसून सामान्य और अनुकूल रहता है, तो खाद्य कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे महंगाई नियंत्रित रहने के साथ-साथ भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लिए मौद्रिक नीति में राहतकारी रुख बनाए रखना भी आसान होगा।

–आईएएनएस

डीबीपी

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