India Crude Oil Stock: ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का असर दुनिया के कई देशों पर दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया है कि इस युद्ध का देश की तेल सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। सरकार के अनुसार भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत है और देश में तेल की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार का कहना है कि पिछले कई वर्षों में बनाई गई नीतियों के कारण भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है। साथ ही तेल आयात के लिए कई अलग-अलग रास्ते भी तैयार किए गए हैं, जिससे किसी एक मार्ग पर निर्भरता कम हो गई है।
India Crude Oil Stock: भारत के पास पर्याप्त तेल का भंडार
सरकार के मुताबिक देश में इस समय 250 मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद का स्टॉक मौजूद है। इसे लीटर में देखें तो यह करीब 4000 करोड़ लीटर के बराबर होता है। इतना बड़ा भंडार भारत को लगभग 7 से 8 हफ्तों तक ईंधन की सप्लाई बनाए रखने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
अलग-अलग जगहों पर रखा जाता है तेल
भारत अपने तेल भंडार को कई अलग-अलग जगहों पर सुरक्षित रखता है। इनमें भूमिगत रणनीतिक भंडार, बड़े स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन नेटवर्क, टर्मिनल और समुद्र में मौजूद तेल टैंकर शामिल हैं। देश के प्रमुख रणनीतिक तेल भंडार मैंगलोर, पदुर और विशाखापत्तनम में स्थित हैं। इन जगहों पर आपात स्थिति के लिए बड़ी मात्रा में तेल स्टोर किया जाता है ताकि संकट के समय देश की जरूरतें पूरी की जा सकें।
कई देशों से आयात, एक रास्ते पर निर्भरता कम
पहले भारत करीब 27 देशों से तेल आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर लगभग 40 हो गई है। इसका फायदा यह है कि भारत अब किसी एक देश या एक मार्ग पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। भारत का लगभग 40 प्रतिशत तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत तेल अन्य मार्गों और देशों से आता है। इसलिए अगर किसी एक रास्ते में परेशानी भी होती है तो देश की सप्लाई प्रभावित नहीं होती।
रूस से तेल की खरीद जारी
भारत और रूस के बीच लंबे समय से ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत संबंध रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा था। वर्तमान समय में भी रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। 2026 तक रूस से तेल की आपूर्ति लगातार जारी है, जिससे भारत को स्थिर और सस्ता तेल मिल रहा है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता भी मजबूत
भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता लगभग 258 MMTPA है, जो दुनिया में चौथे स्थान पर है। वहीं देश की घरेलू जरूरत करीब 210 से 230 MMTPA के बीच है। इसका मतलब है कि भारत अपनी जरूरत से ज्यादा तेल रिफाइन कर सकता है। यही वजह है कि भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक भी बन चुका है।
उज्ज्वला योजना से सस्ता हुआ खाना पकाना
सरकार का कहना है कि पेट्रोलियम सेक्टर में हर फैसला तीन बातों को ध्यान में रखकर लिया जाता है, ऊर्जा सस्ती हो, आसानी से उपलब्ध हो और पर्यावरण के लिए बेहतर हो। नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में सऊदी CP बेंचमार्क कीमत करीब 16 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी नहीं की गई। सरकार के अनुसार उज्ज्वला योजना के तहत अब एक परिवार के लिए साफ ईंधन से खाना पकाने की लागत लगभग 7.31 रुपये प्रतिदिन रह गई है।
राष्ट्रीय हित के आधार पर तेल की खरीद
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की तेल खरीद नीति पूरी तरह देशहित पर आधारित है। भारत वहीं से तेल खरीदता है जहां से वह सस्ता, उपलब्ध और आसानी से पहुंचने वाला हो। साथ ही सरकार का कहना है कि सभी तेल सौदे अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत किए जाते हैं। भारत वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने में भी अपनी भूमिका निभा रहा है।
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