कोयंबटूर, 6 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के सबसे बड़े नारियल उत्पादन क्षेत्र पोलाची से नारियल के निर्यात में फिर से तेजी आने के संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और खाड़ी देशों से मांग दोबारा बढ़ने से किसानों और निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कई महीनों से कारोबार प्रभावित था, लेकिन अब स्थिति में सुधार दिखाई दे रहा है।
खाड़ी देशों के प्रमुख बाजारों से नारियल निर्यात के लिए नई पूछताछ आने लगी है। इससे विदेशी व्यापार फिर से पटरी पर लौट रहा है, जो पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान लगभग पूरी तरह ठप हो गया था।
पोलाची से बड़ी मात्रा में नारियल खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है। लेकिन पिछले तीन महीनों में निर्यात में भारी गिरावट आई, जिससे व्यापारियों और किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
हालांकि, नारियल का निर्यात फिर से शुरू हो गया है, लेकिन इस क्षेत्र के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं। संघर्ष के दौरान माल ढुलाई का किराया काफी बढ़ गया था। अब इसमें कुछ कमी आई है, लेकिन यह अभी भी सामान्य से काफी ज्यादा है।
शिपिंग का खर्च बढ़ने और माल की ढुलाई में देरी होने से निर्यातकों को भारी नुकसान हुआ। कई खेपें अपनी मंजिल तक पहुंचने से पहले ही खराब हो गईं।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि मांग बढ़ने के साथ आने वाले हफ्तों में नारियल का निर्यात धीरे-धीरे पहले की तरह सामान्य हो जाएगा।
इस रुकावट से पहले पोलाची के निर्यातक कोच्चि बंदरगाह के जरिए हर दिन नारियल से भरे कई कंटेनर खाड़ी देशों में भेजते थे। लेकिन पिछले करीब तीन महीनों तक बंदरगाह से निर्यात का काम लगभग ठप रहा।
निर्यात लंबे समय तक बंद रहने से घरेलू बाजार में नारियल की सप्लाई बढ़ गई। इससे नारियल की कीमतों में भारी गिरावट आई। पिछले साल इसी समय नारियल का भाव करीब 65,000 रुपये प्रति टन था, जो अब घटकर लगभग 40,000 रुपये प्रति टन रह गया है।
इस साल बंपर पैदावार से बाजार में नारियल की आवक बढ़ गई, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ा। हालांकि, मजदूरों की कमी के कारण कीमतें इससे ज्यादा नहीं गिरीं। प्रवासी मजदूर कम होने से पूरे इलाके में नारियल तोड़ने और छीलने का काम प्रभावित हुआ है। इसके कारण नारियल बाजार तक धीमी रफ्तार से पहुंच रहे हैं।
किसानों को उम्मीद है कि कटाई का मौसम खत्म होने से पहले, अगले दो महीनों तक ज्यादा पैदावार होती रहेगी।
हालांकि, अगले साल की फसल को लेकर अभी से चिंताएं सामने आ रही हैं। इस साल सामान्य से कम बारिश और सूखे जैसे हालात बनने से आने वाले सीजन में पैदावार घटने का डर पैदा हो रहा है, जिससे आगे चलकर कीमतें बढ़ सकती हैं।
पानी की कमी भी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। कम बारिश के कारण भूजल स्तर गिर गया है। ऐसे में कई किसान नारियल के बागों की सिंचाई के लिए टैंकर से पानी मंगवा रहे हैं, ताकि पेड़ों को सूखे से बचाया जा सके। किसानों को उम्मीद है कि निर्यात बढ़ने से बाजार में फिर से स्थिरता आएगी।
–आईएएनएस
एसएचके/एएस
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