झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों में बनेंगे सीबीटी सेंटर, बीआईटी सिंदरी बनेगी यूनिटरी यूनिवर्सिटी

रांची, 13 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड सरकार ने राज्य की उच्च एवं तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलावों की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी विश्वविद्यालयों में पीपीपी मॉडल पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) सेंटर स्थापित करने, बीआईटी सिंदरी को यूनिटरी यूनिवर्सिटी में अपग्रेड करने और अगले 15 दिनों में झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग को कार्यरत करने जैसे अहम फैसलों पर सहमति बनी।

झारखंड मंत्रालय में हुई बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रगति और चालू वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। बैठक में बीआईटी सिंदरी को यूनिटरी यूनिवर्सिटी बनाने के लिए विधेयक तैयार करने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही बीआईटी एवं जेआईटी संस्थानों के संचालन के लिए आईआईटी और एनआईटी की तर्ज पर नई गवर्निंग व्यवस्था विकसित करने का भी निर्णय लिया गया।

राज्य के नौ जिलों रांची, पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, रामगढ़, गिरिडीह, पलामू, गुमला, गोड्डा और साहिबगंज में तकनीकी शिक्षा क्लस्टर विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। सभी राजकीय पॉलिटेक्निक और प्रौद्योगिकी संस्थानों में इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल डिजाइन, लॉजिस्टिक्स एवं शिपिंग जैसे रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग और कोचिंग रेगुलेटरी अथॉरिटी को अगले 15 दिनों में पूरी तरह कार्यरत करने का निर्देश दिया गया। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालयों में लाइव ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।

पहले चरण में यह व्यवस्था झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय और बीबीएमके धनबाद में लागू होगी। समीक्षा के दौरान बताया गया कि गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अब तक 2,888 पात्र विद्यार्थियों को स्वीकृति दी गई है, जबकि 243 विद्यार्थियों को विभिन्न बैंकों के माध्यम से करीब 64 करोड़ रुपये का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया गया है। सरकार इन ऋणों की गारंटी दे रही है।

बैठक में इस योजना के दायरे का विस्तार कर अधिक से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने पर जोर दिया गया। इसके अलावा मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति, मानकी मुंडा छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री फेलोशिप, राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना और अन्य छात्र कल्याण योजनाओं की भी समीक्षा की गई।

विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को भरने, छात्रावासों की स्थिति सुधारने और उच्च शिक्षा के लिए वैकल्पिक वित्तीय स्रोत विकसित करने पर भी चर्चा हुई। बैठक में झारखंड अर्बन प्लानिंग एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (जेयूपीएमआई) को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधीन लाने पर सहमति बनी। यहां बैचलर ऑफ प्लानिंग, मास्टर ऑफ प्लानिंग और एमबीए इन इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

–आईएएनएस

एसएनसी/एएसएच

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